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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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Notice Board


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17 अप्रैल 2017

मा सरस्वतीनी उपासक चारण ज्ञातिऐ हंमेशा शुभवाणी बोलवी...!

मा सरस्वतीनी उपासक चारण ज्ञातिऐ हंमेशा शुभवाणी बोलवी...!

आई श्री सोनलमा कहेता के आपणे मा शारदाना उपासको छीऐ, कोईनी निंदा कुथली करीने शारदाऐ आपेल वाणीने कयारेय अभडावशो नहीं.

अपशब्द चारणोथी बोलाय ज नहीं कारण के आपणे अमृतना बाळक छीऐ, विषना नहीं. जे ऐवुं करशे तेना उपर माताजी कयारेय प्रसन्न नहि थाय माटे सौ प्रथम आपणा वहेवारमां माताजीनी प्रतिष्ठा करवानी छे.

वाणी ऐ मा छे. वाणी थकी ज विश्वनो वहेवार चाले छे.

युगशकितमां सोनलमाना विचारो मात्र सिघ्घांतिक न हता ते संपूॅण वहेवारीक अने प्रयोगात्मक हता.

पू. आईमा कहेता के नबळो विचार ऐ ज मृत्यु समान छे.

माणसनी नियत बगडे तो नसीब बगडे. नियत अने नसीबने सीघो सबंघ छे. '' नियत तेवुं नसीब  '' पुरुषाथॅ ऐज परचो छे. निष्फळता ऐ शुं छे ? बीजुं कांई नथी प्रयत्ननो ज अभाव छे.

समाजमां पुरुषाथीॅ माणस ज स्वपनो साकार करी शके.

ऐकबीजाने सुख दु:खमां मुश्केलीमां मददरुप थई पोतानो बनतो टेको आपी उभा करवानी भावना ज्यारे निमाॅण थशे त्यारे ज समाजनी उन्नति थशे.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

16 अप्रैल 2017

अखील भारतीय चारण (गढवी) महासभा संमेलन अहेवाल

अखील भारतीय चारण (गढवी) महासभा संमेलन आजे ता.16-04-2017 ना रोज विश्वगुरु महामणडलेश्वर स्वामी महेशरानंदजी महाराज विश्व दीप गुरुकुल आश्रम जाडन , पाली मारवाड़ (राजस्थान) खाते योजायेल जेमां टीकाप्रथा, कुरिवाज, जेवी बाबतो पर चर्चा थयेल आ संमेलन मां राजस्थान,गुजरात,हरियाणा,उत्तरप्रदेश थी चारणो हाजर रहेल

आईश्री देवल मां (सवनी वेरावळ)
आईश्री कंकुकेशर मां
भगतराम महाराजजी
सी.डी. देवल (अध्यक्षश्री अखील भारतीय चारण(गढवी) महासभा)
ओमकारसिंह लाखावत
सी.पी.देवल
राकेशभाई कोचर (हरियाणा)
देवराजभाई गढवी (मध्यप्रदेश)
सी.दी.आढा
सी.पी.देवल
शिवमभाई रतनु (अजमेर)
सहित चारण समाजना आगेवानो हाजर रहेल

गुजरात चारण-गढवी समाजना प्रतिनिधि तरीके हाजर रहेल

आईश्री देवल मां (सवनी वेरावळ)
पद्मश्री भीखुदान गढवी (जुनागढ)
देवीदानभाई गढवी (उपाध्यक्षश्री अखील भारतीय चारण(गढवी) महासभा)
विजयभाई के.गढवी (प्रमुखश्री कच्छ चारण समाज)
अंबादानभाई रोहडीया (नियामकश्री झवेरचंद मेघाणी लोकसाहित्य केंद्र सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी राजकोट)
वालजीभाई जीवराज गढवी (पूर्व प्रमुखश्री कच्छ चारण समाज)
गीरीशभाई मोड़ (,मढडा)
राजेशभाई ठाकरीया (प्रमुखश्री सूरत चारण समाज) अने तेमनी टीम
बीपीनभाई गढवी (अमदावाद)
दिनेशभाई बी. गढवी (बनासकांठा)
जे.डी.गढवी (सोनल युवक मंडळ पालनपुर)अने तेमनी टीम
भगवानभाई अयाची (गांधीधाम)
चंद्रिकाबेन गढवी (CGUCO) वडोदरा
मोमायाभा परबतभाई गढवी (महामंत्री चारण समाज कच्छ)
राजभा गढवी (राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ सेवा)
मेसुरभाई गढवी (चारण समाज जामजोधपुर)
जीतुभाई गढवी (प्रमुखश्री गीर,बरडो, आलेच चारण समाज)
सामतभाई गढवी (समूह लग्न समिति पांचोटीया)
करशनभाई गढवी (समूह लग्न समिति पांचोटीया)
मोमायाभाई मालम (समूह लग्न समिति आदिपुर)
पूनोभाई गढवी (जामजोधपुर)
वरजांगभाई गढवी (जामजोधपुर)
सहित गुजरात चारण समाजना आगेवानो हाजर रहेल








14 अप्रैल 2017

|| सूर्य वन्दना || ||कर्ता मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

*|| रचना - सूर्य वंदना ||*
    *|| छंद- मोतीदाम ||*
  *||कर्ता-मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||*

*फूटी परभात  सुराजण जाप,*
*कटे सब ताप मटे   दर पाप,*
*खगा  कलबल मचावत  भेर,*
*नमा मीत नाथ दिनं कर मेर*(1)

*झटंकीय तेज झरे  परकाश,*
*पटंकिय पान खरे  सुरजाश,*
*लटंकीय फल द्र्से   तरुपर,*
*मनंखीय मीत ऋतु अनुसर,*(2)

*तरहे खगला जलके  बिन जी,*
*वरहे धाखतो पलकें भाण जी,*
*तरुवा सुखता तळीया मुर थी*,
*मीतवा देखता दुखिया दूर  थी,*(3)

*भगति कर भावण भेदमरे,*
*शगति धर  लावण मेदसरे,*
*हरी   मन रेव हरी   समरे,*
*धरी  पर मीत धरी   भ्रमरे*(4)

*कियागुण गान अरक रा आज,*
*गुणागीत गासुय काल  नवाज,*
*गजानन गोविन्द याद   कराव,*
*दिनेकाल मीत गुणा   गणराव,*(5)

*केडो दिन व्यो,हुतो अज काज,*
*कविता रो साज कितो सुरराज,*
*मुके खूब भावत दिनरी  मोज,*
*इ चातो हु मीत हुवे मोज रोज,*(6)

*છપ્પય*

*શનિ તાત સુરજણ,સકલ જગ મેં સમાયા,*
*પરભાતે પ્રગટણ,હરણ તિમિર હટાયા,*
*પાપ દર્દ જિય પ્રાણ,તાણ તિહુ લોકન તાર્યા,*
*જાપ જોગંદર જપે,અપે કૈં જીવ ઉગાર્યા,*
*અદલ સાખ તું એકલો,ભોમ નીરખતો ભાણ,*
*હર્ષ મીત બન હેરતો,રાખ સુખી જગ રાણ,*

*જિય-મન,ચિત્ત*

*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मीत*

|| युद्ध वर्णन || रचना कवि धार्मिकभा गढवी

*|| युद्ध वर्णन ||*
*(छंद मोतीदाम)*
घणी धणणाट घणी घमसाण
मची रणजंग अत्तिशय हाण
नभो परथी बरसे खुब बाण
परस्पर एक दुजा हर प्राण *(१)*
धरी तलवार बिजे कर ढाल
अरि पर वार पडे मन फाल
नभे सब धूळ धरा सब लाल
दिसे वह द्रश कुकोप कराल *(२)*
निरंतर घाव थता हरदम्म
हरेक क्षणेय पधारत जम्म
गजावत गज्ज धरा धमधम्म
फटाफट अश्र्व चले पडदम्म *(३)*
ध्रबांग ध्रबांग बजे हर ढोल
हरीहर ओम रटे मुख बोल
छटाछट भोम उडे लहु छोल
विरो हर रास रमे लग गोल *(४)*
करे हद हास नरा नर नास
दिसे चहुकोर जमीं पर लास
जरा पलभार खमे नह त्रास
अणी पर शस्त्र तणी बस मांस *(५)*
धरा पर धूल मिले सह खून
अत्ति हलचल्ल छता सब सून
मरा मर मार धरी मन धून
निरंतर वार करे विर पून *(६)*
कहेर बहुत्त करे अकरोस
जमावत जुद्ध मही बहु जोस
चुकावत वार अरोस परोस
दखावत विर्ध पक्षे हर दोस *(७)*
महावत धारत आगळ  गज्ज
अने सब अश्र्व सवार सुसज्ज
धमाधम धार उडे रण रज्ज
रहे बनराज रु भागत अज्ज *(८)*
सजी समरांगणमां शणगार
नभे तक आंख खडी लय हार
करी बस राह दिसे बस धार
रु अप्सर हूर अलौकिक नार *(९)*
लडे रण हाथ धरी हथियार
मचावत फौज दु मारम मार
करे सब अंग कु आरमपार
झिले तब भोम विरा तण भार *(१०)*
- *कवि धार्मिकभा गढवी रचित*
9712422105

13 अप्रैल 2017

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