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23 नवंबर 2015

आईश्री सोनल शकित चालीसा कर्ता :- आशानंद सुराभाई गढवी

आवतीकाले आईश्री सोनल मांनो 41 मो निर्वाण दिवस छे
आ निमिते आशानंदभाई गढवी रचित आईश्री सोनल शकित चालीसा माणीये

आईश्री सोनल शकित चालीसा

           दोहो

सोनल गुन सागर सम,
विशाल व्योम समान
बरनहुं चारन बिमलयश,
शकित दे कृपा निधान

             चोपाई

जय सोनल शकित सुख करनी |  जय हमीर सुता दू:ख हरनी ||
राणल पुत्री जननी भवानी |   असुर मर्दिनी चंडी समानी ||
श्याम लोंबडी नयन विशाला |  शकित स्वरूपे चारन बाला ||
सोनल रूपे तुं हीं सुहावे |  बालक दरशन कर सुख पावे ||
भारत भूमि गुर्जर देशा |   जहां जन्मे सब संत विशेषा ||
सोरठ धरा मढ़डा ग्रामा |   प्रगटी सोनल शकित श्यामा ||
पोष शुकल बीज सुखदाई |  चारन गृहे अंबा आई ||
प्रगट भई सोनल पुनिता |  शिखावन आई अंबा सुनीता ||
चारन कुलमें हुई काल रात्री |  सोनल सुविता भै सुखदात्री ||
तुं हीं,भारती आवड आई |  खोडल,मोगल,हिंगला माई ||
देवल, राजल मा सोनबाई |  रवेची, बौचर अरू नागबाई ||
कागल, पीठळ मा तुं करनी |  अशरन शरन तारन तरनी ||
तुं हीं सर्व शकित स्वयं जग मांहीं |   सचराचरमां तुं हीं समाहीं ||
सांया ईसर दास तुमारा |  पुत्र भक्तमां प्राण ते प्यारा ||
काग, पिंगल, शंकर समाना |  शकित तुम्हारी से बलवाना ||
समाजमां निज गेह बुलाये |  चारन वंदन करी हरषाये ||
ग्राम ग्राम में सोनल आई |   धर्म काज धुमी सब माई ||
धरम स्थापन अंबा आई |   सत्य सनातन रक्षक कहाई ||
ऐकहीं माला मोती अनेका |  बिखर गये थे चारन लोका ||
पुन: सुगंठीत मा सब किन्हा |  द्रेष कलेष बिदाय लीन्हा ||
नमो नमो मा मढडा वासी |  नमो नम: सोनल सुखरासी ||
बल बुद्धि विधा गुन शील खानी |  दे सुख शांति कृपालु दानी ||
ज्ञान विज्ञान संपत्ति दाता |  सद् गुन दे आई सोनल माता ||
चारन समाज है बड भागी |  जिन पर आई अंबा अनुरागी ||
जयति जयति सोनल जगमाता |  आदि शकित त्रिभुवन दाता ||
यश तुमारो जन जन गावे |  सुमीरी नाम सब फल पावे ||
आई अन्नपूर्णा सब जगपाला |  सर्जक संहकार माहीं दयाला ||
तुं हरता करता सुखकारी |  भुवन तिनमें ज्योति तुमारी ||
जय जय जय सोनल सुखदाई |  चारन तारन अंबा आई ||
करुणा महीं तु वत्सल माता |  तुं ही सुख सत्य शांति दाता ||
कष्ट निवारण चारन देवी |  भकत जन गण सदा तुम सेवी ||
असुर सामे चंडी जवाला |  बालक पर मा होई दयाला ||
कोटी कोटी पूजहीं सब देवा |  चाहत ब्रह्म महेश तुज सेवा ||
तुम गुन सागर पार न पावे |  शेष शारद सत मुख गावे ||
जो भकत पाठ करे सत बारा |  मिटे कलेश दु:ख शोक अपारा ||
श्रध्धा सहित चालीसा गावे |  प्रेम भकित परम पद पावे ||
जगत नियंता ज्ञान विज्ञानी |  सिध्धि करो मम काव्य बानी ||
व्यापी सकलमें तुं हीं भवानी |  यथा मतिमें ऐति बखानी ||
बालक शरन मा निज जानी |  करहुं कृपा मा तु हीं भवानी ||
"आशानंद" बाल तुम्हारा |  छमहुं दोष सकल हमारा ||

चारन सुता जगमात, संकट हरहुं सुखरूप
जगदंब मम हृदय रहो, सोनल शांत स्वरूप

      श्री सोनल मात की जय

     श्री सोनल चालीसा समाप्त

कर्ता :- आशानंद सुराभाई गढवी
गाम- झरपरा ता.मुंदरा-कच्छ
           मो-9824075995
टाईप :- www.charanisahity.in

           वंदे सोनल मातरम् 

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