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20 दिसंबर 2015

कवि श्री दादनी एक रचना { टेरवां } ....

कवि श्री दादनी एक रचना { टेरवां } ....
धिरां धिरा रे वगाड , काळजामां वागे छे टेरवां
लपतां ने छपतां आवी , उभां छे बारमां ;
खोले छे हैयाना द्वार , टकोरा मारे छे टेरवां.
हसतां भीत्युंअे ओल्यां चाकळे चंदरवे ;
मांड्युं छांड्युं मां मलकाय , टोडले टहुके छे टेरवां.
ता णा वा णा जेम चोट्यां गो कु ळ ने ,
गोपीने हैये गूंथाई , वनरावनमां गुंजे छे टेरवां.
जीवन जंजाळ घडीक ममताने खोळले ;
बाळक बनीने उंघी जाय , माथडा पंपाळे छे टेरवां.
डूकी गयां होय भले नदियुंनां वेन "दाद"
अंतरनां नीर उभराय , वीराडा गाळे छे टेरवां.
भुल होयतो सुधारीने वांचवा विनंती
रचयता :- कविश्री दाद
टाईप :- मनुदान गढवी -
➡ एक विनंती आप  कोईबंधू पासे कविश्री दाद अने कविश्री कागबापुनी रचनाओ ( साहित्य ) होयतो आ 9687573577.मोकलवा नम्र विनंती छे
जेथी करने आ साहित्यनो लाभ बधाने मळी शके .
सहकार बदल सहुनो आभार
      वंदे सोनल मातरम् 

1 टिप्पणी:

jabbardan gadhavi ने कहा…

Khub saras rachna... Ne ena rachayita ne naman...

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