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10 अप्रैल 2016

|| शगती तुंनो सवाल || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.           || शगती तुंने सवाल ||
.    रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.               छंद : सारसी
.                        दोहो
समरी में हर स्वासमां, चुक्यो कदी नई चाल
जवाब  दे कउं जोगडो   , शगती तुंने सवाल
.                         छंद
मानेल साची मात तुजने धारीयें धींगो धणीं
भुली भवांनी भाव भव ना बाई कां बेरी बणीं
लाजाळ अमणीं लागणीं कां रात भर रोती रही
जोगण जनेता जोगडा नी जुलम कां जोती रही..01
भोळाय हैये भावथी जननी सतत जापो जप्या
ब्रम चारणी व्रत धारणी ताराय पथ देहो तप्या
देवी य तुंज ने दुर द्रस्टी गगन मां गोती रही
जोगण जनेता जोगडा नी जुलम कां जोती रही..02
मुजने नथी कंई मोह माया आ जगत नीअंबिका
तांणे सकळ जन तोय कां ई जणांवो जगदंबिका
धधकावती ना धोध तुं बस टोयली टोती रही
जोगण जनेता जोगडा नी जुलम कां जोती रही..03
भेळीय रेजे भेळीयाळी आई  विनती ऐटली
जांणे बधुं तुं छतां जननी करुं अरदा केटली
करीयां कुडां ना कोई कलमुं धरम थी धोती रही
जोगण जनेता जोगडा नी जुलम कां जोती रही..04
आवो ने वारे मात आवड आई क्यां अटवाई तुं
काली कराली मात गई क्यां मोगलाणी माई तुं.
नाखे पुकारो बाळ नानुं सीद हजी सोती रही
जोगण जनेता जोगडा नी जुलम कां जोती रही..05

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