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19 मई 2016

रुडां रे रखोपां रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                      || रुडां रे रखोपां ||
.            रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.                             प्रभाती
रुडां रे रखोपां जेने रव राय ना..काळ नीय फावे नही कारी
वागड धराळी तुं नो वंदीये, चडीयो गाये रे चीतारी.....टेक.
मारकंड गाई तुने मावडी..पांडवांये जुद्ध मां पोकारी..
संख रे फुंकी ने थई साबदी, हाकला मारी ने होंकारी....रुडां रे..०१
मावल बोलावे साबो मावडी, सोभी सिंह नी सवारी..
नाद रे करेला नव नाळीये, अरडूं साखे अव तारी...रुडां रे..०२
भेळी रे रमेली नोघा भोप नी, शंका कोय दी न सारी..
जगडु उगार्यो तेंतो जोगणी, खेड्यो दरियो खोंखारी...रुडां रे..०३
जुग थी पुरांणी तुं ने जांणीये, बावन अखरां थी बारी..
जाळव कळी थी जोगीदान ने, आयल लीयो रे उगारी...रुडा रे..०४
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