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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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10 जुलाई 2016

सूर्य वंदना - रचना जोगीदान गढवी (चडीया)

गगन मुकी गिरनारयो, पुरवा करो पवन्न
अरक उगे तउं अन्न, जळ वरहे जो जोगडा,

हे भगवान सुर्य नारायण आजे वादळां बउ चड्यां छे पण पवन गिरनारी वाय छे, जो आप कृपा करी एने पुरव दीशा नो ओतराखंडी करो अनहद जळ वरहे अने मबलख अनाज उगी सके, अमारां आपने नीत्य वंदन छे,
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