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14 जुलाई 2016

कालीका मोतीदाम रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                      || कालीका मोतीदाम ||
.              रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
 
रणंकीय रास रणे रमखांण, हणंकीय  हुकत राखह हांण
भणंकीय भोम पताळ भुवंड, खणंकीय खेलण नव्वेय खंड..०१
चखत्तीय रग्गत हड्डांय चांम, भजां नीत रुपांय शंकर भाम
कपालीय देखीय कालीय कान, जपां अभीयंकर जोगीय दान. ०२
भयंम् अहरांण भयें भय भीत, जयंम् गण गावत देवांय गीत
कटंकड कालीय दंत कडेड, फटंकत शेषांय फेंण फडेड..०३
बण्यो असमाण रुधीर बंबोळ, छण्यो ज्यम सोंणींत हंदीय छोळ
गणेंणीय गीद्धाय मांस गटक्क, कणेंणीय राखह देह कटक्क..०४
खणंकत खप्पर खांडाय खेल, डणंकत दांतडीयां डकरेल
असूरांय सुरांय लीधल्ल साथ, मसुराय माळाय मुंडण माथ..०५
कणंकीत कीयल कालीय क्रोध, घणंकीत घाराय अगन्न धोध
भयं कर रुप महा भय कार, जपं कर जोगीय दान जुहार..०६
गीये सुर शंकर मंगण साय, कीये त्रह मांम बचाय बचाय
डडंकत डम्मर बाजीय डाक,हडंकत मारीय शंकर हाक..०७
रणंगण रुप भयानक रुध, कणंगण कालीय देवल कुध,
पीभा दीत पतीय सत्तीय पग्ग, जीभां द्रस जोगीय दानाय जग्ग.८

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