.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

4 जुलाई 2016

मोगल आवो मांडणे रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

,         || मोगल आवो मांडणे ||
,    रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

माडी तुंतो भोम ने ढांके रे काळो भेळीयो
माडी वळी जबुके सूरज जयोतना जोरे रे
मोगल आवो मांडणे,,,,,

माडी तारु त्रिहूळ रे भाळी ने चमक्युं तालकुं
माडी एना तेज ना फूवारा व्रेमंड फोरे रे
मोगल आवो मांडणे,,,,,

माडी तुंतो उदो रे उदोये करती आवती
माडी त्यारे कंकंण खणंके चारे कोरे रे
मोगल आवो मांडणे,,,,,

माडी जेवी डाढाळी करणी रे देस णोंक मां रे
माडी ऐम मुंछाळी मोगल बेठीय मोरे रे
मोगल आवो मांडणे,,,,,

माडी तारां आखी रे विहोतर लेती वारणां
माडी तने चारणो उपासे चौटे ने चोरे रे
मोगल आवो मांडणे,,,,,

माडी तुने जाजी रे आराधी जोगी दानीये
माडी ऐने खेलव लई ने आयल खोळे रे
मोगल आवो मांडणे,,,,,

🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads

ADVT

ADVT