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27 अगस्त 2016

सूर्य वंदना -27-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

कास्यप ॠसीये जे कर्या,ई,दिनकर त्यागी न दोस
जो नीत वंदे जोगडो, रांण तजो सब रोस

हे भगवान सुर्य नारायण कास्यप ॠषीये ज्यारे शिव गण सूत वंसज चारण भौमित ने ज्यारे तेंणें कहेल के देवो नी स्तुती मां शिव शक्ति नी स्तुती माटे अमो चारणो सर्जाया छीये अने तमे ब्राह्मणो तेना पर निर्भर केम थई सको ? त्यारे कस्यपे ते  ने श्रापीत कर्यो के चारणो नो क्षय थाव ,(जोके पछी कस्यप ने खबर पडेल के मारा गुरु लोमहर्षण नो दोहीत्र छे भौमित्र अने पोते शाप निवारण बतावेल)पण हे दीनकर अमे ए तमाम वातुं भुली ने हे कास्यप ना कुंवर दीनकर तारी नीत्य वंदना करीये छीये,
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