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22 अगस्त 2016

तारा गाम ने पादरे - रचना :- जयेशदान गढवी

।। तारा गाम ने पादरे ।।

*अचानक थयु निकळवानु, तारा गाम ने पादरे।
ह्रदय थी लोही निंगळवानु, तारा गामने पादरे।

* कोइ आंगळी चींधी ने कहे " आ जाय छे मारग।
अने नजर नु पथ पर चोटी जवानु, तारा गाम ने पादरे ।

* तु तळाव मा बेडा य नथी भरती के दिदार करी लउं।
मारी उर्मिओ ने आफळवानु ,तारा गाम ने पादरे ।।

* इच्छा थया करे, भभुत लगावी लउ तारा प्रणय नी।
इश्क आलेख उच्चरवानुं ,तारा गाम ने पादरे ।।

* लगावी लो रावटी दोस्तो सांज ढळती जाय छे।
  रात रहेवानु छे बहानु ,तारा गाम ने पादरे ।।

* तु जाणे तो मळ्या विना जवा न दे ऐ य जाणु छु।
  ऐटले जता रहेवु छानुछानु ,तारा गाम ने पादरे ।।

* झाड, तळाव, पंखी, मारग, जोवे छे "जय" नी वेदना।
कोइक तो तने जरूर कहेवानु ,तारा गाम ने पादरे ।।

* * * * * * * * * * * *
-कविः जय।
- जयेशदान गढवी।

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