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21 सितंबर 2016

जोगीदान गढवी (चडीया ) कृत निति सतक ना दोहरा मांथी ) रचना :- जोगीदानभाई गढवी

*आपि दियो अंबाडियुं,तोय, लिये छांणां मा लोभ*

*मोटा जण ने मोभ, जरी न समाजों जोगडा*
(जेने हाथी नी अंबाडीये बेसाडो ए नुं ध्यान नीचे छांणां मां होय तो एने मोभ एटले के दोरीयां अने वळा नो आधार बनी ऐ छत थासे एवुं न समजवुं)
*कूळ हिणां ने जै करो, अछोय वानां आप*
तोय
*तपसे खोटो ताप, जात न मेले जोगडा*
(अ योग्य ने तमें असोवांना करो तोय ई एना कुळ ना लक्षणे  खोटो ताप एटले के तामसी पणां मा आवसे एना जाती लक्षण जळक्या विना नई रहे)
*अण जांण्ये जळ उतरवुं, भार भरोहो भाम*
*कर्या जेवां नई काम, जगमां कोदण जोगडा*
(अजाण्यां पांणी मां उतरवुं तथा भाम ना भरोंहा पर भार भार मुकवो आ बंन्ने काम कर्या जेवां नई, अपवाद रुप ने बाद करतां)
*कुंडा भरो न कोयदी, रंग तणां सुंण राव*
नके
*उठीन के नई आव, जुकवा वाळाय जोगडा*
( रंग ना छांटणा होय कुंडा न भराय एटले के जेनी साथे  जे डीस्टन्स मेन्टेन करवुं पडतुं होय ई करवुंज पडे नहीतर जे माथु नमावी जुकता होय ते पछी आवो केहवा उभा थवानी पण तस्ती न लीये अर्थांत मान जळवावुं मुस्केल थाय)
*पेट न गणींये पारकुं, अधीक न करवी आस*
*जांणो समतळ जोगडा , अल्प जमण उपवास*
(अनाज पारकुं होय पण पेट तो पोतानुंज होय छे ने, माटे अधीक नी आसा न करवी,कारण के अल्प आहार ए पण उपवास ना समोवड छे)
*(जोगीदान गढवी (चडीया ) कृत निति सतक ना दोहरा मांथी )*

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