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20 अगस्त 2016

याद हेम आवशे

कंठ गयो, के'णी गई, गई मरदानगी नी वात,
हद थई के हेमु गयो, गरीब थयु गुजरात।
संगीत मा सोपो पड्यो, सुणवुं गमे ना गान,
तुं मरता मीजलस गई, दिल नी हेमुदान
चडशे घटा घनघोर गगने मेघ जळ वरसावशे,
नीलवरणी ओढणी ज्यां धरा सर पर धारशे,
गहेराट खातां गीर मोरां पीयु धन पोकारशे,
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।
चडशे गगन मां चांदलो ने रात नवरात्युं हशे,
संधा मळी ने साथीडा जे दी' राहडे रमता हशे,
ते दी' रमण राधा कान नां कोई गीतडां ललकारशे,
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।
दुःखी पीयर नी दिकरी कोई देश देशावर हशे,
संताप सासरवासना ऐ जीवनभर सहेती हशे,
वहुऐ वगोव्या नी रेकर्डुं ज्यां रेडीयो पर वागशे
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।
मोंघा मुली सौराष्ट्रनी रसधार जे रचतो गयो,
ऐ कलम नी वाचा बनी तुं गीतडां गातो गयो,
ऐ लोक ढाळो परज ना कोई 'दाद' कंठे धारशे,
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।

लोक गायक स्व. श्री हेमु भाई गढवी ने 51 मी पुण्य तीथी ऐ श्रध्धांजली

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