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7 जनवरी 2017

|| महाबली हनुमंत जियो ||कर्ता- गढवी मितेशदान(मीत)(सिंहढाय्च)

|| रचना-महाबली हनुमंत जियो ||
|| छंद-त्रिभंगी ||
|| कर्ता- गढवी मितेशदान(मीत)(सिंहढाय्च) ||
जन्मा शुभ कारण अंश शिवातन अमर नाम इतिहास कियो.
नटखट कपिआनन बिरद उजालं,भक्त नेक हरी नाम लियो,
रघुराम ह्रदय को गुण दिल धरतो राम नाम समरण रटियो,
वानरकुल नंदन,है भीड़ भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(1)
बालक नभ जायो सुरज खायो तेज बनायो पड़छायो,
इंदर अकडायो क्रोध भरायो बालक इण नही समजायो,
फ़िर वज्र चलायो घाव भरायो दैवलोक हाहकार थियो,
वानरकुल नंदन,है भीड़ भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(2)
देवो मुंझवाया पवन न वाया अवनी परे जब अटकाया,
जीवन रुंधाया पशु मराया जलवायु नही वहवाया,
देवो रिझवाता बालक ताता बलशाली वरदाण दियो,
वानरकुल नंदन,है भीड़ भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(3)
बाला हनुमाना खूब बखाना सत अपनाया बहुनामा,
सब भेद सुझाया राम मिलाया दर्श कराया समजाया,
श्री राम शरण मुख नाम धरण अविनाश अमर नीज नाम कियो,
वानरकुल नंदन,है भीड़ भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(4)
मन राम धरी,सत काज सरी,संदेश लही,लंका मे गयो,
वध काल करी,समदर ग्रहरी राक्षस मुख से भी पसार थयो,
वन झाड घडी,फल तोड सही,सीता निरखी ,हरखाय लियो,
वानर कुल नंदन,हे भीड़ भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(5)
सीता को नमन कर,वन फर नड़ कर,त्राह की चिहकर भुरखियो,
भटका भय भंकर,अड़ग अटंकर,खेल खरो खड़गे रचियो,
रावण गभराया,दूत बुलाया,बंदी बनाकर पकड़ लियो,
वानर कुल  नंदन हे भीड़ भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(6)
रघुपति रहसायं सदा ह्रिदायं मती ममता गुरू गुणवन्ता,
कहि दर्श मिलावन,समय को जावन,फ़िर पछतावन दसमथ्था,
उड़ गये हनुमंता,जल गयी लंका,रावण मन भयकार भयो,
वानर कुल नंदन हे भीड़ भंजन,महाबली  हनुमंत जियो,(7)
वरियो बजरंगी,खबर सुचंगी,हरख उमन्गी दर्शन्ती,
पातक रावणकी,कैद सीतनकी,अमर्ष नयन मुख वर्षन्ती,
दशरथ को जायो,जगन लगायो,महादेव हरको रटियो,
वानर कुल नंदन हे भीड़भंजन महाबली हनुमंत जियो,(8)
जब बाण चढायो,शंख बजायो,उमापती को जशगायो,
पथ्थर तरवायो,सेतू बनायो,समदर को  जब ठेहलायो,
सेना चलवाइ,जय जस गायी,महावीर को साथ रियो,
वानर कुल नंदन हे भीड़ भंजन माहबली हनुमंत जियो,(9)
लंका सर कर पर प्रहर विहरकर सकल युध्ध को नाद दियो ,
लंकेश खबरकर,चित मन धर कर,एही  समरपण नाह कियो,
घमशान मचायी,गदा उठायी पवनपुत्र परकोप थियो,
वानर कुल नंदन हे भीड़  भंजन महाबली हनुमंत जियो.(10)
जुध्धे चकराता,लछमन भ्राता,घायल थै अवने पडीयो,
झट पवन सुसाटा वेग वहाता हनुमंत कैलास गयो,
औषध गिरी धरकर,सजीव लखन कर,प्रभु चित्ते परखाय लियो,
वानर कुल नंदन हे भीड़ भंजन महाबली हनुमंत जियो (11)
रावण भरमायो,क्रोध भरायो,रथ्थ चलायो,रण आयो,
मेदान गजायो,द्वन्द खेलायो तीर चलायो चुकजायो,
रहसय को सुनायो,विभिषण जायो,राम कान सब भेद कियो,
वानर कुलनंदन.है भीड भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(12)
       ||  *छप्पय* ||
       
कहर कढावण काज,कान्ध रघुवर को किन्ना,
हरण जगत हर पाप ,धनुष कर मारण लिन्ना,
रावण वध को भेद,विभिषण जब समजायो,
तरत चले रघुवीर,संग अंजनी को जायो,
कष्ट हरण को जनमियो,पुरुषोत्तम रुपक राम,
पवन पुत्र  पावन कियो,
राम चरण सब काम.(13)
तीर चलायो काल,निकट नाभी के आयो,
मती भुली सब भान,दशानन अंत जणायो,
मुखे धरी श्री राम ,कियो मरता सुख पावन,
देह  रही नही जान,यही हे अंत का नामन,
कष्ट हरण को जनमियो,पुरुषोत्तम रुपक राम,
मारी रावण दुष्ट को,अमर.कियो नीज नाम,(14)
    || *छंद* ||
कुंडल धर कानन,तन व्रज धारण,अकल अपारं,हनुमंते,
हरके हरी का मन ,ह्रदय लगावन,अमर सदा वर धरयंते,
मंगल गुण गावन *मीत* कहावत बल संग तुम मम हृदय रियो,
वानर कुल नंदन,है भीड़ भंजन,महाबली हनुमंत जियो,(15)
जी महाबली हनुमंत जियो,
-------------मितेशदान--------------

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