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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
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2 सितंबर 2016

दिये लाभ ते दिकरो :- रचयिता: राजकवि श्री पिंगलशीभाई पाताभाई नरेला..भावनगर

.                         " दिये लाभ ते दिकरो "
                            प्रकार :- छप्पय
       रचयिता: राजकवि श्री पिंगलशीभाई पाताभाई नरेला..भावनगर

                    सहन कर्यो दस मास, भार उदरमा भारी,
                    आप्यो पछी अवतार, धवाडयो पय उर धारी,
                    पुत्र कारणे आप कटु ओषध पण पीधा,
                    आणयो नही अभाव, दुःखी थई सुख अति दिधा,
                    आभार सत्य ऐ मातनो, खसे नही दिलथीं खरो,
                    कविराज सत्य पिंगल कहे,  दिऐ लाभ ते दीकरो...1

                    जतन करी जालव्यो, प्राणथी आत्मज प्यारो,
                    पहोर आठ निज पास, नजरथी घडी न न्यारो,
                    गुरु राखी गुणवान, बाळ विद्वान बनाव्यो,
                    विनय विवेक विचार, भार वहेवार भणाव्यो,
                    उपकार पितानो सत्य ऐ, खसे नही दिलमा खरो,
                    कविराज सत्य पिंगल कहे दि ऐ लाभ ते दीकरो......2
                
                    🌹अनिरुद्ध जे. नरेला 🌹
                    🌹 ना जय माताजी    🌹

धन्य चारण कूळ ने.. रचना ;-दिलजीत बाटी

*जय  मां  सोनल*

          *प्रभाती*

हे..धन्य चारण कूळ ने ज्यां
आई सोनल अवतरी..2..टेक.

आबू वाळी आई अंबा
नेहडा मा निसरी,
सूख संपत समृधी ना
मां भंडार दिधा छे भरी,
हे..धन्य चारण कूळ ने..(1)

भेळीया वाळी भीर हरवा
शूध वरण मा संसरी,
अधम उधारण तिमीर टाळण
भाण सरुपे भै हरी,
हे..धन्य चारण कूळ ने..(2)

घम्मर वलोणा घूघवे जेम
नोबत गाजे नभ तणी,
दूध गोरस घी माखण नी
घाण्यू आवे छे घणी,
हे..धन्य चारण कूळ ने..(3)

महिं माट लई मारग हाल्या
नेहडा थी नगर भणी,
वसूंधरा ना फळीये रुडा
फूल नी फांटू भरी,
हे..धन्य चारण कूळ ने..(4)

अष्ट सिध्धी नव निध्धी नी
नरवी नदीयू भरी,
वहे प्रवाहे वालप वारी
पवित्रता ज्या परवरी,
हे..धन्य चारण कूळ ने..(5)

चारण छोरु ने आई सोनल
धींगो वसीलो छे धणी,
प्रभाते *दिलजीत बाटी*प्रणमे
मां भेर करजे मू भणी,
हे..धन्य चारण कूळ ने..(6)

     *जय मां सोनल*

*दिलजीत बाटी*ना
जय माताजी  *ढसा जं.*

बादुरगढना संत पूज्य जीवाबापु बाटी :- प्रस्तुति कवि चकमक.

🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁

बादुरगढना संत पूज्य जीवाबापु बाटी.

संत श्री मस्तराम चित्रा, संत श्री बजरंगदासजी बगदाणा, संत श्री हरिरामजी गोदडीया बाढडा, अने संत श्री प्रेमदासजी गोदडीया, मीयागाव-करजण जेवा महान संतोनी आगळ जेनुं अासन पडतुं.
पूज्य जीवाबापु आ तमाम संतोना अडीखम वडलो गणाता. बादुरगढना सामान्य जमीनदार श्री अमराभाई बाटीना ऐ संतान हता. बचपणथी ऐ शिवजीना परम उपासक रह्या हता.
तेओ बचपणथी ज कठोर तपश्चयाॅना हिमायती हता. तेओ ऐक पगे उभा रही बीजो पग गोठण उपरना भागे ठेरवी अने महिनाओ सुघी उभा उभा तप करता, आवा अधोर तपथी पोताना शरीरने साव जीणॅ करी नाखेलुं. तेथी आवी आकरी तपश्चयाॅ अने कठोर साघनना सौ माहितगार हता.
पालीताणा परगणामां दुष्काळ जेवी परिस्थिति सजाॅणी हती. तेथी पाणीनी खुब ज खेंच वताॅती हती. माणसो अने मूंगा पशुओ खूब ज हेरान हेरान हता.
ऐ वखते जीवाबापु लाखावड गामना नदी किनारा पर अावेल शिवालयमां शिव आराघना करता हता.
अनावृष्टिनी हालाकी जोई संत ह्रदयना जीवाबापुऐ लाखवडनी नदीमां उभा उभा शिवजीनी कठोर साघना आरंभी. ऐक पगे उभा रहयां ' खडेसुरी ' तरीके तेमनी साघनामां आत्मविश्वासनो अखंड रणकार हतो.
'' बारिस आयगा, अवश्य अायगा,
वरना हमारा प्राण बस एैसे ही चला जायगा. ''
18 दिवसनी कठोर साघनाथी अनराघार वषाॅ तूटी पडी. चारेबाजु पाणी पाणी थई गयुं.
लोको दोडया, बे कांठवा नदीमां पाणी हाल्युं आवे छे रखेने जीवाबापु जळसमाघी न लई ल्ये.
लोको हाथे पगे लागीने बापुने बहार लाव्या अावा '' संत परम हितकारी '' आखी जिंदगी तप अने साघनामां पोतानुं आयखुं पूरु कयुॅ.
पोताना वतन बादुरगढमां पोतानी वाडीऐ ऐमणे समाघी लीघी. आजे पण तेमनी समाघी  पर नानी ऐवी डेरी छे. बाजुमां पोताना ईष्टदेव श्री महादेवनुं नानुं ऐवुं मंदिर छे.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

नोंघ : कवि चकमकनो आशय ऐ ज छे के जो सम्रग चारणो न सुघरो तो कंई नहीं पण जे शाखामां आवा महान संतो, भकतो, शुरवीरो, दातारो, कविओ, थई गया होय ते पोतानुं गौरव समजी सुघरवानी जरुर छे.         जय माताजी.

सूर्य वंदना -02-09-16 रविराज भाचळीया

पांखु पसारी पंखीडां, गण गणवां लाग्यां गीत,
भाचळीयो रवि भणे, मार्तन्ड मलक्यो मन मीत ,

हे भगवान सूर्य नारायण देव आप ज्यां आभा मंडळे राती कोरु काढीयुं तां तो पृथ्वी नीं जीवो जाग्रत थीयां अनें पंखीडां वगडे गण गणवां मांड्या मन तणों मित मार्तन्ड मों मलकावतों उग्यो तां जीव मातर मां नवां झोम पुराणां नें सकळ जग आनंदीत थई उठ्युं.... ऐवां आनंद नां आपनार आदित्य नें मारा नित्य क्रम मुजब हजारो हेत वंदन हो प्रभु...... 🙏🏼🌹🙇🏻🌅🌞🌅🙇🏻🌹🙏🏼

सूर्य वंदना -02-09-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

विश्वा मित्रे वंदीयो, गायत्रयी ने गांण
जो ॠग वेदे जोगडा, भूः भुर्व कई भांण

हे भगवान सुर्य नारायण सौथी प्राचीन ग्रंथ ॠग्वेद मां पण बीजुं स्वर्ग बनाववा सक्षम विश्वामित्रजीये पण गायत्री मंत्र कही ने तने वंदन कर्यां छे , एवा नारायण आपने मारां नित्य वंदन छे
🌅🌞☀🙏🏼☀🌞🌅

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