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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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Notice Board


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1 अप्रैल 2017

अष्टमी उजवणी राणेश्वर

*अष्टमी उजवणी राणेश्वर*

ता.04-04-2017

कार्यक्रमनी रूपरेखा

🔸नवचंडी यज्ञ सवारे 8-00 कलाके
🔸महाप्रसाद सांजे 5-00 थी 7-30 कलाके
🔸संतवाणी रात्रे 10-00 कलाके

कलाकारो
(1) श्री हरेश सुरु
(2) श्री जयेशदान गढवी (कच्छ)
(3) श्री हकाभा गढवी
(4) श्री आदित्य खडिया

स्थळ :- मोगल मढ राणेश्वर पाटिया बावळा बगोदरा हाईवे

निमंत्रक
मोड़ यूथ ऐसोशीऐशन राणेश्वर (मयर) तथा समग्र राणेश्वर मोड़ परिवार

गौ-सेवा ना लाभार्थे श्री राम कथा आमंत्रणपत्रिका

गौ-सेवा ना लाभार्थे  श्री राम कथा

कथा प्रारंभ :- ता.02-04-2017

कथा विराम :- ता.10-04-2017

वकताश्री :- चारण महात्मा पालु भगत (काळीपाट-राजकोट)

स्थळ :- श्री आवड-सोनल माना मंदिर ना पटांगण , मोटी सिंधोडी ता.अबडासा कच्छ

निमंत्रक :-
श्री आवड-सोनल सेवक गण तथा समस्त ग्रामजनो

परिवतॅन ऐ ज उज्जवळ भविष्यनी चावी छे...!

परिवतॅन ऐ ज उज्जवळ भविष्यनी चावी छे...!

चारणोना पूवॅजो राजामहाराजा ओ साथे रहेता सुवॅणचंद्रको ताम्रपत्रो मेळवता ऐ आपणो गौरवप्रद भूतकाळ हवे रहयो नथी. ते वास्तविकतानो स्वीकार करी वतॅमान अने भविष्यनो विचार करवो जोईऐ.

वतॅमानमां आपणी शुं स्थिति छे ? आजे आपणी पासे खेतीनी जमीन नथी. व्यापार-उघोगने नामे शून्य उपलब्घी छे. साहित्य सजॅन पण हवे बंघ थई रहयुं छे. त्यारे जीवन निवाॅह माटे बे ज विकल्प छे. नोकरी अथवा व्यवसाय.

नोकरी मेळववा उच्च शिक्षण अनिवायॅ छे. मात्र कलाकारनी ओळख भूली उघोग-घंघाना तमाम क्षेत्रोमां आपणे प्रवेशवानो समय आवी गयो छे.

महेनत तथा समजदारीथी समय साथे कदम मिलावी तमाम क्षेत्रे नोकरी व्यवसायथी आपणे आपणी साथे समग्र समाजनी प्रगति करी शकीशुं.

माटे समाजना युवानो आजना युगने अनुरुप ज्ञान मेळवी समय साथे कदम मिलावे अने समाजने नवो मागॅ देखाडे.

आ प्रकारे आपणे समाजने संगठित तथा जागृत करी वतॅमान स्थिति मुजब परिवतॅनशील थई भविष्यने भूतकाळ जेटलुं उज्जवळ अने गौरवशाळी बनावी शकीशुं.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

भीतरनो वैभव...!

भीतरनो वैभव...!

आपणे अंदरथी खाली थई गया छीऐ, मात्र बहारनो वैभव रहयो छे. वैभव तो अंदरनो होवो जोईऐ.

तुलसीदासजी केवळ पाननो लंगोट पहेरता ने मुंजना धासनी जनोई राखता. कपडां तो पहेरता ज नहोता. छतां रहीम द्वारा चित्रकूटमां अकबरनो पत्र आवतो हतो के, ' तुलसी को ऐक बार हमारे दरबारमें लाईऐ. '
त्यारे तुलसीजी कहेता, '' हमारे सरकारका दरबार तो बहोत बडा है. हम अकबर के दरबार में कयों जाये ? ''

आनुं नाम भीतरनो वैभव.

डो. राघाकृष्णनने कोईऐ पूछेलुं के, आजकाल लोको फरवा नीकळे त्यारे अाटला बघा सज्ज थई ने केम नीकळे छे ? त्यारे ऐमणे कहेलुं के, '' अंदर कंई नथी ऐटले बहारथी तैयार थवुं पडे छे. ''

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

आजे प्रो श्री अंबादानभाई रोहडीयानुं जन्म दिवस

आजे प्रो श्री अंबादानभाई रोहडीयानुं जन्म दिवस 




संदर्भ :- गुर्जर साहित्यनो झरुखो - निरंजन हरिशंकर पंडया 

आवनारु वर्ष आपना माटे लाभदायक होय  अने जीवन मां बधारे प्रगति करो अने अमूल्य साहित्य पीरसता रहो ऐवी मां भगवती पासे प्रार्थना
जन्म दिवसनी खूब खूब शुभेच्छाओ

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