नारायण स्वामी बापुनी 17 मी निर्वाणतिथी आमंत्रणपत्रिका
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2 सितंबर 2017
चारण वाहिको विश्व बखाने रचयिता: चारण कवि जेतदान गोविंदजी बाटी -विरसोडा
■◆◆◆●चारण वाहिको विश्व बखाने ●◆◆◆■
।। छंद : सवैया ।।
आदहि चारण लच्छन यावर, द्वेश नहि निज ज्ञाति पे धारे,
याचन आश रखे नहि अंतर, ध्यान निरन्तर चंडीको धारे,
आफत काल रखे द्रढ याकिन, विशहथीको न नाम विसारे,
"जेतहमाल"सबे जग जाहर,यावर चारण कुल उचारे .(1)
सम्प कुटुंब सनेह सबे पर,धीर सदा कुल लाज वधारे,
श्रेष्ठ विचार सन्तोष सदा मन,लोभ व्रती चित्तमे न लगारे,
लांच कबु नहि चोरी लुचापन, नीति ग्रहे रु अनीति निवारे,
"जेतहमाल"सबे जग जाहर,यावर चारण कुल उचारे .(2)
आहव में अति शूर अनुपम ,विद्यामे श्रेष्ठ पण्डित बखाने,
क्रोध अकाम करे नहि को पर,मस्त सदा कुल के अभिमाने,
चाडी रु निन्दा कबु नहि चाहत, आलस नीन्द न देत बढ़ाने,
"जेतहमाल" करे न खुशामत, चारण वाहिको विश्व बखाने.(3)
दम्भ प्रपंच न रंच करे दिल,जात की महेनत उत्तम जाने,
दील उदार दयाल अति,उपकार करे निज शक्ति प्रमाने,
जीव गये पर झुठ न भाखत, राखत रीत रिवाज पुराने,
"जेतहमाल" कहे जय कारक, जग्त सबे वही चारण जाने .(4)
और को छिद्र कबु न उघारत, बिशहथी जश काव्य बनावे,
दुहिता दाम न चाहत है दिल, बोलीके बैन नहि बदलावे,
लग्न अयोग्य करे न कबु जग,बंस भले अपनों मिटि जावे ,
"जेतहमाल" कहे वोहि चारण, कुल दिवाकर श्रेष्ठ कहावे.(5)
रचयिता: चारण कवि जेतदान गोविंदजी बाटी -विरसोडा
प्रेसक टाईप:
कवि पुत्र नरहरदान जेतदानजी बाटी (विरसोडा)गांधीनगर
1 सितंबर 2017
लग्न ना आव्या अवसरीया- मायाबा गढवी
ढाळ : { दरीया किनारे बेनी रमता ता ऐकला }
= लग्न गीत =
रचयता = मायाबा गढवी
गाम = राजकोट:जसदण
उगमणा ओरडे बेठा छे दादा (२)
दादा ने पाये लागो आज रे
लग्न ना आव्या अवासरीया
दादा ये आंगण लीधा अवसरीया (२)
परणावे लाडळी आज रे
लग्न ना आव्या अवसरीया
मांडवडा रुडा शोभे छे आंगणे (२)
वागे ढोल शरणांयु आज रे
लग्न ना आव्या अवसरीया
काका कुटुंबडा मामा मोसाळीया (२)
लावे काय शोभागी भेट रे
लग्न ना आव्या अवसरीया
कंकु केशर घुटी लखजो कंकोत्री (२)
तेळावो जाडेरी नात रे
लग्न ना आव्या अवसरीया
रुडा भोजनीया ना थाळ शोभावजो (२)
हेते जमाडो दादा साथ रे
लग्न ना आव्या अवसरीया
वाणी वतँन ने मन भाव आपजो (२)
देजो सव मोटेरा ने मान रे
लग्न ना आव्या अवसरीया
विदाय वेळा नी वसमी रे वाटु (२)
काळजा नी कोर हाली आज रे
लग्न ना पुरा अवसरीया
उगमणा ओरडे बेठा छे दादा
दादा जोवे छे बेनी वाट रे
मळवा ने वेलेरा आवजो
मळवा ने वेलेरा आवजो
🌷🌷🌷🌷
🙏जय माताजी 🙏
🙏 भुल चुक होय तो सुधारवी 🙏
श्री केशरीसिंह बारहठ चारण सेवा संस्थान के पुस्तक विमोचन व साहित्यकार सम्मान समारोह अहेवाल
*पुस्तक विमोचन, उत्कृष्ट सेवा एव साहित्य सम्मान समारोह*
श्री केसरीसिह बारहठ चारण सेवा संस्थान के तत्वावधान में 31 अगस्त 2017 को मिनी ऑडिटोरियम सूचना केन्द्र जोधपुर में आयोजित हुए कार्यक्रम में न्यायाधिपति श्री पुष्पेंद्र सिह भाटी मुख्यातिथी रहे और अध्यक्षता संस्थान के प्रो.हाकमदान चारण ने की ।
विशेष अतिथि ठाकुर नाहरसिंह जसोल और आईदानसिंह भाटी सहित डा शक्तिदान जी कविया, श्री सोहनदान जी चारण, श्री लक्षमणदान जी कविया, डा.प्रकाश अमरावत, डा.जहूर खां मेहर और श्री डूंगरदान आसिया जैसे विद्वान और साहित्यरत्नों ने मंच पर कार्यक्रम की शोभा बढाई । खचाखच भरे ऑडिटोरियम में प्रात: 11.30 पर अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन के साथ कोकिलकंठी सुश्री नेहा अमरावत ने सरस्वती वदंना ने कार्यक्रम का श्रीगणेश हुआ, डा.सोहनदान चारण द्वारा स्वागत-उद्बोधन के बाद, मुख्यवक्ता ठा.नाहरसिंह जसोल ने प्राचीन सतातन धर्म में चारण-राजपूत रिश्तों और देश के लिए दिये गये बलिदान की याद दिलाई तो श्री आईदानसिंह भाटी ने क्रांतिकारी ठाकुर केसरीसिह बारहठ के द्वारा देश के लिए अपने सम्पूर्ण परिवार के बलिदान को याद किया । डा. शक्तिदान कविया ने शिक्षा और समाज सुधार के लिए क्रान्तिकारी ठा.केसरीसिह बारहठ को याद करते हुए उनसे प्रेरणा लेने की सीख दी । *मुख्यातिथी न्यायाधिपति श्री पुष्पेंद्र सिह भाटी ने मानवसेवा और सामाजिक न्याय पर बोलते हुए इतिहास से प्रेरणा लेने सहित साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की महती आवश्यकता बताई।*
*संस्थान के अध्यक्ष श्री भवानीसिह कविया* ने संस्थान के उद्देश्यों, संस्थान के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट हरिद्वार में श्री चारण गढवी सेवा सदन की की जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट के प्रथम चरण के अन्तर्गत *हरिद्वार में 12616 वर्गफीट जमीन श्री करणीदान देथा की अध्यक्षता में गठित क्रय समिति द्वारा खरीद कर रजिस्ट्री करवा दी गई हैं ।*
द्वितीय चरण के अन्तर्गत दिपावली तक भूमि पूजन करने के बाद प्रोफेसर हाकमदान चारण की अध्यक्षता में गठित निर्माण समिति द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा । इसके लिए प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करते हुए नक्सा पास करवाने की कार्यवाही चल रही हैं ।
डा.प्रकाश अमरावत ने पुस्तक *जनकवि ब्रजलाल जी कविया की पुस्तक विजय विनोद*पर और श्री विरेन्द्र सिह लखावत ने *श्री गिरधरदान दासोड़ी की पुस्तक "ढलगी रातां! बहगी बातां"*पर पत्रवाचन किया ।
पुस्तक विमोचन एवं साहित्य सेवा के लिए लेखक श्री गिरधरदान रतनू ने संस्थान की सराहना करते हुए कार्यक्रम की सफलता पर बधाई दी । पुस्तक *ढल़गी रातां ! बहगी बातां !* के प्रकाशक श्री चंदनदान बारहठ का भी सम्मान किया गया । *जनकवि स्वर्गीय ब्रजलाल जी कविया* के पुत्र श्री गंगासिह कविया ने पुस्तक के सम्पादक श्री गिरधरदान रतनू दासोड़ी का आभार जताते हुए अपने पिताजी के जीवनवृत्त प्रकाश डाला ।
*मुख्यातिथी न्यायाधिपति श्री पुष्पेंद्र सिह भाटी* के कर कमलों से विभिन्न सेवाकार्य में *संगीत के क्षेत्र में*श्री नारायणदान रतनु, हरलाया का व सुश्री नेहा अमरावत का ; *पत्रकारिता में क्रान्तिकारियों पर लेखन के क्षेत्र में* श्री एम.आई.जाहीर, पत्रकार का ; *शिक्षा व समाजसेवा में*श्री विरेन्द्र सिह शेखावत, श्री भागीरथ चारण, श्री भैरूसिह आसिया, श्री किशनसिह रतनू, श्री कोमलसिह चांपावत, और सिटीजन सोसायटी फोर एज्युकेशन श्री नरेन्द्रसिह आढा का ; *राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए* श्री लक्षमणदान कविया का; *स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में* श्री शंकरदान देशनोक का, *डिंगल संवर्धन और साहित्य के क्षेत्र में*डा. शक्तिदान कविया, ठा.नाहरसिंह जसोल, डा. जहूर खां मेहर, श्री आईदानसिंह भाटी, डा. प्रकाश अमरावत, डा. सोहनदान चारण, श्री मोहनसिह रतनू , श्री डुगरदान आसिया और श्री बाबुदान लालस, जुडिया का सम्मान साफा-सॉल, माला , संस्थान का मोमेंटो और अभिनंदन पत्र के साथ किया गया ।
कार्यक्रम में श्री सत्यदेव सांदू द्वारा सीखड़ली की प्रस्तुति पर सदन की आंखो में आंसू भर दिये तो कवि महेन्द्रसिह खिड़िया के डिगल काव्यपाठ ने सभी में वीररस का संचार किया । अपने अध्यक्षीय उदबोधन में प्रोफेसर हाकमदान चारण ने संस्थान के भावी प्रोजेक्ट पर प्रकाश डालते हुए एम्स के पास श्री करणी विश्रामगृह और कोचिग भवन निर्माण, कोटा एवं जोधपुर में महिलाओं के लिए छात्रावास बनाने और श्री सरदारसिह सांदू के नेतृत्व में *जोधपुर जिले की डायरेक्टरी चारण दर्पण*के द्वितीय संस्करण प्रकाशित करने की जानकारी दी । खचाखच भरे मिनी ऑडिटोरियम में भारी संख्या और सुदूर से पधारे सभी अतिथियों, बुद्धिजीवीं, विद्वानजनो और मातृशक्ति का आभार व्यक्त किया, साथ ही भविष्य में संस्थान के कार्यक्रम टॉउन-हॉल जैसे बड़े स्थान पर करने का विश्वास दिलाते हुए , भव्य उपस्थिति के कारण स्थान कम पड़ने पर हुई असुविधा के लिए संस्थान की ओर से अतिथियों से खेद व्यक्त किया ।
कार्यक्रम में मंच संचालन श्री सरदारसिह सांदू किया और संयोजन श्री गोपालसिह किनिया और जगदीशदान कविया ने किया । कार्यक्रम मे संस्थान के श्री करणीदान देथा, श्री नरेन्द्रसिह सांदू, श्री तेजदान लालस, श्री भगवानदान देवल, श्री हरीसिह चारण , श्री हरिसिह रतनू, श्री राजेन्द्रसिह चारण (रायपुरिया) श्री सुल्तानसिह आसिया, श्री देशराजसिहअखावत, श्री सुरेन्द्रसिह रतनु, गजेन्द्रसिह पालावत, श्री मुकनदान रतनू उपस्थित थे । अल्पाहार के बाद समारोह का सांय पांच बजे समापन हुआ । कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का योगदान रहा जिनकी अथक मेहनत और परिश्रम के कारण इतना भव्य कार्यक्रम संभव हो पाया ।
*आभारी : श्री केसरीसिह बारहठ चारण सेवा संस्थान ।*
चारणकवि नारणदान सुरु नी कलमे लखायेल विर वछराज नो भाव
💐 *चारणकवि नारणदान सुरु नी कलमे लखायेल विर वछराज नो भाव* 💐
बेनीबा ने काेलताे आपी रे,धजायु धरमनी स्थापी रे
पडाणाना पंथडा कापी,मारते घाेडे बेन बाेलावे रे...
पडाणाथी वाछराे आवे रे
घाेडाना डाबला वागे,सुता साैव मानवी जागे
पादरमा ढाेलनी प्रांछट,सांभळाे बायु मात समजावे रे...
पडाणाथी वाछरो आवे रे
रजे रज भाेमका नाचे,हीलाेळे मेदनी राचे
चारणनी देवीयु गाती,लइ आेवारणा वीर वधावे रे...
पडाणाथी....
वधावाे वीरने मारा,रेशाे नही काेइ नाेधारा
हेमना भालाे जळके हाथे,नीरखाे बायुं बेन समजावे रे...
पडाणाथी वाछरो आवे रे
चारणीया गामनाे चारण,गुणला तारा गायछे नारण
राजपुतीनाे धमँ दीपाव्याे, वीख ना वारण श्याम छत्रावे रे
पडाणाथी वाछराे आवे रे
💐 *रचना=चारणकवी नारणदान बापु सुरु*💐
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🌹 *टाइपींग=राम बी गढवी* 🌹
*नविनाळ-कच्छ*
*फोन=7383523606*
🙏🏻 *भुलचुक सुधारीने वांचवी* 🙏🏻
💐 *जय विर वछराज* 💐
💐 *वंदे सोनल मातरमं* 💐