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22 सितंबर 2019

સાંયાજી ઝુલા - સતિષ ચારણ

સાંયાજી ઝુલા - સતિષ ચારણ

આવતીકાલે સાંયાજી ઝુલાની જન્મ જયંતી નિમિતે સતિષભાઈ ચારણ નું લેખ

લેખ વાંચવા માટે :- Click Here

वीर शहिद माणसी गढवी नी पुण्यतिथि

वीर शहिद माणसी गढवी नी पुण्यतिथि 

आजे ता.22-09-19 ऐटले वीर शहिद माणसी गढवी नी पुण्यतिथि  आजना दिवसे ता.22-09-2004 ना रोज माणशी गढवी शहीद थया हता. तो आजे तेमना विशे टूंकमां माहिती आपवानो नानकडो प्रयास करेल छे.

वीर शहीद माणशी गढवीनुं टुंकमां परिचय

नाम :- गढवी माणशी
पितानुं नाम :- गढवी राजदेभाई
मातानुं नाम :- सुमाबाई
शाखा :- सेडा
जन्म तारीख :- 14-02-1979
जन्म स्थळ :- झरपरा-कच्छ
पत्त्नीनुं नाम :- सोनलबेन
शहीद तारीख :- 22-09-2004
स्थळ :- पुंच सरहद जम्मू काश्मीर

VEER SHAHID MANSHI GADHAVI

वीर शहीदनी वधारे माहिती  (PDF File) :- Click Here

वीर शहीद माणशी गढवीने कोटी कोटी वंदन

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संदर्भ :- कच्छना चारण रत्नों मांथी

लेखकश्री :- आशानंद गढवी झरपरा-कच्छ



                           वंदे सोनल मातरम्






अवनवी माहिती, चारणी साहित्य , रचनाओ, ऑडियो , पुस्तक, तेमज अपना विस्तारना धार्मिक प्रसंग, समाचार  मोकली सहकार आपवा विनंती 


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                               वंदे सोनल मातरम

19 सितंबर 2019

कुल्फ़ी वाला रचना देव गढवी

कुल्फ़ी वाला

ख़ुद जलकर तपिस में ठंडक बेचने निकला था
एक उम्र दराज़ शख्स कुल्फ़ी बेचने निकला था

कुछ बोझ कुल्फ़ी का कुछ जिम्मेदारियों का था
आंखे थी धुँधली और कुछ उम्र का तकाज़ा था

नन्हें बच्चों की हँसी में वो ख़ुश हुआ  करता था
मज़बूरी लिपटा फिर भी मुस्कुरा दिया करता था

ख़ुद अपने मासूम बच्चे घर पे छोड़ के जाता था
उनकी ख्वाईश पूरी करने उनसे ही दूर जाता था

एक कुल्फ़ी के लिए अपने बच्चों को तरसता था
रोते हुए दिल से वो शख्श आँसू को पी जाता था

थक हार के भी जब वो शाम को घर जाता था
बच्चों से छुपाकर दर्द वो हंसता नज़र आता था

फिर बिस्तर में लेटकर ख्वाबों में खो जाता था
'देव' हर शाम मरता वो सुबह जिंदा हो जाता था

  ✍️देव गढवी
नाना कपाया-मुंद्रा
        कच्छ

દેવ ગઢવીની રચના

ના છંદ છે ના પ્રાસ છે,ફકત લાગણી થોડી ખાસ છે
તું લખે માત્રા મેળ મેળવી,મારા શબ્દે જ શ્વાસ છે

ક્યારેક એવું થાય કે,પીરસી દઉં સત્ય શબ્દો માં
પણ શું કરું દુનિયા તુજ ને,સત્ય નો ઉપવાસ છે

સુશોભિત તારું લખાણ,એ વાત તો સ્વીકાર રહી
પણ આ અફાટ રણ મારુ,શબ્દે ક્યાં બંધાય છે

ખાલી શબ્દભાર નો જ છે,કેમ વર્તાવો આમાં?
વેદના લખનાર ની એ,ક્યાં શબ્દે જઈ છુપાઇ છે?

તને આ સમારોહ અને પ્રસિદ્ધિઓ હશે વહાલી
'દેવ'મારા માટે મારી,નિખાલસતા જ પુરસ્કાર છે

✍🏻દેવ ગઢવી
નાનાકપાયા-મુંદ્રા
       કચ્છ

देखता हूं देव गढवी

जिधर देखता हूं उधर मैं ही मैं हूं
साहिल पर रहकर लहर देखता हूं

तूं सोचता हो ग़र,माज़ी को मेरे
में बिखरा हुआ सा,कल देखता हूँ

बना लूँ कहीँ आशियाना मगर मैं
नफरतों में डूबा ये शहर देखता हूँ

कहीं हसरतें,कहीं ख्वाहिशें और
कहीं पर है रोता,चमन देखता हूँ

तुझे दिखती है,खूबसूरत सी झीलें
मैं पानी में छुपता भंवर देखता हूँ

यकीं मान'देव',मुस्करा ना सकोगे
ग़र तुम देखलो गे,जो मैं देखता हूँ

✍🏻देव गढवी
नानाकपाया-मुंद्रा
       कच्छ

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