.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

9 अक्तूबर 2015

प्रभु विना कोण उतारे पार

.          जय माताजी
आजे भावनगर राजकवि श्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेलानी ऐक रचना माणीये
      प्रभु विना कोण उतारे पार
           राग :- धन्याश्री
प्रभु विना कोण उतारे पार, छे मिथ्या संसार...प्रभु....टेक
विध्या भणे पण तेनी कृपा विना, कोण करे सतकार ;
प्रभु रीजे तो आपे पलमां, अभणने अधिकार... प्रभु...1
ऐक पुरुष सो नारी परणे, वधे नहीं विस्तार,
प्रभु रीजे तो वंध्याने पण, आपे पुत्र अपार... प्रभु...2
होय घणां हथियार हाथमां, नर तोई थाय नादार,
दुर्बळ जन पण तेनी दयाथी, जीत पामे जयकार... प्रभु...3
आ दुनियामां सहुने अंते, ऐनो छे आधार,
"पींगल" ऐक प्रभुने पूजो, कोईनी नहीं दरकार .... प्रभु....4

रचियता :- पींगलशीभाई पाताभाई नरेला
टाईप :- वेजांध गढवी
            www.charanisahity.in

टाईपमां भुल होय तो सुधारीने वांचवा विनंती छे

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads