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24 फ़रवरी 2017

||शिवा सप्तक||-||कर्ता-मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च्)||

*रचना -शिवा सप्तक*
             *छंद - त्रिभंगी*
        *कर्ता-मितेशदान महेशदान     गढ़वी(सिंहढाय्च्)*

महानाथ महेशर,अजय उमेशर,गिरी गजेश्वर,गरवासी,
गुण पत्त गुणेश्वर,सकळ सुरेश्वर,अनध अजेशर,वनवासी,
भळके भळवंकर,भीम भयंकर,रूप रसंकर,जट धारी,
नमह  नीलकंठ श्रीकंठ दिगंबर कृपा करो करुणा कारी,(1)

व्याघाम्बर धारण,कष्ट विदारण,गंग जटाधर कामारी
सेवक मन भावण,ध्यान लगावण,धुन जगावण,मनवारी
देवा धि देवं,नमन भु देवं,पंच मुखा,भो भयहारी,
नमह नीलकंठ श्री कंठ  दिगंबर कृपा करो करुणा कारी,(2)

परमेश्वर काळं,भयो विकराळं बनी महांकाळं नाच रियो,
विरहे विफ़रियो,दक्ष वधरियो,यज्ञ रोळीयो,हूंफरियो,
भटक्यो वनवंकर,राख झटंकर,भुत अघंकर,बलकारी
नमह नीलकंठ श्री कंठ दिगंबर कृपा करो करुणा कारी,(3)

तप ब्रह्म लगायो,खलक सजायो,जाप जपायो गान करे,
वेदा वखणायो,सोम  बणायो,अध नारीश्वर रूप धरे,
श्रुष्टि सर्जनकर,महा मयंकर,त्रिपुरान्तक मंगलकारी,
नमह नीलकंठ श्री कंठ दिगंबर कृपा करो करुणा कारी,(4)

जय सुर सूदन मन हरख अदन कर वदन नमन भय हरलिन्ना,
वीरभद्र जदन ,रूप लगन जदन,अज शांत अगन,मन भरलिन्ना,
मृत्युंजय तारक,भुजंग धारक,धर्म सवारक,संसारी
नमह नीलकंठ श्री कंठ दिगंबर कृपा करी करुणा कारी,(5)

भाले चंदरधर,टिको तिलक कर,भभूत छटंकर,निरंतर,
टोळी संगभमकर,मगन मनंखर,नाद गजंतर नमहर हर,
नंदी असवारम त्रिशुळ धारम सेवक तारम विषधारी,
नमह नीलकंठ श्री कंठ दिगंबर कृपा करो करुणा कारी,(6)

मित मन गुणगायो,नाद लगायो,छंद गवायो,चरण पड़ी,
तेजन  प्रसायो,पाठ पढ़ायो,सुण गणरायो लरण लड़ी,
शरणे तूज आयो,मन महकायो,जय हनुमंता अवतारी,
नमह नीलकंठ श्री कंठ दिगंबर कृपा करो करुणा कारी,(7)

*🙏------मितेशदान(सिंहढाय्च्)------🙏*

*कवि मीत*

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