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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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Notice Board


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31 अगस्त 2016

CGIF प्रस्तुत :- चारण गाथा अंगे चारण समाज ना आगेवानो नी अपील

*चारण गढवी ईन्टरनेशनल फाउन्डेशन  (C.G.I.F.)  प्रस्तुत*
        
*"चारण गाथा"*
         ( चारण प्रतिभा खोज प्रतियोगीता )

श्री रविदानभाई मोड

श्री मनहरदानभाई गढवी


श्री बळवंतभाई गढवी


श्री जोगीदानभाई गढवी (चडीया)

श्री घनश्यामभाई गढवी

मित्तलबेन गढवी


श्री किर्तीदान गढवी








आजेज  फोन करी नाम रजीस्ट्रेशन  करावो*
मो :- 7226834354
☎079-40095955

चारण समाज का गौरव :- ललिता चारण

चारण समाज का नाम तो रोशन किया साथ मे भारत का
नाम भी रोशन किया है चारण समाज के रत्न बाइसा ललिता
पुत्री राजवीर दान जी चारण 10 सितम्बर को राष्ट्रपति के
साथ लेफ्टिनेंट परेड का निरीक्षण करेगी हम सब को आप पर
गर्व है ।
जय माताजी
जय माँ सोनल


वह हैं तो आम लड़कियों जैसी ही। बिलकुल दुबली-पतली। हंसमुख स्वभाव। हाजिर जवाब। लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज। बुलंद इरादों की धनी राजस्थान की लाडली 23 वर्षीय ललिता चारण के लिए 10 सितम्बर का दिन अहम होगा जब वह चेन्नई के अफसर प्रशिक्षण अकादमी में देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखजी के मुख्य आतिथ्य में होने वाली पासिंग आउट परेड में 49 सप्ताह का लेफ्टिनेंट का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सेना में कमीशन हासिल करेगी। 



ललिता के पिता राजवीरदान चारण 21 जून 2000 को कारगिल में ऑपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हो गए थे। ललिता सात साल की थी जब उनके पिता का शव तिरंगे में लिपटा हुआ उनके गांव आया था। ललिता ने कहा कि उस दुख की घड़ी में उनकी बहन ने कहा कि पिता लौटकर आएंगे लेकिन उनको पता था कि उनके पिता अब इस दुनिया से जा चुके हैं। 



उन्होंने कहा कि उस समय मुझे दुख कम और गर्व अधिक था, क्योंकि मैं उनकी तरह बनना चाहती थी। ललिता चारण ने कहा कि मेरे एक भाई और दो बहन हैं। मेरी मां ने मुझे लड़के की तरह पाला, जबकि हमारे समुदाय में माना जाता है कि लड़कियों की जगह केवल रसाई में है। मेरी मां ने इसका विरोध किया और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। फिर परेशान होकर मां ने गांव छोड़ दिया और हम जयपुर आ गए।

राज्य कक्षानी ऐथलेटिकस मां दोड़शे मांडवीनो खेलाडी आशिष नाराण गढवी(काठडा)

राज्य कक्षानी ऐथलेटिकस मां दोड़शे मांडवीनो खेलाडी आशिष नाराण गढवी(काठडा)

सूर्य वंदना -31-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

अरक लिये ओवारणां, भावे वंदे भांण
जग जुकी के जोगडा, रंग हो सुरज रांण

सूर्य वंदना -31-08-16 रविराज भाचळीया

कपट रहीत काशपरा, कायम काढतों कोर,
भाचळीयो रवि भणे, भांण नित भळकी भोर,

हे भगवान सूर्य नारायण देव आप कोई पण जात नां स्वारथ के वळतर नीं आसा राख्या वीनां अनें जराय टाळों वटाळों के कूड कपट राख्या वरग कोई नें ओछो प्रकास के वधारे प्रकास आप्या विनां समग्र जगत नें उर थी ऐकज सरखा अंजवाळां आपो छो नें परोडीयुं थीये कोई पण जात नीं काती राख्या विनां अनहद उर्मिओ आपो छो खरे खर आपज ऐक सनातन सत्य छो बाकी बधुय धूमाडां नें बासकां भरवां जेवुं छे..... "वरताय ईज वास्तविकता"..... ऐवां हे भगवान सूर्य नारायण देव आप ने मारा नित्य क्रम मुजब हजारो हेत वंदन हो प्रभु....🙏🏼🌹🙇🏻🌅🌞🌅🙇🏻🌹🙏🏼

30 अगस्त 2016

करणी मां का छंद :- ✍कर्ता कवि "खेतदान दोलाजी मिसण"

-----------करणी मां का छंद ---------
📕छंद जात रेणंकी
--------------------------------------------
✍कर्ता कवि "खेतदान दोलाजी मिसण"
-------------☆☆☆☆----------------
                 दोहा
                --------
आप अजोनी ओपनी,माजी मरूधर मांय।
देवी धन देशनोक में,मेहासधु महमाय-----(1)
असरण सरणो आपरो, सेवग करणी साय।
चौसठ भेळी चोमणी, रमणी जंगल राय---------(2)
जग धरणी करणी जके, हरणी दुख हजार।
तारण तरणी त्रेगुणी, करणी जे कर वार-------(3)

               छंद रेणंकी
-     ---------------------------------
(तो) करनिय घर-घर मंगल करनिय, समरण वरणिय प्रात समे।
असरण सरणीय धरणीय उपर, गगने गवनिय पाप गमे।
वरण विसोतर वाहर करनीय, भरणीय संपत रिद्धि भरो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो।
देवी हर-हर संकट विघ्न हरो-------(1)टेक

अळ पर अवतार लियण जग आवड़, सतियल देवल मात सरू।
निरमळ घण रूप लिया तें नवलख, गणपत माता तुं गवरी।
उत्पत करण अमर घर आइयल, दिन-दिन जोंमण दया करो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो ---------
देवी हर-हर संकट विघ्न हरो-----(2)

झट-पट अवतार लियण जग जोंमण, अलख निरंजन आद सति।
झट-झट प्रगट अमट झट आइयल, घण छट चौसठ अगर गति।
कट-कट घट पाप विकट कट करनी, दिन-दिन जोमण दया करो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो-----------(3)

उचरत मुख चार वेद घर अंबर, कर धर सेवग अभय किया।
रुम-झुम करतिय रतनाए कर-कर,लाखोंय नवलख रूप लिया।
उणतर सर मेर वसावण इन्दर, कविजन भल वाखोंण करो।
करगर सुण मदद रेम कर हर-हर संकट विघ्न हरो------------(4)

झळळक अति चुड़ निरमळ मुख गंग जळ, कळा अकळ गेंतोळ किएं।
शशियल भव उजळ वदन सुकोमळ, लोवड़ीयाळीय रूप लिएं।
मरूधर सर देव प्रबळ कळ मणधर, छन-छन माजीय मां समरो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो-------- --(5)

गणधर नव नाग सधंतर गणपत, सुरनर किन्नर जाप समें।
अगणित नित देव ओधारण अपसर, नरकत नारद प्रेम नमें
हरि-हर भ्रम प्रेम नमें सोय हरदम, धन-धन देवी ध्यान धरो।
करगर सुण मदद रेम कर हर-हर संकट विघ्न हरो---------'(6)

जळ-थळ सबळ वार कर जंगल, तन मन सरणो आप तणों।
अमरत भर वादळ करतुंय उपर, शक्तिय सेवक साद सुणों।
पर दुख भंजणी देवी परसुध, जग धर परचो हे जबरो।
करगर सुण मदद रेम कर , हर-हर संकट विघ्न हरो-------'-------(7)

तारण तरण भरण भय त्रिगुणी, भुवनंग पोषण तुं भरणी।
चोमंड वरण ओधारण चारण, कर-कर मंगल मां करणी।
सरणागत सरण देयण तुं शक्ति, कर धर मों पर दया करो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो ------
देवी हर-हर संकट विघ्न हरो------(8)

         -----  कळस (छप्य) ----
विघ्न हरो वड़ देव, सेवगां नित साद सुणंता।
साय करे सूरराय , धाय झट ध्यान धरंता।
आद शक्त अवतार, वार कर लाज वधारे।
मेहासधु महमाय, आपरा दास ओधारे।।
देशनोक राय सरणो देयण,रिझीयें मात भेळा रेयो।
कर जोड़ दास "खेतो" कहे, किरतार रूप करणी जके।।

      अथ रेणंकी छंद सम्पूर्ण
-----------'''-------""--------

संकलन व टाइपिंग :- आवड़दान उमदान मिसण
ग्राम :-सोनलनगर (कच्छ)

CGUCO, चारणाचार पत्रिका अने चारण शकित समाज वडोदरा द्रारा आंतराष्ट्रीय महिला सेमिनारनुं आयोजन अने चारण महिला स्मरणिकानुं विमोचन कार्यक्रम नी विगत - कच्छमित्र समाचार पत्रमां

CGUCO,  चारणाचार पत्रिका अने चारण शकित समाज वडोदरा द्रारा आंतराष्ट्रीय महिला सेमिनारनुं आयोजन अने चारण महिला स्मरणिकानुं विमोचन कार्यक्रम नी विगत - कच्छमित्र समाचार पत्रमां

सूर्य वंदना -30-08-16 रविराज भाचळीया

लक्ख ज्योतुं लाखेणीयुं, झळोमळ करत्युं जग,
भाचळीयो रवि भणे, जेरां, सूर तुं चडावतों सग,

हे भगवान सूर्य नारायण देव आप ज्यारे लाखो लाखेणीयुं  ज्योतुं नीं शग चडावो छो त्यारे आखुये जगत अंजवाळी जाय छे नें पुलकीत थई नें हर्शित थई उठे छे नें उर मां आनंद प्रगटे छे माटे कायम नें माटे आवाज हेत अनें प्रीत राखतां रेज्यो दिनकर देव.... आपनें मारा नित्य क्रम मुजब हजारो हेत वंदन हो प्रभु.... 🙏🏼🌹🙇🏻🌅🌞🌅🙇🏻🌹🙏🏼

डॉ. मिणलबेन गढवी ऐ शरू करेल ऐक नानी ऐवी पहेल वटवृक्ष बनी.... गांधीनगर समाचार मां नेहलबेन गढवी नो अहेवाल

डॉ. मिणलबेन गढवी ऐ शरू करेल ऐक नानी ऐवी पहेल वटवृक्ष बनी.... गांधीनगर समाचार मां नेहलबेन गढवी नो अहेवाल

29 अगस्त 2016

मधरात्यें गाती गोवालण गीतडां रचना :- राजभा गढवी

मधरात्यें गाती गोवालण गीतडां
रचना :- राजभा गढवी
आ रचना राजभा गढवीना स्वर मां डाउनलोड करवा माटे ::- Click Here

||  महा जोध मेखासर मारण मामड || रचना :-चारण कवि अनुभा देवदानभा जामंग -बावळी

||  महा जोध मेखासर मारण मामड ||

                    " छंद आई श्री आवड जी नो "

                       || दोहा   ||
मामका जाणी मावडी.बावडी पकडे बाई.
भेखडे नो भराय.जलीयान दधिये जामंगा.(१)

कुवा वाव ने कुटीया.सर तळाव सुकाय.
पण डाढाळी नो डूकाय.आवड सरवाणी आनडा.(२)

महा धरति नू मांडलू.एमें ताजा दरिया तेल.
मेरू वायट मुकेल.ज्योतू सुरज जामंगा.(३)

                         ||  छंद :दुर्मिला  ||
पंड मरोडीने नाखत प्राछट,मुख फणीधर विष फुंके.
बहु वड भूंजगाय झेर निलंबर,आभडते भड डग्ग चुके.
करी कोप ते कोरड कर ग्रही,फुत्तकार ह्ज्जाराय शेष फणे.
महा जोध मेखासर मारण मामड,आवड तो वीण कोण हणे.
                       जीय आवड तो वीण कोण हणे,.....टेक(1)

जुध्ध अखाडाय जब्बर जंगम, धम्मम डुंगर हांक धहे.
खट खप्पर खंगम कर खडेडत,लोबडीयाळीय जीभ लहे.
घट घूमट उमट फेर घणा, घट रुधिर पिवत मुख घणे.
                                         महा जोध मेखासर....2

भोमी रण उच्छाळ मुछाळ भुजा बळ,कांध मरोडीन क्रोध करे.
भरे डग्ग ते भूतळ धुंखळ डम्मर,झरड चख्खमें आग झरे.
समसेर विन्जे  अरि तांणत सामट,विजळ वादळ आभ वणे.
                                             महा जोध मेखासर.....3

महा क्रोध करी देत मारत ह्च्चक,लच्चक कमठ पिठ कडे.
अशुराण झा हुंकळ आफळवा,दधि जाण तोफानिय लोढ दडे.
हट्ट हट्ट झा बक्कत दंत कट्टकत,फेरत ठेकत पांव फणे.
                                        महा जोध मेखासर....4

गुंज हिमाळाय गाजत गोहर,खोहर गुफाय खम्म खमें.
जब हुंकनी जब्बर फुंक लगे तब,धर गिरिवर धम्म धमे.
तव खग्ग त्रिशूळाय लागत टक्कर,धणणण अंबर धण धणे.
                                        महा जोध मेखासर ,...5

अशुराण सांढाण चो गण उफाण, ध्रुफाण दधि दळ धुबकीया.
गाढी ह्थ्थ वाढाळीय कोप डाढाळीय,ढाळीय देत्य ते ध्रव कीया.
अरणा कंध झाडाय प्राछट वाढाय,गाढाय शिश ते कोण गणे.
                                                महा जोध मेखासर..6

ढूंढ पहाडाय ढग्ग थिया धड,भड अनंगळ भोम पिया.
नवलाख बिखेरीये केश लटा,खडताळीये अटअं हास किया.
अब अंक बिहाडिये दे वड आशिष, भावथी "जामंग आन " भणे.
                                                    महा जोध मेखासर...7

चारण कवि
अनुभा देवदानभा जामंग -बावळी
मोबाईल
Mo   09825710949

सूर्य वंदना -29-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

कान अकोटे कामनी, गाय वलोंणा गीत
जाग्यां पंखी जोगडा, रांण उग्या नी रीत

सवार मां सुरज नारायण हजी उगवानी तैयारी करी रह्या होय त्यारे,एक तरफ कान मां अकोटा पेहरेल बायुं छाछ वलोववा वलोणा फेरवती गाती होय अने बीजी बाजु पंखीडा जागी ने मीठा टहुकार करता होय, आ बधुं भगवान सुरज नारायण ना उगवा ना स्वागत गीत जेवुं लागे, भगवान नारायण ने मारा नीत्य वंदन छे
🌅🌞☀🙏🏼☀🌞🌅

सूर्य वंदना -29-08-16 रविराज भाचळीया

अंधारा माथे आटकीं, रगदोळ्यां किरणें रांण,
भाचळीयो रवि भणे, भोम थी भागाड्यां भांण,

हे भगवान सूर्य नारायण देव सचराचर जगत नें माथे काळां अंधकार आटो लई गीयातां ऐनें आपे किरणो रुपी हथीयार नों प्रहार करीनें आ पृथ्वी उपर थी रगदोळी नें भूंडाये भगाड्यां नें जगत नें उजास नां अनुभव करव्या ऐवां उर उर में अंजवाळां करनारां हे भगवान सूर्य नारायण देव आपनें मारा नित्य क्रम मुजब हजारो हेत वंदन हो प्रभु...... 🙏🏼🌹🙇🏻🌅🌞🌅🙇🏻🌹🙏🏼

कवि श्री पद्माकर कृत गंगा लहरी :-संकलनः- कवि  श्री प्रवीणभाइ मधुडा       श्री  मोरारदान सुरताणीया

सुप्रभात जय माताजी 🌹🙏🏼🌹

कवि  श्री पद्माकर कृत गंगा लहरी
🌹🌻🍁🌹🌻🍁🌹🌻🍁
                  ॥ दोहो ॥

हरि हर बिधिको सुमिरिके. ,काटहि कलूष कलेस.
कवि पद्माकर रचत हे ,गंगा लहरीहि बेस.
               ॥  कवित ॥
वहति बिरंचि भइ वामन पगन पर,
      फेली फेली फिरि ईश शिषपें सुगथ की.
आई के जहान जन्हु जंघा लपटाय फिरि,
     दीनन के लिन्हे दोर कीन्ही तीन पथ की .
कहे " पद्माकर " सू महिमा कहालो कहो,
     गंगा नाम पायो सहि सबके अरथ की .
चार्यो फल फली फुली गह गही बह बही,
     लह लही कीरति लता हे भगीरथ की ....१

कुरम पें कोल कोल हूपे शेष कुण्डली हे,
     कुण्डली पे फबी फ़ेल सुफन हजार की.
कहे " पद्माकर " त्यो फन फर फबी हे भूमि,
     भूमि पे फबी हे थिति रजत पहार की .
रजत पहार पर शम्भू सुर नायक हे,
     सम्भू पर ज्योति जटाजूट सो अपार की.
सम्भू जटाजूट पर चन्द्र की छूटी हे छटा,
      चन्द्र की छटान पे छटा हे गंगधार की....२

करम को मूल तन तन मूल जीव जग,
      जीवन को मूल एक आनंद उघरि बो.
कहे " पद्माकर " सू आनंद को मूल राज,
      राज मूल केवल प्रजाको भ्होन भरि बो.
प्रजा मूल अन्न सब अन्नन को मूल मेघ,
      मेघन को मूल एक जग्य अनुसरि बो.
जग्यन को मूल धन धन मूल धर्म अरू,
      धर्म मूल गंगाजल बिन्दु पान करि बो....३

सहज सुभाई आई एक महा पातकी की,
     गंगा मया धोइ तुतो देह निज आप हे.
कहे " पद्माकर "सो महिमा महिमे भइ ,
      महादेव देवन में बाठी थिर थाप हे.
जकसे रहे हे जम थकसे रहे हे दुत,
      दुनि दुनि पापन की उठी तन ताप हे.
बांकी बही वाकी गति देखीके बिचित्र रहे,
      चित्र केसे लिखे चित्र गुप्त चूपचाप हे....४

गंगा के चरित्र लखि  भाखे जमराज एसे,
      एरे चित्र गुप्त मेरे हुकम में कान दे.
कहे " पद्माकर " ये नरक निमुंद कर,
      मुंद दरवाजन को तजि यह थान दे.
देख यह देव नदी कीन्हे सब देव याते,
      दुतन बुलाय के बिदा के बेग मान दे.
फार डार फरदन राख रोज नामा कहु,
      खाता खत जान दे वहि को वह जान दे ...५

जाने जिन हे न जग्य  जोग जप जागरन,
      जनम बितायो जग जापन को जोय के.ते.
कहे " पद्माकर "सु देवन के सेवन ते,
      दूरि रहे पूर  मति बे दरद होय के.
कुटील कुराही क्रूर कलही कलंकी कलि,
      काल की कथान में रहे जे मति प्रोय के.
तेऊ  विष्णु अंगन मे बेठे सूर संगन मे,
     गंगा के तरंगन में अंगनको धोय के.....६

जेसे ते न मोको कहू नेक हू डरात हूतो,
     एसो अब व्हे हू तोहि नेक हु न डरि हो.
कहे " पद्माकर " प्रचंड झो परे गोताऊ,
     मंड करि तोसो भुज दंड ठोकि लरि हो.
चलो चलि चलो चलि बीचलन बीच हुते,
     किंच बिच निच तो कुटुंब को कचरि हो.
एरे दगा दार मेरे पातग अपार तोही,
     गंगा की क छार में पछार छार करि हो ...७

पायो जिन तेरी धोरी धारामें धसत पात,
     तिनको न होत सूर पूर ते निपात हे.
कहे " पद्माकर " तिहारो नाम जाके मुख,
     ताके मुख अमृत को पुंज सरसात हे.
तेरो तोय छ्रोकरि छुटत तन जाको पात,
    तिनकी चले न जम लोकन में बात हे.
जहा जहा मया धुरि तेरि ऊडी जात गंगा,
    तहा तहा  पापन की धुरि ऊडी जात हे ...८

जमपूर द्वारे लगे तिनमे किवारे कोऊ,
      हे न रखवारे एसे  वन के उजारे हे.
कहे " पद्माकर " तिहारे प्रन धारे तेऊ ,
     करि अघ भारे सूर लोक कोसी धारे हे.
सुजन सुखारे करे पुन्य उजियारे अति,
     पतित कतारे भव सिंधु ते        उतारे हे.
काहुने न तारे तिन्हे गंगा तुम तारे अरु,
     जेते तुम तारे ते ते नभ में न तारे हे....९

विधि के कमंडल की सिद्धि हे प्रसिध्ध वही,
      हरि पद पंकज प्रताप की नहर हे.
कहे " पद्माकर " गिरीश शिष मंडल के,
      मुंडन की माल तत्तकाल अघहर हे.
भुपति भगीरथ के रथकी सु पुन्य पथ,
      जन्हु जप जोग फल फेल की फहर हे.
छेम कीछ  हर गंगा रावरि लहर कलि ,
      काल को कहर जम जाल को जहर हे .....१०

सौजन्यः-                                       संकलनः-
कवि  श्री प्रवीणभाइ मधुडा       श्री  मोरारदान सुरताणीया
  राजकोट                                     मोरझर
M.no.                                         M.no.
95109 95109                        9979713765

28 अगस्त 2016

सपाखरुं - रचयिता :राजकवि पिंगलशीभाई पाताभाई नरेला. भावनगर

सपाखरुं
       
               लड़ाई.. शौर्य नु.

रचयिता :राजकवि पिंगलशीभाई पाताभाई नरेला. भावनगर

पटा    ज़ातकी ने  राजपूतो   पवाडा  जीतता  पेला ,

      .      अखाडा  साधता   खेल   कवायती   अंग ,

थोडा   ग्रास  माथी   राज   बणावता   पाटे   थाटे ,

              जरा   तरा   वातमाथी   मचावता    जंग .......1

चाहता    बादशा    मोटा    शाहुकारो     सराहता ,

              हाथियां  ढाहता  लाख  पशा देता  हाल ,

नीपणाने    पासे    राखी    सराधरा .   निभावता ,

              चडावता  कलां  पांणी  चुकता  न  चाल.........2

संकलन: अनिरुद्ध  जे. नरेला

झवेरचंद मेघाणीनी जन्म जयंती निमिते सतीषभाई चारण नो लेख

छंद इन्द्र बाई माताजी (खुड़द) कर्ता कवि खेतदान दोलाजी मिसण

छंद इन्द्र बाई माताजी (खुड़द) का
-------------------------------------------
कर्ता कवि खेतदान दोलाजी मिसण
---------------------------------------------
देदलाइ थरपारकर (75 साल पूर्व रचित)
"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
                   दोहा
आद भवानी इश्वरी,  जग जाहेर जगदंब।
समरेयें आवो सायजे , वड हथ म करो विलंब ।।
चंडी तारण चारणों, भोम उतारण भार।
देवी सागरदांन री , आई धर्यो अवतार ।।
जगत पर्चा जबरा, रूपे करनल राय।
आवो बाई ईन्दरा , मरूधर थी महमाय।।

                    छंद
                 """""""""
(तो) मरंधराय महमाय, जोगमाय जब्बरा।
जठे जोधोंण नाथ ने, ओधार धार आपरा।
खमां खुड़द राय ने, अनेक रूप आपरा।
करां पुकार कांन धार, आव बेल ईन्दरा,
मां आवो साय ईन्दरा ----------------(1)

डंडे घुमंड दाणवां , चोमंड रूप चोवड़ा।
प्रचंड खंड खंड मे, अखंड रूप आवड़ा।
महान चंड मुंड ने, विखंड नार वमरा।
करां पुकार कांन धार, आव बेल ईन्दरा
मां आवो साय ईन्दरा ---------------(2)

सजे सणगार सोळ सार, हार कंठ हिंडळे।
भळक चुड़ नंग भाळ, मेळ झुळ मंडळे।
भलो झळक भेळीयो, रतन रंग रंगरा।
करां पुकार कांन धार, आव बेल ईन्दरा ।
मां आवो साय ईन्दरा ------------(3)

घमंक वाज घूघरा , ठमंक नेव रंथरा।
दमंक जेम दोंमणी , धमंक पांव युं धरा।
वजे नगार वार वार , ढोल वाज धर्म रा।
करां पुकार कांन धार , आव बेल ईन्दरा ।
मां आवो साय ईन्दरा ------------(4)

तड़ा तड़ाक ताड़ियुं , कड़ाक वाज कंगणा।
डहक डाक डमरू, गहक राग हे घणा।
रमे केलाश रंग रास, हे प्रकाश हाजरा।
करां पुकार कांन धार , आव बेल ईन्दरा ।
मां आवो साय ईन्दरा -------------(5)

हमें हिगोळ पुर हांम, तेज सुर क्रम हो।
तठे उमंग नाच तेथ, रीझ मात रम हो।
हिरा रतन ज्योत होत, दीप धुप डमरा।
करां पुकार कांन धार, आव बेल ईन्दरा ।
मां आवो साय ईन्दरा ---------------(6)

बड़ो अचंभ बाहीयंग, रमाड़ रास रूगळी।
अरधंग कोढ मेट्या आई, राज काज रमळी।
परचा अखंड पार वार , वाट घाट वमरा।
करां पुकार कांन धार , आव बेल ईन्दरा ।
मां आवो साय ईन्दरा -------------(7)

नरां नर्पाळ नेक पाळ, हाथ जोड़ हाजरी।
देवी दयाळ दुख टाळ, सुख भाळ सधरी।
संभाळ भाळ छोरुआं , ओधार धार आपरा।
करां पुकार कांन धार , आव बेल ईन्दरा ।
मां आवो साय ईन्दरा --------------(8)

पड़ंत जाय माई पग, आय घाय उगरे।
नमे करग जोड़ नाग, देव हो डिगंम्बरे।
नरां नमंत प्रेम नेम, हो शक्त हाजरा।
करां पुकार कांन धार, आव बेल ईन्दरा ।
मां आवो साय ईन्दरा -------------(9)

                कळस (छप्य)
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ईन्दर बाई अवतार,  मरूधर में महमाया।
आवो वाहर आज , शकत रूप सवाया।
अरीयों गोंजण एह, दास ओधारण देवी।
संकट मेटण साव, सुरनर जे नित सेवी।
तिण ठाम कोइ तारण तरण तके।
कर जोड़ दास "खेतो" कहे किरतार रूप करणी जके।।
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अथ ईन्द्रबाई खुड़द का छंद सम्पूर्ण

संकलन एवं टाइपिंग :-आवड़दान उमदान मिसण
ग्राम सोनल नगर ता:लखपत कच्छ
मो:9687504163

|| खलक पती ना खेल || रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.©        *|| खलक पती ना खेल ||*
.     *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
,        *ढाळ: पाये तने विपळी लागु*

खलक पत खेल ई खेले, मालीक ना कोय ने मेले
झाझी कोंण झीक आ झेले, बापलीया तुं आव ने बेले...टेक

खोळीया केरा खोपचा मां क्यां, पुरीया नाथे प्रांण
सदीयुं थी कैक साधको सोधे, जरी ना थाती जांण
सांपडतुं कांय ना छेले, खलक पत खेल ई खेले....०१

देवकी ने तें दूभवा दीधी, कीया गुना मां कांन
जनम्यो जे कूंख जादवा त्यांथी, भागीयो कां भगवान
जणेता ने मूकीयुं जेले, खलक पत खेल शुं खेले...०२

आश लई तारे आंगणे आव्यो , ई जादवा तुंनेय जांण
कीधुं नई कां कानजी पेलुं, सुदामा नुं सनमान
दखीयारो आथडे डेले, खलक वर खेल शुं खेले...०३

पुछीयुं छे बहुं प्रेम थी तुंने , काळजे वाला कांन
मरवा टांणेय माधवा तुंने , जोउं हुं जोगीदान
विंटाळीन वाल्यपुं वेले, खल्लक पत खेल ई खेले...०४

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गढवी युवक मंडळ अने CGIF द्रारा GPSC क्लास मां मार्गदर्शन आपता श्रीमति भकितबेन शामळ

ગઢવી યુવક મંડલ *સીજીઆઈએફ  દ્વારા જીપી એસસી. કોચિંગ ક્લાસ મા માર્ગદર્શન આપવા પધારેલા શ્રીમતી ભક્તિબેન શામળ ( ડેપ્યુટી સેક્રેટરી સ્પીપા )*  
"ચારણ અંક " થી દીકરીઓ દ્વારા સ્વાગત કરવામાં આવેલ

* વિધાર્થીઓ સાથે  સંવાદ. 
1- વાંચન ની ટેવ પાડવી,
2-  ધ્યેય પ્રાપ્તિ સુધી સખ્ત  મહેનત, 
3- જીપીએસસી  માટે અભ્યાસ ની રીત વિશે સચોટ માર્ગદર્શન આપ્યુ. 

હ્રદય પૂર્વક આભાર    
આ સમગ્ર જહેમત માટે શ્રીમતી શિલ્પાબેન ડી.મહેડુ ના આભાર 

શ્રીમતી ભક્તિબેન શામળ નો  સ્વાગત  કરતી દિકરીઓ




માર્ગદર્શન લેતા વિધાર્થીઓ

गझल - ऐकलो रचना :- कविश्री हिंगोळदान नरेला

गझल - ऐकलो रचना :- कविश्री हिंगोळदान नरेला

सूर्य वंदना -28-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

देव तुने नत दरसियें,जोडीन हस्तो जांण
जे सत नी पत जोगडा, राखण हारो रांण

हे नित्य देखाता ऐवा देव भगवान सुर्य नारायण अमे नित्य जागी ने हाथ जोडी ने आपना दर्शन करीये छीये ते आप जांणो ,अने हे मिहिर नाम सुरज नारायण आप सत (सत्य) नी पत (आबरु) राखण हार छो आपने मारा नित्य वंदन छे
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