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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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30 सितंबर 2015

चारण-गढवी लोकगायक कच्छ-2015

जय माताजी

चारण-गढवी  लोकगायक कच्छ-2015

➡ भाईओ काले ता.01-10-2015 फॉर्म भरवानी छेल्ली तारीख छे तो हजी कोई भाईओ अथवा बहेनो फॉर्म भरवामां बाकी होय तो भरी नाखवा विनंती छे.

➡ जे भाईओ पासे फॉर्म जमा थयेल छे तेओ आवतीकाले मोडामां मोडू सांजे -6 वाग्या सुधीमां फॉर्म जमा करावी जवा.

➡ जो समयसर फॉर्म जमा नहीं करवामां आवशे तो फॉर्म स्वीकारवामां आवशे नहीं जे ध्यानमां लेवा विनंती छे

संपर्क :-
भावेश गढवी :- 9825770692
हरजी गढवी :- 9979252911

पोस्ट बाय :- www.charanisahity.in

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    🙏 वंदे सोनल मातरम् 🙏

हे चारणी


HE CHARANI SUKH KARNI -SVAR URMILABEN GADHAVI MUNDRA-KUTCH DOWNLOAD MP3 Click Here

______|| झळहळतो जीवनमंत्र ||_______
हे चारणी सुख कारणी ! ब्रह्मचारणी आये शरण .
सच्चिदानंदे शारदे मंगलमयी प्रणमे शरण .
                                                     ..... हे चारणी .....

अंबिके आवड आशापुर्णे , है तुम्हारे बाल हम . 
जगतारणी अधहारणी , कुरु प्रणत की प्रतिपाल तुम.
                                                     ..... हे चारणी .....

हम क्यो पतीत हो गये , जब हो पतीत पावनी मात तुम .
हम क्यो अशांत अरु-असुचि जब हो,शांति सुचिंदा मात तुम.
                                                            ..... हे चारणी .....

पुर्वज सदश नीति पथीक हो , मातृभुमि के भक्त हम.
शुरे-उदार अरु सत्य वक्ता , अमृतमयी अनुरक्त हम .
                                                         ..... हे चारणी .....

द्रढविर वृती सेवक बने , अरु पढे शम-दम पाठ हम . 
अग्नि परीक्षा मे अडिग बन , बढे संयम बाट हम. 
                                                       ..... हे चारणी .....

यम यातना हो नर्क-दु:ख , कर्तव्य पथ छोडे न हम .
दम-दम तिहारा जप जपे , मर-मीटे मुख मोडे न हम .
                                                       ..... हे चारणी .....

आशिष उच्चरो अन्न पुर्णे , श्री चरण मे लीन हो हम .
हम हदय सिंचो अमृत  "सोनल" प्रेममयी लागी लगन .

                                                       ..... हे चारणी .....
रचयीता :- परम पूज्य आई श्री सोनल मां ( मढडा )
टाईप :- महेशदान गढवी नरोडा .
टाईपमां भुल होयतो बंधु क्षमा करजो 
              वंदे सोनल मातरम् 

29 सितंबर 2015

|| चारण गांन || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                || चारण गांन ||
.      रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
राग: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन (मिश्र सारसी)

श्री शारदा सुंण आरदा सत वचन धर्म न छोडीये
नित प्रोढ जागी प्रेमथी जगदंबीका कर जोडीये
यादी करी ऐ अगम नी ने दीव्य तेज दीपावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||01||

छे भव्य जे भूत काळ ऐने अधीक सौ उजळो करो
जळ हळ थतो जे जगत मां ऐ धरम ने पाछो धरो
वंदन करी विश्वे श्वरी ना रदय ने रे  रीझावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||02||

दारु ने गणींये दैत्य सोनल वात ने संभारी ये
व्यसनो तजी ने वेगळां नीज धर्म चारण धारीये
आयल तणां आदेश बावन नियम सर्व निभावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||03||

पद मान वैभव विमळ वांणी वाल जन विश्वेसरी
सुख सायबी मां सकल चारण ओपवो मां ईश्वरी
ज्ञाती सकळ गंगा गणी बद लेश ना उर लावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||04||

दीकरी ने गणींये देव ने नव द्हेज कारण दोभीयें
आयल उपासक अगम ना सुध आचरण थी सोभीये
नीज पुत्र वधु ने पुत्री गणी खुब व्हाल नेह व्रसावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||05||

ईरशा अहम त्यागी हरीरस नित्य चाखे चाह थी
कुड कपट ना हो काळजे नव छके ई वाह वाह थी
ऐवा अजाचक निम धारी खाज अखज न खावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||06||

आतम बली मन अडग निर्भय निडर हो जग नाथ सु
सत करम जन हीत हो सदा हे मात चारण हाथ सु
निज देश ध्रम पत नार कज बंबोळ रगत बहावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||07||

आयुं जगत मायुं फरी अवतार लई ने आव शे
जय जय जपी जगदंब नी ए गीत अमियल गावशे
प्हाडा ने वाडा सकळ त्यज सब ऐक बन जग आवीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||08||

.            अथः श्री चारण गांन स्तुती 
.  वंदे सोनल मातरम्   

28 सितंबर 2015

सवैया रचियता :- पिंगळशीभाई नरेला

   
सवैया
जो न जप्यो वृजराज हुंको जस
तो कविराज अकाज कहायो
लोभीनको यश पेट हीके लीये
गाम ही गाम फिर्यो नित गायो
नांही दीयो परमारथमें धन
अन्न न पेट भरी कबु खायो
दृष्टि पर्यो जमको जब दंगल
पिंगल अंत वही पछतायो

राज मिल्यो शिरताज धर्यो
गजराज चडयो सुकवि गुन गायो
राग सुन्यो गुनिका मन रंजन
बाग बिहार अपार बनायो
रैयतको कछु काज सर्यो नहीं
गोविंदको गुन ना कबु गायो
दृष्टि पर्यो जमको जब दंगल
पिंगल अंत वही पछतायो

मानुषको अवतार दीयो प्रभु
भुल गयो घरकाज लुभायो
केफ कीयो रु बक्यो बिन कारन
ऐश करी बहु द्रव्य उडायो
राम उचार नहीं रसना पर
दीनकुं अन्न कबु न दिलायो
दृष्टि पर्यो जमको जब दंगल
पिंगल अंत वही पछतायो

रचियता :- भावनगर राजकवि पिंगळशीभाई पाताभाइ नरेला
टाईप :- हरि गढवी ववार कच्छ
     वंदे सोनल मातरम्  

27 सितंबर 2015

|| बेटी बउं बाप ने वाली ||. रचना: जोगीदान गढवी (चडीया )

.            || बेटी बउं बाप ने वाली ||
.        रचना: जोगीदान गढवी (चडीया )
.          राग: माडी अमे बाळ तमारां....

काले जे बोलती काली..समजु थई  सासरे हाली....
लागी ऐने हाथ मां लाली. .बेटी बउं बाप ने वाली...

ढींगलां लैने धोडती ती जे.आज उभी अण डोल
मांडवे आवि मौन बनी जो...बेन दीये नई बोल
ठाकर नई वात आ ठाली.. बेटी बउं बाप ने वाली..

भाई काजे आखा गाम ने भांडे..मात नो खाती मार
(तोय) विर खम्मा कई वाल वरहावे...ऐवडो जीव उदार
हेताळी हिबकी हाली...बेटी बउं बाप ने वाली..

बापु तमे  ऐने बोलता ना कंई.... बउं भोळी मुंज बा..
करी भलांमण काळजां चीरे ...गभरुडी ईय  गा..
प्रेमे जेने कोड थी पाली..बेटी बउं बाप ने वाली...

जाउं छुं के त्यांतो काळजुं कंपे..मन मां बाप मुंझाय
साचवज्यो के त्यां सेरडो पडतो, (जांणे) जीवडो बारो जाय
खावा धाय खोरडुं खाली...बेटी बउं बाप ने वाली..

दीकरी नई आ छे  दीकरो मारो...जीव छे जोगीदान.
ममता ऐनी मावडी जेवी.......पाथरी देती  ..प्रान
आहुडा आंख मां आली..... समजु थई  सासरे हाली....

दीकरी एटले ममता नो मीठो मेरांमण

गांडा नी वणजार

.              गांडा नी वणजार

जोजो भाइ गांडा नी वणजार, गांडा नी वणजार
जेनो गणता ना'वे पार, जोजो भाइ गांडा नी वणजार...

शुक गांडो,ध्रुव गांडो,गांडो क्यादु कुमार
नारदजी तो एवा गांडा,जेणे बांध्या नहिं घरबार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

गांडो हनुमंत,गांडो विभीषण,गांडी शबरी नार
गांडा गृहे पग धोइने प्रभु उतार्या पार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

गोकुळ गामनी गोपीयुं गांडी,भुली घर वहेवार
बंसी नादे चाली नीकळी,सुता मेल्या भरथार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

सुदामा ना गांडपणे,वेठ्या भूख अंगार
पांच पांडव एवा गांडा,जेणे छोड्या नहीं कीरतार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

वीदुर पत्नी गांडी थइने, रटे नंदकुमार
छबीला ने छोतरा आप्या,गरभ फेंक्या बार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

गोडाणाना गांडपणे काम कर्युं हदपार
द्वारिका नो ठाकोर आव्या,डाकोर गाम मोजार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

कबीर,तुलसी,सुर गांडो,ने रोहिदास चमार...
गोरांगे तो गांडा थइने,गांडो कीधो संसार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

धनो गांडो,धीरो गांडो,गांडो प्रीतम प्यार
सखु,मीरां,परमां गांडी,जेणे तोळ्या जगथी तार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

नामो गांडो,सुखो गांडो,गांडो मुळदास चमार
जलाराम नी वात सुं करवी,जेणे वळावी घरनी नार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

जुनागढ नो नागर गांडो,एतो नाच्यो थइ-थइकार
बावनकाम कर्या प्रभुए,तोय आव्यो नहीं अहंकार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

कह्या घणा ने हालमा पण,छे भविष मां थनार
भक्तकुळ नो नाश नथी,एम बोल्या जगदाधार
जोजो भाइ गाडानी वणजार...

दुनिया जेने गांडा गणे,पण हरीने मन होंशियार
'गोविंद' गांडो, एनुं गीतडुं गांडु,अने गांडा सांभळनार
जोजो भाइ गांडानी वणजार...

🌹 रचना --- गोविंद भगत 🌹

💐 टाइपिंग --- राम बी गढवी 💐
नविनाळ कच्छ
फोन नं. --- 7383523606

👏 भुलचुक क्षमां 👏

      🙏 वंदे सोनल मातरम्ं 🙏

26 सितंबर 2015

छंद त्रिभंगी

.               दुहो
हर पर विपति हाथसे डर पर दारा दाम
धर ईश्वर नित ध्यानमें कर नेकी के काम
             छंद त्रिभंगी
कर नेकी करसे डरपर धरसे पाक नजरसे धर प्रीती
जप नाम जीगरसे बाल उमरसे जसले जरसे मन जीती
गंभीर सागरसे रहे सबरसे मिले उधरसे परवाना
चित चेत सिंहाना फीर नहीं आना जगमे आखर मर जाना
मद ना कर मनमे मिथ्या धनमे जोर बदनमे जोबनमे
सुख हे न स्वपनमे जीवन जनमे चपला धनमे छनछनमे
तज वेर वतनमे द्वेश धरनमे नाहक इनमे तरसाना
चित चेत सिंहाना फीर नहीं आना जगमे आखर मर जाना
जुठा हे भाइ बाप बडाइ जुठी माइ माजाइ
जुठा पित्राइ जुठ जमाइ जुठ लगाइ ललचाइ
सब जुठ सगाइ अंत जुदाइ देह जलाइ समसाना
चित चेत सिंहाना फीर नहीं आना जगमे आखर मर जाना
कोउ अधिकारी भुजबलभारी कोउ अनारी अहंकारी
कोउ तपधारी फल आहारी कोउ विहारी वृर्तधारी
त्रस्ना नहीं टारी रह्या भीखारी अंत खुवारी उठ जाना
चित चेत सिंहाना फीर नहीं आना जगमे आखर मर जाना
तज पाप पलीती असत अनीति भ्रांती भीति अस्थिती
सज न्याय सुनीति उत्तम रीती प्रभु प्रतिति धर प्रीती
इन्द्री ले जीतीसुख साबिती गुण माहिती दर्ढ ज्ञाना
चित चेत सिंहाना फीर नहीं आना जगमें आखर मर जाना
दुनिया दो रंगी तरक तुरंगी स्वारथ संगी ऐकंगी
होजा सतसंगी दूर कुसंगी ग्रहेन टंगी जन जंगी
पिंगल सुप्रसंगी रचे उमंगी छंद त्रिभंगी सरसाना
चित चेत सिंहाना फीर नहीं आना जगमें आखर मर जाना
रचियता :- पिंगळशी भाइ नरेला
टाइप  हरि गढवी गाम   ववार मुंन्द्रा   कच्छ
          मो   96380 41145


24 सितंबर 2015

कवित.रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.  ||  कवित. ||

रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)


आलम अढार अवनी पे जो अराधे जाकुं
भार जो अढार वन्न संपत मे सायो है.
कुरु खेत दीयो सैन अक्षिणी अढार पुरी
युद्ध भी अढार दीन चाह चल्लवायो है.
आयुध अढार हत्थ देख्यो अरजुन्न रुप
अध्याय अढार गीता गांन मे गवायो है.
कहे जोगीदान कान जीलण कुं आयो जल्ल
दीन गीन ती मे ये अढार अंक आयो है.


कृ्ष्ण ने अढार आलम पुजे छे..अढार भार वनस्पति तेणे वन मां गायो ने चरावी छे..कुरुक्षेत्र मां सैन्य पण अढार अक्षणी लीधु..युद्ध पण अढार दीवस चाल्युं..अर्जुन ने वैराट रुप बताव्युं तेमां पण अढार हाथ मां आयुध लीधा..गीता पण अढार अध्याय मां गाई अने आजे ज्यारे जळ झीलवा आव्या छे..त्यारे तेमना जन्मदीन गोकळ आठम थी आज सुधी ना अढार दीवस थाय ते आंकडो पण कृष्ण चुक्या नथी....
जळ झीलणी नां अढार अंकी ने हजारो वंदन...जय श्री कृष्ण

गजब हाथे गुजारीने

कवि श्री पिंगळसिंहभाई पाताभाई नरेला भावनगर राज कवि रचित एेक कविता
         गजब हाथे गुजारीने ...  
     राग - काफी ताल :- दीपचंदी


गजब हाथे गुजारीने पछी काशी गयाथी शुं ;

मळी दुनियामां बदनामी, पछी नासी  गयाथी शुं.... टेक...

दु:खी वखते नहि दीधुं, पछी खोटी दयाथी शुं ;

सुकाणा मोल सृष्टिनां, पछी वृष्टि थयाथी शुं ; ....1

विचार्युं नहि लघु वयमां, पछी विद्या भण्याथी शुं ;

जगतमां कोई नव जाणे, जनेतानां जण्याथी शुं ; ...2

समय पर लाभ आप्यो नहीं, पछी ते चाकरीथी शु.
मळयु नहीं दुध महिषिनुं, पछी बांधी बाकरीथी शुं.....3
न खाधुं के न खवराव्युं दु:खी थईने रळ्याथी शुं ;

कवि पिंगल कहे, पैसो मुवा वखते मळ्याथी शुं ...4


रचियता :-  भावनगर राज कवि श्री पिंगळसिंहभाई पाताभाई नरेला
     संदर्भ :- पिंगळवाणी मांथी
➡ आ रचना मोकलवा बदल श्री धर्मदीपभाई नरेला भावनगर वाळा नो खूब खूब आभार

 पोस्ट टाईप :- मनुदान गढवी
     वंदे सोनल मातरम् 

23 सितंबर 2015

नशो नोंतरे नास. रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.     || ....नशो नोंतरे नास.... ||
रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)
दोवा रहे न डोबडी.छोरां रहे वण साश.
जुवो ने केवो जोगडा.नशो नोतरे नास.(01)
खेतर रहे न खेडवा.रहे न खीलडे राश.
जुवो जगत पर जोगडा.नशो नोतरे नाश.(02)
बोल्या करशे बायडी.कायम घर कंकाश.
जुवो जगत पर जोगडा.नशो नोतरे नाश.(03)
गोथां खाता गटर मां.पडे नरक नी पास.
जुवो जगत पर जोगडा.नशो नोतरे नास.(04)
गांजो पी गांडा बने.ईज्जत नी नई आस
जोने केवो जोगडा.नशो नोतरे नास.(05)
भुंड तणो ते भाई गण.दारु नो जे दास.
जुवो नजर थी जोगडा.नसो नोतरे नास.(06)
खुवार करतो खोळीयुं.लथडे जीवती लास.
जुवो ने भमता जोगडा.नसो नोतरे नास.(07)
ईज्जत नई ना आबरु.बोल्ये य मारे बास.
जोडे गमे न जोगडा.नसो करे ई नास.(08)
दोरु पी बस डोलतो.त्रिया ने देतो त्रास.
जो घर भागे जोगडा.नसो नोतरे नास.(09)
गणसे नई कोई गाममां.जंतर वाग्ये जास.
जो साचु क्हे जोगडो.नसो नोतरे नास.(10)
खोटा ईज्जत खोईने.वोरो नही विनास.
जाळव घर क्हे जोगडो.नसो नोतरे नास.(11)

20 सितंबर 2015

वीर शहीद माणशी

वीर शहीद माणशी 

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राधाष्टमी

भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी के नाम से मनाया जाता है. इस वर्ष यह 21 सितम्बर 2015 , को मनाया जाएगा !
राधाष्टमी के दिन श्रद्धालु बरसाना की ऊँची पहाडी पर पर स्थित गहवर वन की परिक्रमा करते हैं. इस दिन रात-दिन बरसाना में बहुत रौनक रहती है. विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. धार्मिक गीतों तथा कीर्तन के साथ उत्सव का आरम्भ होता है.
राधाष्टमी कथा
राधा जी के जन्म से संबंधित है. राधाजी, वृषभानु गोप की पुत्री थी.  राधाजी की माता का नाम कीर्ति था. पद्मपुराण में राधाजी को राजा वृषभानु की पुत्री बताया गया है. इस ग्रंथ के अनुसार जब राजा यज्ञ के लिए भूमि साफ कर रहे थे तब भूमि कन्या के रुप में इन्हें राधाजी मिली थी. राजा ने इस कन्या को अपनी पुत्री मानकर इसका लालन-पालन किया. इसके साथ ही यह कथा भी मिलती है कि भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार में जन्म लेते समय अपने परिवार के अन्य सदस्यों से पृथ्वी पर अवतार लेने के लिए कहा था, तब विष्णु जी की पत्नी लक्ष्मी जी, राधा के रुप में पृथ्वी पर आई थी. ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार राधाजी, श्रीकृष्ण की सखी थी. लेकिन उनका विवाह रापाण या रायाण नाम के व्यक्ति के साथ सम्पन्न हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि राधाजी अपने जन्म के समय ही वयस्क हो गई थी. राधाजी को श्रीकृष्ण की प्रेमिका माना जाता है.
राधाष्टमी पूजन
राधाष्टमी के दिन शुद्ध मन से व्रत का पालन किया जाता है. राधाजी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराते हैं स्नान कराने के पश्चात उनका श्रृंगार किया जाता है. राधा जी की सोने या किसी अन्य धातु से बनी हुई सुंदर मूर्ति को विग्रह में स्थापित करते हैं. मध्यान्ह के समय श्रद्धा तथा भक्ति से राधाजी की आराधना कि जाती है. धूप-दीप आदि से आरती करने के बाद  अंत में भोग लगाया जाता है. कई ग्रंथों में राधाष्टमी के दिन राधा-कृष्ण की संयुक्त रुप से पूजा की बात कही गई है. इसके अनुसार सबसे पहले राधाजी को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए और उनका विधिवत रुप से श्रृंगार करना चाहिए. इस दिन मंदिरों में 27 पेड़ों की पत्तियों और 27 ही कुंओं का जल इकठ्ठा करना चाहिए. सवा मन दूध, दही, शुद्ध घी तथा बूरा और औषधियों से मूल शांति करानी चाहिए. अंत में कई मन पंचामृत से वैदिक मम्त्रों के साथ "श्यामाश्याम" का अभिषेक किया जाता है. नारद पुराण के अनुसार 'राधाष्टमी' का व्रत करनेवाले भक्तगण ब्रज के दुर्लभ रहस्य को जान लेते है. जो व्यक्ति इस व्रत को विधिवत तरीके से करते हैं वह सभी पापों से मुक्ति पाते है !
ब्रज और बरसाना में राधाष्टमी
ब्रज और बरसाना में जन्माष्टमी की तरह राधाष्टमी भी एक बड़े त्यौहार के रूप में मनाई जाती है. वृंदावन में भी यह उत्सव बडे ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, रावल और मांट के राधा रानी मंदिरों इस दिन को उत्सव के रुप में मनाया जाता है.  वृन्दावन के 'राधा बल्लभ मंदिर' में राधा जन्म की खुशी में गोस्वामी समाज के लोग भक्ति में झूम उठते हैं. मंदिर का परिसर राधा प्यारी ने जन्म लिया है, कुंवर किशोरी ने जन्म लिया है के सामूहिक स्वरों से गूंज उठता है. मंदिर में बनी हौदियों में हल्दी मिश्रित दही को इकठ्ठा किया जाता है और इस हल्दी मिली दही को गोस्वामियों पर उड़ेला जाता है. इस परवह और अधिक झूमने लगते हैं और नृत्य करने लगते हैं.राधाजी के भोग के लिए मंदिर के पट बन्द होने के बाद, बधाई गायन के होता है. इसके बाद दर्शन खुलते ही दधिकाना शुरु हो जाता है. इसका समापन आरती के बाद होता है !
राधाष्टमी महत्व
वेद तथा पुराणादि में राधाजी का ‘कृष्ण वल्लभा’ कहकर गुणगान किया गया है , वही कृष्णप्रिया हैं. राधाजन्माष्टमी कथा का श्रवण करने से भक्त सुखी, धनी और सर्वगुण संपन्न बनता है, भक्तिपूर्वक श्री राधाजी का मंत्र जाप एवं स्मरण मोक्ष प्रदान करता है. श्रीमद देवी भागवत श्री राधा जी कि पूजा की अनिवार्यता का निरूपण करते हुए कहा है कि श्री राधा की पूजा न की जाए तो भक्त श्री कृष्ण की पूजा का अधिकार भी नहीं रखता. श्री राधा भगवान श्री कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी मानी गई है !
जय श्री कृष्ण राधे क्रिष्ना

16 सितंबर 2015

गणेश चतुर्थी

नारायण स्वामी बापु नुं परीचय


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चारण समाज नुं गौरव

चारण समाज नुं गौरव 

रांध

रांध 

राम भजननी रीड पडी

राम भजननी रीड पडी
हरिजन होय ते…हालीनी नीकळजो, रामभजननी रीड पडी…,
साचा होय ते चाली नीकळजो, रामभजननी रीड पडी…
हरिजन. टेक
तृष्णा केरां त्रांसां वाग्यां, लक्ष्मीजीनी फोज चडइ…
झूझवुं होय तो हालो, जुवानो ! घाव झीलो जई एक घडी… 
हरिजन…(१)
सागर जेटला धावण धाव्या, जनारीने पेट पडी…,
झूझवुं होय तो हालो, जुवानो ! घाव झीलो जइ एक घडी…,
हरिजन…(२)
गणी गणीने ऋण चुकावो, लेखण खडगे ल्यो लडी…,
जीवनमरनो छे सरवाळो, रखे जाय नइ भूल पडी…
हरिजन… (३)
आपणो मारग रोकीने ऊभी, आशा, तृष्णा, व्योम अडी…,
बळती आग्युंमां कूदी पडजो, अजरा मारग ल्यो लडी…
हरिजन…(४)
कांइ फिकर नइ केता कहे भले, माथां रणमां जाय पडी…,
' काग ' जीती जाय त्रणे भुवनमां, धड लडे जो एक पडी…
हरिजन…(५)

रचना :- काग बापु
टाइप :- सामरा पी गढवी

15 सितंबर 2015

पींगळसी बापुना जन्म दिवसनी उजवणी करवामां आवशे

सभी कविगण को में धर्मदीप नरेला
" पिंगल जन्ममहोत्सव 2"

के पवित्र दिन पे हाज़िर होके चारणी एवम् डिंगल की धरोहर आज भी मजबूत होने की पुष्टि करने का अनुरोध
करता हु ।

इस प्रसंग के साथ श्री पिंगलशीभाई पातभाई नरेला के जन्म को 159 साल पुरे होंगे ।

इस प्रसंग को खास कर वर्तमान युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के उद्देश्य से  आयोजित किया गया हे ।

हमारे सबके चहिते
श्री जोगीदान गढ़वी(चडीया) और उनकी चयनित टीम कवी संमेलन करेंगे,
साथ ही चारणी भाषा को आज की पीढ़ी समज पाये इस कारन हेतु शब्दकोष एवम् मोबाइल एप्लीकेशन बनाने की घोषणा करेंगे ।

गढ़वी विथ गिटार की मिसाल कायम करके नयी पीढ़ी को प्रेरित करने वाले युवा कलाकार
श्री जिगरदान गढ़वी अपने प्रतिभा दिखाएंगे।

उपस्थित होंगे,

श्री रघुवीर कुंचाला अपने सुरो से समां बांधेंगे ।
श्री मिलिंद गढ़वी जो की युवा शिष्ट कवी के तौर पे  सर्व स्वीकृत हे ।
श्री धीरूभाई सरवैया साहित्य एवम् सर्व मानित हाश्य कलाकार ।

19 प्रिंट मीडिआ
11 टीवी चेनल्स

समाज एवम् ग्नाति विशेशयज्ञ।

आप सर्व राजस्थान एवम् गुजरात कवी गण की उपस्थिति हमारे लिए आदर दायीं होगी।

तारीख :- 10-10-2015

सरनामुं :-  भावनगर पींगळसी बापुना निवास्थाने

हमारा निमंत्रण स्वीकार करे।

धर्मदीप नरेला
8530809108
9727670007

पोस्ट बाय :- www.charanisahity.in

🌹🌻 वंदे सोनल मातरम् 🌹🌻

हालरडुं

हालरडुं
हाथ हींचोळीने ताणतां दोरी, हैडे हेत न माय -
माता गाय बाळनां गाणां……
(तोय)वीरोजी रेय नई छाना ……टेक
पारणामांथी सुणवी छे एने, वंश गोहिलोनी वात  -
आंखोथी बाळ समजावे ……
(मने) ते केडे नींदरुं आवे ……१
सांभळे सूतो बाळराजा, माए मीठडी मांडी वात -
गोहिलोनुं बिरद छे न्यारुं ……
गंगाजळ कुळ छे तारुं ……२
ब्राह्मण वैश्य ने शूद्न माटे रूडी, गंगमाताजी धार-
रजपूतोनुं तीर्थ बतावुं ……
(एने) प्रजाना हितमां न्हावुं……३
बोल अफर, जेना काछ अणडग, जेने देशतणां अभिमान-
पोतानी भोमका माटे ……
ऊनां ऊनां लोई पण छाटे ……४
सिंह सादूळा ! तुं राखीश मा झाझी परदेशोनी प्रीत-
घरोघर घोडलां हांकी ……
प्रजानी सुण हालाकी ……५
आत्पजनो ने भायातने, बाळुडा ! जाणजे  पोतानी बांय-
एनी जागीर न लेजे ……
एने दु:खे भागीओ थाजे ……६
सुख दु:खे समभाव हृदे, एवा रजपूतोनां नाम
एटलुं, मारा प्राणथी व्हाला……
लखी राख, कृष्णना लाला ……७
आंहींनुं सुधारी, बाळ मारा ! उर धरजे इश्र्वर ध्यान-
सांभळ, पेरमना राज.
देयुंना मोह नो'य झाझा……८
आशरे आव्यो न आपीओ, रे एक ससलानो शिकार -
क्षत्रीवट धर्मने धार्यो……
(ते दी) खांडानो खेल स्वीकार्यो……९
चारणीने जोडी सांतीए रे, एनां वावणीनां टांणां जाय -
देपाळे धर्म संभार्यो……
धोंसर लईने कांध पर धार्यो……१०
बेटडा ! तारा बापदादा लेता, दरीआ केरां दाण-
सुणी शाह हाथ पछाडी……
आव्यो मोटी फोज उपाडी……११
मोखडो ऊठयो मामले रे ते दी, शाह पापी ग्यो त्राह-
खेडी जुद्ध मजलूं लांबी……
(एनी) "खदडपर" मां धडनी खांभी……१२
रामदास जाता काशीए ने; उदेपुरनां खाधेल अन्न-
आवी म्लेच्छ फोज हजारां……
ते दी ' राणा आडां शीश उतार्यां……१३
वखतसिंहे वेरीओ सामा रोमे रोमे झील्या घाव -
एनां फळ मीठडां वेड्यां……
(दादे) रातां रातां लोई बउ रेड्यां………१४
मोसाळमां तारे जाम अजोजी , ए सुणी धीगाणानी वात -
ते दी' वरमाळ फेंकीने……
आव्यो रणमांय ठेकीने……" १५
आठ दीने उजागरे वीराने, आववा मांडी ऊंघ-
हालरडे आंख घेराणी……
व्हाली लागी " काग " नी वाणी. १६
रचना- दुला भाया काग
टाइप- सामळा .पी. गढवी
mo- 9925548224
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14 सितंबर 2015

|| मोगल रास सप्तक ||

आई श्री मोगल ने वंदना
हुं भगत बापु नो चाहक छुं ऐमनी कलम तो अदभुत हतीज पण छतां...ऐक स्थळे...मोगल ना पक्षपाती तरीके  कहुतो... पुज्य भगत बापु लखे छे के ..माडी तारा खांडा ने त्रिसुळ रण मां खणरेखण्या..माडी त्यांतो लड्यारे विना ना लशकर भाग्या रे .मछराळी मोगल...गांडी थई डणकी तुं डुंगर .....
तो सवाल ए के..जो लड्या विना लश्कर भागी ग्या होय तो मोगल शुंकाम डुंगर गाळाओ गुंजावे ऐवी डणकुं नाखे ??
पण  ऐम दुस्मनो लड्या विना भागी ग्या होय अने पोते पड्यो जस लई ले ऐ मोगल नई...मोगल तो ऐनी फोई चोरमां नी जेम लड़वा ना मनसुबे थी रणमां रास मांडी ने बेठी ती......अने ई रास केवो हतो.......
.                   ||मोगल  रास सप्तक  ||
.            रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )
.                    छंद: मिश्र त्रोटक दुर्मिला
तरवारुंय तांणीय मेघ मंडाणीय घांघणीयाणीय घोर घुमे
फरड़डाट फरे रण फुद्दर मोगल भेळीयो व्रेमंड मांय भुमे
करे हाक बजे ज्यम डाक पडे कन धाक धधाक धधाक धमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 01||
हुकळी उकळी हूहूकाट करे झूमती घुमती चख आग झरे
घडे डाट दीये हथ घाव रीपु शीर पीर वदी दुठ पाग परे
खणकी झणकी रणकी खड़गां डंणकी दल तुं अहरांण डमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 02||
खणेंणाट करी कर कांकण ने अडेडाट तुं आयल आभ उठे
कडेडाट कडेडीय विजळ सी आय राखह माथेय देव रुठे
रमे राहडो तुं हत्थ जोगणीयुं जेर जम दड्ढी वाका बुक जमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 03||
धणेंणाट धणेंणीय केहर सी हणेणाट करी रण हाक रची
गणेणाट करी उचे आभलीये उड्यां माथलडां ज्यम होड मची
खलके खमकारी चारणा चारीय खोट ते मोगल केम खमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 04||
करती किलकाट किलोल कली तारुं रुप भयानक आज रणे
दीये ठेक धरा पडतो थडको फड़को पड़तो जाई शेष फणे
तर हुर रुधी रांय रेल तवां त्रब केल मुकेल ना खेल क्षमे (खमे)
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 05||
धर ओखाय घारीये गोरव याळी ये नाळीये गोखण गाम गमे
लीये चारण लेखण नाम लाजाळीय  जोगण तुं नीत नेह जमे
कीरपा कीरपाळीय नेक नेजाळीय नृप घणां पद शिस नमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 06||
उचरेल तुं मात उदोह उदोह जुदोह नको कोई आज जडे
तरवार ग्रही  तरवेरोय तेखण पुजण सोजण पाय पडे
जोगी दान करे अनुमान सुजान तुं सोय भले नव तेह समे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 07||
(पुज्य आई श्री मोगल ना चरणों मां हजारो वंदन सह रास सप्तक)
पेहला पांच अंतरा मां माताजी नो क्रोध छे पण पांचमा अंतरानी
छेल्ले माताजी क्षमे कही ने वळता भाव मां छेल्ला बे अंतरा मां
आई नो राजीपो व्यक्त करवा कालावाला करेल छे...)
रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )
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.  जय मां भगवती चारण चंडी आई मोगल 
       वंदे सोनल मातरम् 

12 सितंबर 2015

PSI / ASI नी परीक्षामां चारण-गढवी समाजना पास थयेल उमेदवारोनी माहिती

.       जय माताजी

आजे जाहेर थयेल पोलीस भरती बोर्ड द्रारा लेवायेल PSI / ASI नी परीक्षामां चारण-गढवी समाजना पास थयेल उमेदवारोनी माहिती बधाने मळी रहे ऐ माटे नानकडू प्रयास करवामां आवेल छे.
➡ PSI- पुरूष कुल 362 पास थयेल छे ते मांथी चारण समाजना नीचे मुजब उमेदवारो पास थया छे.
क्रम               नाम       मार्कस         मेरीट नंबर
(1) श्री श्याम माणेक गीलवा - 338.67 - 3 झरपरा-कच्छ
(2) श्री नाराण माया शाखरा- 328.30 - 17
(3) श्री ब्रिजेशकुमार सी गढवी - 308.07 - 67
(4) श्री गोपाल सांगा गढवी - 312.77 - 15 काठडा कच्छ
(5) श्री दिनेश बी गढवी - 325.43 - 39
(6) श्री हार्दिक ऐम गढवी - 311.50 - 29
(7) श्री दिलुभा आर.गढवी - 308.97 - 53
(8) श्री चेतनकुमार ऐम गढवी - 316.17 - 105 ईडर
(9) श्री जबर के गढवी - 311.53 - 28
(10) श्री हरेनसिंह बी गढवी - 322.10 - 50 -देवरासण
(11) श्री विमल के गढवी - 320.87 - 62
(12) श्री शामरा वी शाखरा - 316.33 - 110 - भूपपुर कच्छ
(13) श्री जिग्नेश जे गढवी - 309.97 - 38 - राजकोट
➡ PSI- स्त्री कुल 164 पास थयेल छे ते मांथी चारण समाजना नीचे मुजब उमेदवारो पास थया छे.
क्रम               नाम        मार्कस         मेरीट नंबर
(1) श्री ममताबेन डी गढवी - 277.33 - 60
(2) श्री डॉ.आशाबेन ऐम.गढवी -281.00 -48 राजकोट
(3) श्री कोमलबेन योगेश उधास - 271.60 - 6 - वीरपुर राजकोट
➡ ASI- पुरूष कुल 613 पास थयेल छे ते मांथी चारण समाजना नीचे मुजब उमेदवारो पास थया छे.
क्रम               नाम        मार्कस         मेरीट नंबर
(1) श्री जयदीप जी गढवी - 288.53 - 77
(2) श्री महेश बी गढवी - 246.73 - 77
(3) श्री लखमण ऐल गढवी - 283.87 - 183
(4) विक्रमदान ऐ गढवी - 284.77 - 159
(5) श्री पंकजकुमार ऐल गढवी - 277.40 -119
(6) श्री अरुणकुमार पी गढवी - 278.07 - 94
(7) श्री यशपाल ऐन गढवी - 280.47 - 32
(8) जगदेवसिंह जी चारण - 281.47 - 14 लुणावाडा
➡ ASI- स्त्री कुल 305 पास थयेल छे ते मांथी चारण समाजना नीचे मुजब उमेदवारो पास थया छे.
क्रम               नाम         मार्कस         मेरीट नंबर
(1) श्री चंद्रावलीबेन जी गढवी -239.67 - 93
(2) श्री निर्मळाबेन पी गढवी - 245.83 -46
(3) श्री अंजलीबेन ऐल गढवी - 235.13 - 3
(4) श्री अमृता योगेश उधास - 239.50 - 96 - वीरपुर राजकोट
➡ ऊपर ना लिस्टमां क़ोईनुं नाम रही गयुं होय / नाम के मार्कसमां भूल होय तो आ नंबर 9913051642 पर जाण करवा विनंती छे
➡ ऊपर ना लिस्ट वाला उमेदवारोना सरनामा अने मोबाईल नंबरनी माहिती जेना पासे होय ते आ नंबर-9913051642 पर जाण करवा विनंती छे.
➡ पास थनार  उमेदवारोने खूब खूब अभीनंदन

➡ आ माहिती खाली जाणकारी माटे छे तो कोईऐ खोटु अर्थघटन न करवा विनंती छे.
टाईप : - वेजांध गढवी
          (मोटा भाड़िया मांडवी कच्छ)
           9913051642
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6 सितंबर 2015

શિવ ને ભજો જીવ દિન રાત (શિવ-સ્તુતિ) - કવિ 'પ્રદીપ' ગઢવી

શિવ ને ભજો જીવ દિન રાત (શિવ-સ્તુતિ)
       - કવિ 'પ્રદીપગઢવી



છે શક્તિ કેરો સાથ જટા પર ગંગ બહે દિન-રાત,
ડાક-ડમરું ના ડમડમાટ શંખ ના નાદ કરે છે વાત.

                               શિવ ને ભજો જીવ દિન રાત...


કાર્તિક-ગણેશ શિવ ના બાળ ઉમૈયા અર્ધાંગીની નાર,
દશાનન ભજે શિવ ના નામ તેઓ પણ કરે છે એક જ વાત

                               શિવ ને ભજો જીવ દિન રાત...


શિવજી શોભે છે કૈલાશ ત્યાં વસે દેવો-ઋષિ-રાજ,
ચારણો નંદી ચરાવે ત્યાંજ કરે છે ચાર વેદ ની વાત,

                                શિવ ને ભજો જીવ દિન રાત...


કરે છે શિવજી તાંડવ નાચ દિગપાળો ના જુકતા હાથ,
જોઇને દેવો ફફડે આજ ભોળા ને વિનવે બેઉ હાથ,

                                શિવ ને ભજો જીવ દિન રાત...


હરિ ઓમ હર હર ના જ્યાં નાદ ત્યાં શશી-ભાણ ઉગે દિન-રાત,
તુજ વિણ દીપ "પ્રદીપ" ના વાત શિવ છો કણ કણ માં હયાત ,

                                શિવ ને ભજો જીવ દિન રાત...
     
     - કવિ 'પ્રદીપગઢવી...
   (રિ. રેંજ ફોરેસ્ટ ઓફિસર)
મુ. ધુનાનાગામ હાલે માંડવી-કચ્છ.



ટાઈપ બાય :- આલાપ પ્રદીપભાઈ ગઢવી માંડવી-કચ્છ.




ઉપર લખેલી શિવ-સ્તુતિ શ્રી પ્રદિપભાઈ ગઢવી દ્વારા લખાયેલી છે અને તેઓ પોતેજ તેનું સંગીત આપેલું છે અને પોતેજ ગાયેલી છે.


આ સાથે તેમના દ્વારા જ ગવાયેલી શિવ સ્તુતિ ડાઉનલોડ કરવા માટે Click Here

આપનો  પવિત્ર શ્રાવણ માસ  નો ચોથો  સોમવાર શિવ મહી બને અને ભોલેનાથ ની દયા હમેશાં તમારા ઉપર રહે એવી  શુભેચ્છા સહ તમામ ને જય માતાજી જય સોનલ.

CHARAN LOK GAYAK KUTCH-2015


5 सितंबर 2015

||• વૃંદાવન નો કૃષ્ણ કનૈયો •||- કવિ 'પ્રદીપ' ગઢવી

||• વૃંદાવન નો કૃષ્ણ કનૈયો •||
- કવિ 'પ્રદીપ' ગઢવી.
વૃંદાવન નો કૃષ્ણ કનૈયો માત યશોદા લાલ,
નટખટ ન્યારો ગાયું ચરાવે ગોપાલ.....
વન વાંસળી યું વાગે તારી સૌ ધ્યાન ધરે ,
શુદ્ધ બુદ્ધ ભૂલી ભાન સાથે સૌ કાન ધરે ,
સૂરનો સાધક નાચ નચાવે જગને તારે તાલ ,
નટખટ ન્યારો ગાયું ચરાવે ગોપાલ.....
ગૌ વર્ધન તું તોળ , તોળ ટચલી આંગળીએ ,
નાગ ને નાથ્યો જોર , નિર ચોખાં કર નદીએ ,
બ્રહમાંડ માં ને મુખ માં દેખાડ્યું પછી મરકે દિન દયાલ
નટખટ ન્યારો ગાયું ચરાવે ગોપાલ.....
નંદ બાવો બડભાગ ઈ ભોમપર નાથ રમે ,
ભોળો યોગી રૂપ તૃપ્ત આ ધર ને નમે
'પ્રદીપ'કેવું તુજ આંગણિ યું જ્યાં ભમતો ભડ ભૂપાલ ,
નટખટ ન્યારો ગાયું ચરાવે ગોપાલ....
• જન્માષ્ટમી પર્વની આપને થતા આપના પરિવાર ને ખુબ જ શુભેચ્છા •
|| જય શ્રી કૃષ્ણ ||

आई श्री सोनल चारण विसामो


आई श्री सोनल चारण विसामो@सिवील होस्पीटल माटे नी कायमी व्यवस्था माटे मकान आई श्री सोनल चारण विसामो@सिवील होस्पीटल माटे नी कायमी व्यवस्था माटे मकान अथवा प्लोट खरीदवा सहयोग माटे ता.07/07/2015थी शुभ शरुआत थयेल....अने अे शुभ शरुआत आपणा आदर्णिय बंधुश्री अेस.के.लांगा साहेब द्वारा  थयेल अत्यारे हमणां
जुनी बधी पोस्ट वांची अेटले फरी आप सौनी जाणकारी माटे लखुं छुं के
शरुआत मां 35,000 ₹ रुपीया थी अने पछी ओपनली जेटला रूपिया आपवा पडे अेटला आपवानी तैयारी साथे आपणे पासे घणा नाम उत्साहपृर्वक आव्या हता अे अंतरगत  हमणां नवेसर थी 51,000/- थी श्री सत्येनभाइ अने श्री कैलाशभाइ अे शरूआत करेल छे जुनु लीस्ट नीचे मुजब हतु अने हवे नवा नामो आपणे अेमां अेड करीये छीये.मित्रो आ उमदा अने अत्यंत आवश्यक काम माटे 100 जेटल चारण बंधुना सहयोगनी जरूर छे,आपणा चारण समाजना दुर दुरथी सिवीलमां सारवार अर्थे आवनार बिमार चारण बंधु अने अेमना सबंधीने रहेवानी सगवळ करी साचा अर्थमां सेवाना आ उमदा कार्यमां आपणे सौ सहभागी बनीये,हालमां भाडानी जग्या मां काम चलाउ सगवळ उभी करेल छे जेनो भरपुर उपयोग थइ रह्यो छे जग्या हवे खुबज नानी पडे छे घणीवार अेक साथे पंदर थी वीस चारण बंधु ना रोकाण वखते घणी अगवळ पडती होय छे.माटे नवुं मकान अने अे पण पोतानुं खरीदवानी ताती जरूरीयात छे.जे माटे पचास थी साइठ लाख रुपिया मां आपणी जरूरीयात मुजबनुं मकान मळी शके अेम छे.अेटले 51,000/-₹ ना 100  मेम्बर बनावीये तो आ काम शक्य बनी शके अेम छे.अत्यार सुधी आ जरूरी सेवाकीय प्रवाहमां जोडायेल बंधुनुं लीस्ट नीचे मुजब छे..आप सर्वे चारण बंधुने जय माताजी..मॉं सोनल कृपा ही केवलम.... ds
आई सोनल चारण विसामो@सिवील..
(1)श्री अेस.के.लांगा साहेब
(2)श्री घनश्यामभाइ मोड साहेब
(3)श्री दिलीपभाइ सिलगा
(4)श्री मुकेशभाइ विठु..(साणंद)
(5)श्री राजेशभाइ बादाणी..ICICI
(6)श्री हरेशभाइ जे. कुना..मुंबइ
(7) बेनश्री दमयंतीबेन अेम. बारोट
(8)श्री विक्रमभाइ डी. साउ (बेला)
(9)श्री बळवंतभाइ अेच. बाटी (ढेढाळ)
(10)श्री कैलाशभाइ के.रेढ (CA)
(11)श्री देवीदानभाइ गंगदासभाइ देवसुर (गांधीधाम कच्छ)
(12)श्री शक्तिदानजी बागदानजी आशिया (बाडमेर)
(13)श्री गोपालसिंहजी किनीया (जोधपुर)
(14)श्री सुरेन्द्रसिंहजी बारहट (करणी बेन्गल्स)
(15)श्री सत्येनभाइ वरसडा (अमदावाद)
जय जय मॉं करणी..बंधु..
जय जय मॉं सोनल..बंधु..
पोस्ट टाईप :-
दिलीप सिल्गा..9825005224
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