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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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Notice Board


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29 नवंबर 2017

जयदेव बचुभाई गढवी

ॐ शांति....

*छंद छटा ने सपाखरां, हुती सादुळी हेव*
*जिव ने घ्रहको जोगडा, जातां तुं जयदेव*

हे जयदेव छंद अने छपाखरां नी छटा अजोड हुती तमणां कंठ मां..ए कंठ अने केहणी नो कसब आज फानी दुनिया त्यजी जतां जीव ने ध्रहको पड्यो छे...भगवान ए चेतना ने चिर शांति आपे...

*ॐ शांती...*

28 नवंबर 2017

अखिल कच्छ चारण समाजना दरेक सैनिको सन्माननो कार्यक्रम योजाशे कच्छमित्रमां रमेशभाई गढवीनो अहेवाल

अखिल कच्छ चारण समाजना दरेक सैनिको सन्माननो कार्यक्रम योजाशे कच्छमित्रमां रमेशभाई गढवीनो अहेवाल

Application for searching your name in voter list

Application for searching your name in voter list

General Assmbly Election-2017

An application for searching your name in voter list is prepared by chief Electoral Officer,Gandhinagar

Please Download the app for searching your name in voter list and forward this link in all your group. so that they can search their name in voter list.

Download App ::- Click Here

25 नवंबर 2017

कवि काग वंदना रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.                  *कवि काग वंदना*
.       *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*

कोटी कोटी वंदन छे दुल्ला काग ने, धऩ्य मां धाना ने धन्य भाया बड भाग्य रे...
कुळ वंत कोडीला....
कोटी कोटी वंदन छे दुल्ला काग ने...टेक

कलम तिरे विंधाय अमांणाय काळजां.
साद मां जांणे घुघवे सायर सात रे...सावज सादुळा...
कोटी कोटी वंदन छे दुल्ला काग ने...01

चार चारे परज्युं ना चाहेय चारणो...
मांनतां सगा विर सुं सोनल मात रे...देवरूप दूलारा...
कोटी कोटी वंदन छे दुल्ला काग ने...02

मोभ हिपो हो के हो मोहन मात्यमा...
वात विनोबा नी विहरे नई विदवान रे....मजादर ना मोभी...
कोटी कोटी वंदन छे दुल्ला काग ने...03

क्रोड गुना आखी नात्य खातेय जे कीधा
जीव ऋषी भड़ ज्वारीयें जोगीदान रे..धान बाई ना धावण..
कोटी कोटी वंदन छे दुल्ला काग ने...04

🙏🏻🌞🙏🏻🌞🙏🏻🌞🙏🏻🌞🙏🏻

कर्ण नी वेदना

.                  *कर्ण नी वेदना*
.           *रचना: जोगीदान चडीया*        

कुंता आवुं सिखव्युं कूने...माडी केम त्याजीयो मुंने ...टेक

खुब हेते थी खोलतो ज्यां हुं, मां केहवा ने मूख
त्यागीयो जांणींन तुटतुं हैयुं, दोयलुं थातुं दूख
आंख्युं नाय आंहुडे उने, माडी केम त्याजीयो मुंने 01

नीर व्हेता मां नाखतां मुंने, हैयु हाल्युं केम हें..
जरुर हती मारे जननी तारी,तोय, तरतो मेल्यो तें
केने तें भरोंहे कुने, माडी तेदी त्याजीयो मूने..02

हुतो एवो शुं बोल हेताळी, व्हालसोई मुज वांक
बोलवा ना मुंने होंश नोता बा, मारी, उघडी नोती आंख
तोये हवे शुं कहुं तूने, माडी केम त्याजीयो मुंने 03

आखरी टांणे तुं आंगणे आवी, मोत देवा सीद मात
जोखमाशे जोगीदान जनेता, वांचशे जो कोई वात
गती कीध आम शुं गूने, माडी केम त्याजीयो मुंने.04

रचना: जोगीदान गढवी (चडीया) 9898 360 102

आंगणा

.                 *|| आंगणा ||*
.    *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*

अमने याद आव्यां ए आंगणां रे....(02)
हे रमता भमता ज्यां दन रात,
व्हाली लागे ई वतन वात...अमने याद आव्यां घर आंगणारे..टेक

आंगणे गार गोरमटी नो ओटलो रे..
मावडी ना हाथनो उनो उनो रोटलो रे
शिळी ओली ढळती लिंबडा नी छांय
कोई मने वढतूं ना जियां कांय...अमने याद आव्यां ए आंगणां रे...01

भात लई हालती ए भतवारीयुं रे
चार नुं हारे  दातरडुं ने चारीयुं रे..
लाव लई कर्यां गलुडीयां ने लाड
विहरुं केम ई थोरीया नी वाड...अमने याद आव्यां ए आंगणां रे...02

ओहरी नी गेर्य पर बेही ने गावता रे
पाडरु ने भेहुं ने ढाळीया मां पावता
पाघडी जेनीते  बगला नी पांख
याद एनी आवतां भिंजाणी आंख...अमने याद आव्यां ए आंगणां रे...03

डेलीये डाया मांणह ना डायरा रे
वातडी सांभळे थोभी ने वायरा रे
छोकरां समजे वात नीय सान
जीव ने व्हालां ई  जोगी दान ...अमने याद आव्यां ए आंगणां रे...04

मोगल तारो आशरो

.          *|| मोगल तारो आसरो||*
.   *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
.     *ढाळ: ठाकर अमुं मेल्य मां ठेली*

लोबडीयाळी पाय हुं लागुं, पाळे मां उतारीये पागु,
जोगण नां जाप थी जागुं, मोगल तारो आशरो मागुं....टेक,,.

लाख गुना तारा लाल ना माडी, लेखती नई लाजाळ
जाय तारा वींण जोगडो क्यां मां, बाई हुं नानो बाळ
भेळीया नी ओथ मां भागुं, मोगल तारो आसरो मागुं...०१

सामटा वेरी आवता छो ने, थडको ना उर थाय
भरोहे तारो भेळीयो भाळ्यो, कंपती वेरी नी काय
खेधाळीय खेलती खागुं, मोगल तारो आसरो मागुं...०२

रेम जाया पर राखजे रूडी, पाप मां दउं नई पाय
चुकींये नई मां ध्रम चारण नो, जीव भले आ जाय
तुंने जोई देह आ त्यागुं,मोगल तारो आसरो मागुं...०३

गाम गोकळ ने गोंदरे माडी, कोक दी थाजे कान
महा रासो मारी मावडी मंडे, जोउं हुं जोगी दान
वांसलडी जेम हुं वागुं, मोगल तारो आसरो मागुं...०४

रचना : जोगीदान गढवी (चडीया) 9898 360 102

सरवाळो

.                    *सरवाळो*
.    *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*

करम नव कोय ने मेले..सरवाळो ई मांडतु छेले....

वात डायो वन हालीयो मोभी, संग मां सीता सेंण
अंधा अंधी ना ई अंत वेळाये , विर सांभरीयां वेंण
दशरथ ने राज ने डेले...सरवाळो वागीयो छेले..01

पग झालीने पछाडीयां भींते, जे बेनडी केरा बाळ
ऐ देवकी कुंखे देव पधार्यो, कंस नो थावा ने काळ
वासुदेव वंश ने वेले..सरवाळो मांडीयो छेले..02

पोगीयां प्रांचीने पिंपळे पापो, कृष्ण ने रूप किरात
भव वित्या तोय विंधती भाले, वाली मार्यो ई वात
ठाकर पाछी केमनी ठेले..सरवाळो आवतो छेले..03

निकळे जे कंई नांभीये थी ई.. आतमामा अथडाय
जुग जातां जोगीदान न जातां, होय आशिस के हाय
खोटा शिव खेल न खेले, सरवाळो मांडता छेले..04

*रचना: जोगीदान गढवी (चडीया) मो.नं. 9898  360 102*

23 नवंबर 2017

मोटा भाडिया चारण समाज जोग संदेश

*मोटा भाडिया चारण समाज जोग संदेश*

*प.पू. आईश्री सोनल मां 95 मो प्रागट्य पर्व सोनल बीज ना दिवसे सरस्वती सन्मान राखवामां आवेल छे*

*शिष्यवृति मेळववा माटे लायकात*
*--------------------------------------*

🔹S.S.C मां 65 % 

🔸H.S.C सामान्य प्रवाह मां 65 %

🔹H.S.C विज्ञान प्रवाह मां 60 %

🔸कोलेज/मास्टर डीर्गी/अन्य कोर्ष मां वर्षना अंतिम सेमेस्टरमां -  60 %

🔹अन्य क्षेत्रे विशेष उपलब्धी (रमत, के अन्य)

*ऊपर मुजब नी लायकात धरावता विधार्थीओ ता.10-12-2017 सुधी मां  परीणामनी प्रमाणित नक़ल  नीचेना सरनामे आपी जवी*

सरनामुं
(1) श्री सोनल जनरल स्टोर मोटा भाडिया

(2) श्री लक्ष्मी ट्रेडर्स मोटा भाडिया

   *मोटा भाडिया चारण समाज*

      *🙏वंदे सोनल मातरम् 🙏*

आईश्री सोनल मानो प्रागटय पर्व सोनल बीज मांडवी-कच्छ

आईश्री सोनल मानो प्रागटय पर्व सोनल बीज मांडवी-कच्छ
sonalbij mandvi-kutch

21 नवंबर 2017

कच्छ चारण समाज जोग संदेश

कच्छ चारण समाज जोग संदेश
श्री अखिल कच्छ चारण सभा मांडवी-कच्छ
आईश्री सोनल बीज उत्सव चेरीटेबल ट्रस्ट मांडवी कच्छ

प.पू. आईश्री सोनल मांनो 95 मो प्रागट्य पर्व सोनल बीज ना दिवसे नीचे मुजब शिष्यवृति आपवामां आवशे.

शहिद वीर माणशी गढवीनी स्मृतिमां S.S.C मां प्रथम आवनारने शिल्ड - अखिल कच्छ चारण सभा तरफ थी
श्री कैलाशदान करणीदान गढवी तरफथी रनींग शिल्ड तमाम विधार्थीओने
श्री निरंजनबापु ऐज्यूकेशन चेरीटेबल ट्रस्ट तरफथी शिष्यवृति

शिष्यवृति मेळववा माटे लायकात

--------------------------------------


S.S.C मां 75 %
H.S.C सामान्य प्रवाह मां 75 %
H.S.C विज्ञान प्रवाह मां 70 %
कोलेज/मास्टर डीर्गी/अन्य कोर्ष मां वर्षना अंतिम सेमेस्टरमां

सामान्य प्रवाह मां -  70 %
विज्ञान प्रवाह मां - 65 %

आई.टी.आई, BCA, BBA, MCA, डीर्गी, डिप्लोमां... वगेरे मां 70 %

आ उपरांत रमत-गमत, संगीत, वगेरे क्षेत्र मां ख़ास उपलब्धि मेळवेल

वर्तमान तेमज भूतपूर्व सेना मां फरज बजावता चारण समाजना भाईओ नो सन्मान करवामां आवशे जेथी बोर्डिंगना कार्यालयमां माहिती मोकलवा नम्र विनंती

➡ ऊपर मुजब लायकात धरावता विधार्थीओ ऐ नीचेना सरनामे रुबरू अथवा टपाल द्रारा मोकली आपवुं.
(1) नाम सरनामा साथेनी सादी अरजी
(2) परीणामनी प्रमाणित नक़ल 
(3) बोनोफाईट सर्टीफिकेटनी नक़ल

ख़ास नोंध ::- सहप्रमाणीत नकल चालशे नही अने वर्षनूं अंतिम सेमेस्टर ध्यानमां लेवामां आवशे

अरजी मोकलवानी छेल्ली तारीख :- 10/12/2017

सरनामुं

श्री लक्ष्मण राग चारण बोर्डिंग लायजा रोड मांडवी कच्छ
पीन कोड 370465
02834223698


वधारे माहिती माटे :-

नागाजणभाई - 9879444802


गढवी विजयभाई करशनभाई - प्रमुखश्री अखिल कच्छ चारण सभा

बारोट भीमशीभाई काकुभाई - मंत्रीश्री

गढवी कानजीभाई वालजीभाई -प्रमुखश्री 

गढवी कानजीभाई जेठाभाई - उपप्रमुखश्री
आईश्री सोनल बीज उत्सव समिति


      वंदे सोनल मातरम् 

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क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहट्ट (चारण)

क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहट्ट (चारण)


केसरी सिंह बारहठ (२१ नवम्बर १८७२ – १४ अगस्त १९४१) एक कवि और स्वतंत्रता सैनानी थे। वो भारतीय राज्य राजस्थान की चारण जाति के थे। उनके पुत्र प्रतापसिंह बारहठ भी भारतीय क्रान्तिकारी थे।

जन्म

उनका जन्म २१ नवम्बर १८७२ को शाहपुरा रियासत के देवपुरा नामक गाँव में हुआ। उनके पिता का नाम कृष्ण सिंह बारहठ था[3] और उनकी माता बख्तावर कँवर का निधन उनके बाल्यकाल में ही हो गया था। दैव-योग से मातृ-विहीन शिशु की दादी माता श्रृँगार कँवर के स्तनों में ग्यारह वर्ष बाद सहसा दूध का संचारन होने से उन्हीं के द्वारा पालन-पोषण किया गया। ऐसे ममत्व-भरे प्रबुद्ध आँचल के शाये में पलने वाले शैशव में सद्-संस्कारों का उन्नयन स्वभाविक ही हो गया।


शि़क्षा

छः वर्ष की आयु में केसरी सिंह की शिक्षा शाहपुर में महन्त सीताराम की देख-रेख में प्रारम्भ हुई। दो साल बाद कृष्ण सिंह ने उदयपुर में काशी से एक विद्वान पंडित गोपीनाथ शास्त्री को बुलाकर केसरी सिंह की औपचारिक शिक्षा-दीक्षा संस्कृत परिपाटी में आरंभ करायी। उस समय के उत्कृष्ट बौद्धिक माप-दण्ड के अनुसार केसरी सिंह ने पूरा 'अमर-कोश' कण्ठष्थ कर लिया था। केसरी सिंह ने संस्कृत एवं हिन्दी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं बंगला, मराठी एवं गुजराती का भी पर्याप्त अध्ययन किया। ज्योतिष, गणित एवं खगोल शास्त्र में भी उनकी अच्छी गति थी

बंदी जीवन 
ठाकुर केसरी सिंह का देश के शीर्ष क्रांतिकारियों- रासबिहारी बोस, मास्टर अमीरचन्द, लाला हरदयाल, श्यामजी कृष्ण वर्मा, अर्जुनलाल सेठी, राव गोपाल सिंह, खरवा आदि के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध था। सन् 1912 में राजपूताना में ब्रिटिश सी.आई.डी.द्वारा जिन व्यक्तियों की निगरानी रखी जानी थी उनमें केसरी सिंह का नाम राष्ट्रीय-अभिलेखागार की सूची में सबसे ऊपर था। केसरी सिंह को शाहपुरा में ब्रिटिश सरकार द्वारा दिल्ली-लाहौर षड्यन्त्र केस में राजद्रोह, षड्यन्त्र व कत्ल आदि के जुर्म लगा कर 21 मार्च 1914 को गिरफ्तार किया गया। जिस दिन केसरी सिंह को गिरफ्तार किया गया उसी दिन से उन्होंने अन्न-त्याग दिया। उन्हें भय था कि गुप्त बातें उगलवाने के लिए पुलिस कोई ऐसी चीज न खिला दे जिससे उनका मस्तिष्क विकृत हो जाय। इस प्रण को उन्होंने पाँच वर्ष तक जेल-जीवन में निभाया। उन्हें कई-कई दिन, रात-रात भर सोने नहीं दिया जाता था। सरकार किसी प्रकार केसर सिंह के विरुद्ध राजनीतिक उद्धेश्य से की गयी हत्या का जुर्म साबित कर उन्हें फाँसी देना चाहती थी। अन्त में केसरी सिंह को 20 साल के आजीवन कारावास की कठोर सजा हुई। इस प्रकार केसरी सिंह को केवल २० वर्ष का आजन्म कारावास ही नहीं हुआ, उसके समूचे परिवार पर विपत्ती की दुहरी मार पड़ी। शाहपुरा राजाधिराज नाहर सिंह ने ब्रिटिश सरकार को खुश रखने के लिए उनकी पेतृक जागीर का गांव, विशाल हवेली एवं चल-अचल सम्पत्ति भी जब्त कर ली। घर के बर्तन तक नीलाम कर दिये गये। सारा परिवार बेघर - बार होकर कण-कण की तरह बिखर गया।

अंतिम प्रयाण 

सन् 1941 के अगस्त के प्रारम्भ में केसरी सिंह जी ज्वराक्रांत हुये। कोटा राज्य के पी.एम.ओ डॉ विद्याशंकर की देखरख में उनका इलाज हो रहा था डॉ अब्दुल वहीद उनके पारिवारिक डॉक्टर थे। ९ अगस्त को कवीन्द्र रवीन्द्र नाथ ठाकुर के देहावसान का रेडियो में समाचार सुनने के बाद जब डॉक्टर अब्दुल वहीद उन्हें देखने आये तो कहा "ठाकुर साहब, आज एक बहुत रंज का समाचार लाया हूँ- रवीन्द्र नाथ ठाकुर नहीं रहे।" यह सुनकर सहज ही उनके मुँह से निकल पड़ा- अब कवी दरबार ऊपर ही लगेगा और पाँच दिन बाद सचमुच ही वह समय आ गया। अंतिम बीमारी में वे केवल अपनी बड़ी पौत्री राजलक्ष्मी के हाथ से ही दवा या पानी लेते थे। राजलक्ष्मी के उस समय के संस्मरण इस प्रकार हैं - "बीमारी के अंतीम सात दिनों में दाता निरंतर गीता और उपनिषदों के श्लोक ही बोला करते थे। किसी से भी वार्तालाप नहीं करते थे। उस दिन 14 अगस्त को साढे ग्यारह बजे हमने वैद्य चंद्रशेखर जी के कहने से कमरे के खिड़की दरवाजे बंद कर परदे लगा दिये थे। बाहर वर्षा हो रही थी । कमरे को इस प्रकार बंद देखकर उन्होंने मुझे कहा - खिड़की दरवाजे बंद क्यों किये हैं? इन्हे खोल दो। क्या तुम सोचते हो कि केसरी सिंह को जाने से यह रोक सकेंगे? फिर अपने पलंग के सामने दीवार पर टंगे हुये उनके पिताश्री की फोटो की और इशारा कर उसे लाने को कहा। मैंने चित्र उतार कर उन्हे दिया। कुछ देर तक वे टक टकी लगाकर चित्र को देखते रहे, उसे आँखों और सर पर लगाया उसके बाद यह प्राचीन दौहा उनकी वाणी से निकल पड़ा


कहाँ जाये कहाँ ऊपने, कहाँ लड़ाये लाड।
का जाने केहि खाड में, जाय पड़ेंगे हाड॥



शहीद प्रतापसिंह बारहट्ट (चारण)



उनका जन्म राजस्थान के उदयपुर में हुआ थे। वे केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। प्रारंभिक शिक्षा कोटाअजमेर और जयपुर में हुई। क्रांतिकारी मास्टर अमीरचंद से प्रेरणा लेकर देश को स्वतंत्र करवाने में जुट गए।

वे रासबिहारी बोस का अनुसरण करते हुए क्रांतिकारी आन्दोलन में सम्मिलित हुए। रास सिंह बिहारी बोस का प्रताप पर बहुत विश्वास था। ३ दिसम्बर १९१२ को लॉर्ड हर्डिंग्स पर बम फेंकने की योजना में वे भी सम्मिलित थे। उन्हें बनारस काण्ड के सन्दर्भ में गिरफ्तार किया गया और सन् १९१६ में ५ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हुई। बरेली के केंद्रीय कारागार में उन्हें अमानवीय यातनाएँ दी गयीं ताकि अपने सहयोगियों का नाम उनसे पता किया जा सके किन्तु उन्होने किसी का नाम नहीं लिया। ७ मई १९१८ को जेल में ही उनकी मृत्यु हो गई। बरेली जेल में चार्ल्स क्लीवलैंड ने इन्हें घोर यातनाएं दी ओर कहा - "तुम्हारी माँ रोती है " तो इस वीर ने जबाब दिया - " में अपनी माँ को चुप कराने के लिए हजारों माँओ को नहीं रुला सकता। " और किसी भी साथी का नाम नहीं बताया।

20 नवंबर 2017

सोनल युवक मंडल बनासकांठा

जय सोनल करणी
सोनल युवक मंडल बनासकांठा का वार्षिक  स्नेहमिलन  समारोह  दिसम्बर  2017 को हे तो सभी  स्व  जातीय  बंधु   ओ को सूचित  किया  जाता  हे की हर शाल की तरह ये शाल भी जिन  स्व जातीय बंधू को जनवरी  2017 के बाद  सरकारी  नौकरी  लगी  हो वे  और कोई विशेष  उपलब्धि  हासिल  की हे वो और स्टैण्डर्ड  7 से ग्रेजुशन  तक  70% और इनसे  ज्यादा  अंक   प्राप्त   किया हो वो अपना  सर्टिफिकेट  की ज़ेरॉक्स  कॉपी  और पूरा बायोडेटा  निचे  दिए  गए  पते  पर दिनाक 15-12-17  तक बाय पोस्ट  भेजे  स्नेहमिलन समारोह के दिन  कोई डॉक्यूमेंट  स्वीकार  नहीं किया जायेगा  और समारोह के दिन हाजर रहना  अनिवार्य  होगा 
अधिक  जानकारी  के लिए निचे दिए गए फ़ोन पर संपर्क  करे

Address :  जे .डी.गढ़वी
कर्णावती  शॉपिंग  सेण्टर ,भरमाणी रेस्टोरंट  के ऊपर , अमदावाद  हाईवे  ,पालनपुर 385001 बनासकांठा गुजरात 
9426704475

(2) ऐम.डी.गढ़वी (advocate)
     9 , करणी कृपा  ,सोनल सोसाइटी  , सुखबाग  रोड  , पालनपुर 385001 बनासकांठा गुजरात
9979744788

9408279366, 9426066415,9723815467, 9825098755, 9414609192,7737095071,9426595351, 9413502047

मोटी खाखर चारण समाज आयोजीत सोनलबीज निमिते रमतोत्सव-2017

मोटी खाखर चारण समाज आयोजीत सोनलबीज निमिते रमतोत्सव-2017

मोटी खाखर चारण समाज नी युवा टीम द्रारा उमदा अने प्रेरणादाई प्रयास

सामाजीक ऐकता विकासनी पाराशीशी - कच्छमित्र मां करशनभाई गढवीनो अहेवाल

सामाजीक ऐकता विकासनी पाराशीशी - कच्छमित्र मां करशनभाई गढवीनो अहेवाल


19 नवंबर 2017

वरदाळी ने वंदना - संकलन - संपादन चारण नामलबाई राणाभाई गामणा (वाचा)

प्राचीन अर्वाचीन गरबाओ, चरज, भावगीत तेमज माताजीना छंदो अने भजननो संग्रह
वरदाळी ने वंदना

संकलन - संपादन

चारण नामलबाई राणाभाई गामणा (वाचा)

कुल पाना - 128

आज रोज ता.19/11/2017 ने मागशर सुद-1 (ऐकम) ने रविवार ना रोज सवारे 5:30 श्री नामलबेन राणाभाई गामणा (गढवी) रामचरण पामेल छे अने तेमना द्वारा संकलन-संपादित  पुस्तक
"वरदाळी ने वंदना"

ई-बुक स्वरूपे चारणी साहित्य पर मुकवा अने कायमी सम्भारणा रुपे आजे तारीख 19-11-2017 ना देवलोक पाम्या होय तो  तेओ श्री नामलबाई राणाभाई गामणा नी पुण्य स्मरण यादि स्वरूपे आ पुस्तक तेमना पुत्र

श्री किशोरभाई राणाभाई गामणा (वाचा) मूल गाम माड़ी हाले जलाराम ट्रासपोर्ट राजकोट तरफ थी मळेल  छे




सौजन्य
श्री किशोरभाई राणाभाई गामणा (गढवी)
गंगोत्री पार्क-2, रेल नगर मेईन रॉड, राजकोट
मो :-  98253 25480


"वरदाळी ने वंदना" पुस्तक  डाउनलोड करवा माटे ::- Click Here

श्रध्धा सुमन दोहो

तू जननी तू जगदम्बा, तू इस्वर ने तात,
विहरि पण विसराय ना,माड़ी नामल मात,


स्मरण अने सत संग ना,ते तो अमि पाया आई,

ई संस्कृति सँस्कार ने,तारा बाळक भूले न बाई,


परमकृपाळु परमात्मा ऐमना दिवंगत आत्माने शांति आपे ऐवी मां भगवती पासे प्रार्थना

 

कच्छ जील्ला कक्षानुं युवा महोत्सव-2017

कच्छ जील्ला कक्षानुं युवा महोत्सव-2017
_____________________________

युवा अने सांस्कृतिक विभाग गांधीनगर अने जील्ला रमत-गमत कचेरी भुज-कच्छ द्रारा     ता.19-11-17 ना रोज गांधीधाम -कच्छ  खाते 50 मो जील्ला कक्षानो युवा महोत्सव-2017-18  नो आयोजन करवामां आवेल.

युवा महोत्सव-2017 मां कच्छ चारण-गढवी समाजना युवानो नीचे मुजबना विजेता थई समाजनुं गौरव वधारेल छे.

प्रथम नंबर विजेताओ
क्रम      स्पर्धानुं नाम         विजेतानुं नाम
1           लोकवार्ता       -   करशन नाराण गढवी - मोटा भाडिया मांडवी कच्छ
2           लग्न गीत      -   सावित्रीबेन माणशीभाई गढवी (अंजार)
3           भजन            -   आशिष हरीशभाई गढवी (मांडवी)
4           ढोल              -   महेश पालुभाई गढवी (काठडा )
हळवुं कंठय संगीत - प्रशांत बी. गढवी (सागर) - गांधीधाम

प्रथम नंबरे विजेता थयेल तमामने खूब खूब अभीनंदन अने प्रदेश कक्षाऐ पण सफळता प्राप्त करी समाज अने पोताना परिवारनो नाम रोशन करो ऐवी मां भगवती पासे प्रार्थना

➡ हजी कोईना नाम रही गया होय के नाममां भूल होय तो आ नंबर 9913051642  पर जाण करवा नम्र विनंती छे.

आ माहिती आपवा बदल श्री करशनभाई नाराणभाई  नो खूब खूब आभार

जाडवा जुकी नित केछे रे रचना कीशोरदान सुरु

जाडवा जुकी नित केछे रे

(राग) माताजी कहे बीवे मारो

जाडवा जुलीने जुकी नित केछे रे नमे ई गमे नाथने रेजी

जाणवा जेवु छे जाडे। मन राखी माळे रे
एजी. द्रष्टीमा राखो दाडे दाडे रे नमेई गमे नाथने रेजी

शीतल आपेछे छांयो, आंगणे गमेते आयो रे
एजी. भेद भीतर कदी नव भाळ्यो रे नमेई गमे नाथने रेजी

उभा कोई अडीने आभे, मेरु सम मपाई ना वांभे
एजी. छता खलक सरखो छे एने खांभे रे नमेई गमे नाथने रेजी

खंत राखी हाडथी खीले, भावना ई सौनी जीले रे
एजी. रागद्वेश लवलेश नही दीले रे नमेई गमे नाथने रेजी

उंच नीच शुछे आमा, आडोने अवळो थामा रे
एजी कालजे कीशोर के रटय नीत रामा रे नमेई गमे नाथने रेजी

रचना कीशोरदान सुरु

चारण समाजनुं गौरव :- पूर्व कच्छ खेल कुद मां प्रथम नंबर

चारण समाजनुं गौरव :- पूर्व कच्छ खेल कुद मां प्रथम नंबर

नाम :- वंदना हरीभा गढवी

*खूब खूब अभिनंदन*

18 नवंबर 2017

|| रवेची प्रशस्ति || कवि धार्मिक जासिल "मयूख" रचित

*|| रवेची प्रशस्ति ||*
जड चारण तनया जठे, बाक लोक बिसराय
कुलदेवी गावै कुकवि, रिझो पद्य रवराय
*(छंद दुर्मिला)*
रट नाम समान सुराग रम्मनिय दख्ख दम्मनिय
रख्ख रती
अळ कंथ अनंत हथी कथ मंत्र तुरंत हरंत बिकट्ट खती
कुळदेवि नराकिय पुज्य पराकिय हाक बुराकिय बाक कडी
रवराय रमम्मम् पाल परम्मम् बाल बरंगिय द्रग्ग बडी
बरकत्त सुकार्य करत्त समर्थ कुकार्य सुपत्त दुपत्त करे
व्रत भंग अमंगल तंग तरत्त विकार दुकारणको विफरे
नहि एक तरफ्फिय सर्व सरफ्फिय मात मुरब्बिय पीड लडी  
रवराय रमम्मम् पाल परम्मम् बाल बरंगिय द्रग्ग बडी
रज गाम रवक्किय खंड नवक्किय संग सवक्किय हैक हुई
लगि अंग उमंग समान तुरंग जुधारण जंग बजाय तुई
वरदायक संकट आय कपायक पाय उपायक जाय पडी
रवराय रम्म मम पाल परम्मम् बाल बरंगिय द्रग्ग बडी
नभ मध्य चमक्क सुशोभ रही फहरक्क फरक्क धजा प्रछटी
रवआलय कालय ईम कटे ग्रह सर्व लगे जिम जाय वटी
अब आखर चाड सुणावत आपत जाय हवे हण चाड चडी
रवराय रम्म मम पाल परम्मम् बाल बरंगिय द्रग्ग बडी
*-कवि धार्मिक जासिल "मयूख" रचित*

जीवणभाई गढवी

जीवणभाई गढवी

झरपराना पुस्तक प्रेमी आशानंदभाई गढवीने अनोखो शोख - अहेवाल माणेक गढवी

झरपराना पुस्तक प्रेमी आशानंदभाई गढवीने अनोखो शोख - अहेवाल माणेक गढवी

17 नवंबर 2017

आवडमानो भाव रचना कीशोरदान सुरु

आवडमानो भाव

(राग) सुना समदरनी पाले

ए. आवडने आसरे जाये रे, जईने मा नमीये पाये रे
माथे ओढी भेड़ियो माडी, खबरु लेसे मात खमकारी रे
आवडमा अनंत उपकारी रे

ए. खलकमा ख्यात छे बानु रे, अटकाव्यो आभमा भानु रे
बांध्यो बाई लोबडी छेडे। वीर उगायोँ वीख विदारी रे
आवडमा अनंत उपकारी रे

ए. शोभे तेज टीलडी भाले रे,
आभा जाणे प्रसरी हाले रे
रमवा रास नीशरी अंबा, शोलशजी मा राज़ राजेश्वरी रे
आवडमा अनंत उपकारी रे

ए. दयाभरी दीलमा माजी रे, रेजे तु अमपर राज़ी रे
आजो छे  एक तीहारो समरता देजे साद सुखकारी रे
आवडमा अनंत उपकारी रे

ए. जनमी जग प्रसीध्ध मादानी रे
उजाळी नात कुल अवनी
रे
कीशोर भाव भावथी गावे, आपजे आशीष मात अविकारी रे
आवडमा अनंत उपकारी रे

रचना कीशोरदान सुरु

16 नवंबर 2017

चारण समाजनुं गौरव - शूंटिग मां श्वेतलबेन गढवी त्रण मेडल

चारण समाजनुं गौरव - शूंटिग मां श्वेतलबेन गढवी त्रण मेडल

माडी तारा डुंगरीऐ - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

माडी तारा डुंगरीऐ - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

क्यु न समझ रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

क्यु न समझ रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

Digital Gujarat Online Scholarship Registration-2017

Digital Gujarat Online Scholarship Registration-2017

Last Date :- 15-12-2017

वधारे माहिती माटे ::- Click Here

14 नवंबर 2017

चारण समाजनो गौरव :- राष्ट्रीय कक्षानी कबड्डी कन्या टीम मां पसंदगी

चारण समाजनो गौरव :- राष्ट्रीय कक्षानी कबड्डी कन्या टीम मां पसंदगी

राष्ट्रीय कक्षा नी कबड्डी कन्या गुजरात नी टीम मां कच्छ जील्ला मांथी मोटा भाडिया प्रा.शाळा (ता.मांडवी-कच्छ) नी 2 विधार्थीओनी राष्ट्रीय कक्षानी रमत माटे पसंगदी थयेल छे

(1) सभाईबेन वाछीया गढवी (बांढा)

(2) जयश्रीबेन खेंगार गढवी (तुरीया)

राष्ट्रीय लेवलनी रमत रमवा माटे राज्यनी टीम मां पसंद थयु ऐ बहु ज मोटी उपलब्धी छे

खूब खूब शुभेच्छाओ

मोटा भाडिया प्राथमिक शाळाना समग्र स्टाफ ने खूब खूब अभिनंदन

13 नवंबर 2017

कां झघडे छे?? - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

कां झघडे छे?? - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

पाणीनो परपोटो काया - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

पाणीनो परपोटो काया - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

चारण परीवार

चारण परीवार ना दरेक सभ्य ने
आ लेख खास वाचवा विनंती

चारण परीवार नी ऐक संस्था बनावी छे
( वृध्धा आश्रम ) पण आ नाम न सारु लागे ऐटले आपणे
" चारण परीवार " नाम थी ओडखीये

" चारण परीवार " संस्था मा
निराधार,
निसहाय ,
वृध्ध मावतर,
निसहाय, बाळको,
त्यकता (विधवा बहेनो)
निसहाय भाई ओ नो पण समावेश करशु

पण आ बधु अधुरु छे आप सव ना साथ,सहकार,सहमती,अने मदद विना

आपणा समाज मा ऐवा घणा घर छे
जयां आथीँक तकलीफ होय।
घर ना सभ्यो वधु होय।
अने
कमावनार ऐकज होय समाज ना घणा घर दुबडा छे।
ऐवा दुबडा घर ने सहमत करीये। संस्था मा जोडावा।

आप सव ने ऐम नथी लाग तु के
ऐ लोको पण सध्धर थाय
सुखी थाय
बाळको ने सारु भणावी शके ,
परीवार ने सुख आपी शके।

पण दरेक व्यकती  ऐमज विचारे छे के अमारा  मावतर। भाई बहेन।
निराधार आश्रम मा न जाय।

आपणे आज विचार ने मन मांथी ने समाज मांथी नाबूद करवो छे।
ने आगळ आवु छे।

आपणे ऐक संस्था बनावीये जेमा आपणा समाज माथी सव जोडाय।

आपणे ऐम मानीये छी के आपणा समाज माथी कोय दिकरा दिकरी मावतर ने निराधार आश्रम मा मुकवा नो जाय।
पण आपणे कया सवेँ कयोँ छे ?
ऐकवार दरेक व्यकती तमारी आस पास ना ,निराधार आश्रम मा तपास करजो 100 मांथी 10 दिकरा ना मावतर तो मळशे ज।

पण आपणे ऐम नय विचार करवा नो के मावतर ने निराधार आश्रम मा मुकवा?
आवोज विचार करशु तो
जे जे व्यकती ने घरना कोय पण  व्यकती ने  " चारण परीवार " ( निराधार आश्रम )मा मुकवा हसे ते व्यकती आगळ नय आवे।
आपणा मा अहंम ( ईगो )आडो आवे छे
अहंम ने दुर करीये ने सव ने मदद करवा माटे प्रेरणा आपीये ।

ऐटला माटे ज कहिये छी के आपणा समाज माटे।
चारण परीवार ट्रस्ट, ( संस्था निराधार आश्रम ) बनावीये
जे पण व्यकती ने आमा जोडावु होय।
मदद करवी होय।
साथ सहकार आपवो होय। ते लोको आपणी संस्था मा जोडाव।

माफ करशो अमारा थी वधारे लखाय के कहेवातु होय तो

पण आ हकीकत कव छुं आपणे हवे माताजी नी सेवा पुजा
भजन भाव भेळीया
संतवाणी बहु करीया
माताजी ना मंदिर वाडी
घणा बनाव्या छे

कइ केटला विस्तार मा जग्या रोकाण छे
गामे गामे समाज वाडी छे
विसामो छे
बोल्डींग पण छे
पण मंदिर नानु ने जग्या मोटी छे
पण ऐ जग्या मा निराधार निसहाय वृध्ध मावतर ने माटे थई ने समजा सेवा संस्था तरफ थी कोय जग्या नथी

माफ करशो
पण
माताजी ना मंदिर (जग्या) बनावा करता निराधार निसहाय वृध्ध मावतर माटे थई ने ऐक संस्था  (आश्रम )बनावा मा आवे तो बव सारु

घणा घर ने आथीँक तकलीफ वाळा ने मदद मळी रेसे
आपणा विचारो थी
आपणे सव ऐक थय ने जोर शोर थी प्रचार करीये ने समाज मा सवँ करीये
साथ सहकार अने सहमत थाय ने ऐकता बनावीये

समाज माटे ऐक नवुज कायँ करीये

संस्था बनावा माटे जग्या
नाणा नी सहाय माटे दाता नी मदद लय
मां अंनपुणाँ भोजनालय व्यवस्था
संस्था माटे जरुरीयात सर सामान माटे सगवडता करवी ऐ बधा माटे सव ने संस्था मा जोडाववा माटे प्रयास करीये

आज अमे ऐक सामान्य ने मीडल क्लास वाळा ने  विचार आवे तो

मानो समाज ना मोटा मोटा अग्रणी उध्योग पती
विदेश मा वस्ता समाज ना घणा सभ्य ने आ विचार आवोज जोये

अमारे तो शुन्य माथी सजँन करवा नो विचार छे

जे अधुरु छे आप सव ना साथ सहकार अने मदद विना
खाली वात करवा थी समाज ऐवा घणा लोको ऐ कह्यु

आ संस्था स्थपाय ऐ जरुरी छे
समाज ना घणा लोको नो विचार छे

आपणा समाज मा घणा सध्धर दाता ओ ने  आमा जोडावा माटे प्रेरीये ।
चारण समाज ना घणा लोको नो विचार छे आ संस्था स्थपाय ऐमा
पण बोली नथी सकता समाज सुं विचार से?
धिक्कार से ?
नफरत करसे ?
कोय बोली नथी सकता
केम कहेवु ?
कोने कहेवु ?
आवा विचार थी कोय आगळ नथी आवता

चारण परीवार जाग्रत बने 
पण समाज सव ना साथ सहकार अने सहमत  विना अधुरो छे

मारा लखवा मा काय भुल चुक थाय तो माफ करशो

अमे तो सारु कायँ करवा नु विचारीये छी
आप सव ना साथ विना अधुरो छे

आप सव ना विचारो जणावशो

आपणो " चारण परीवार " निराधार निसहाय वृध्ध मावतर माटे थई ने आश्रम बनावे ते भाव थी आगळ आवो

आपणा चारण समाज ना ज ऐक परीवार ना विचारो 💐💐💐💐💐

जय माताजी चारण समाज ने 🙏🏻🙏🏻

Mayaben .V. Gadhavi Jasdan
WhatsApp no : 81405 92592
vanraj Bhai gadhvi
Mo : 9574184348

Jasdan , Rajkot

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