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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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31 दिसंबर 2015

सोनल स्वासो स्वास . रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.     || सोनल स्वासो स्वास ||
. रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
आखी नात्य उगारवा,  उरमां उजळी आस.
जोगण बीजे न जोगडा, सोनल स्वासो स्वास.१
वेन करुं तो व्हालथी, खोळे लेती खास.
जननी जेवी जोगडा, सोनल स्वासो स्वास.२
हियुं करे ज्यां हाकलो,त्यां, पोगे आयल पास.
जगदंबा ई जोगडा,आई, सोनल स्वासो स्वास.३
पोष बीजाळी पोषती,अमने, माता बारो मास.
जीवन चारण जोगडा, सोनल स्वासो स्वास.४
छोरुं थी छेटी हवे , मां,  जननी तुं क्यां जास.
जनम अरज के जोगडो, सोनल स्वासो स्वास.५
नरणें भुलीयें नाम तो, आतम रहे  उदास.
जीभे जोगण जोगडा, सोनल स्वासो स्वास.६
रमती रोमे रोम मां,वळी,  व्रेमंड धर पर वास.
जे द्रस अदरस जोगडा, सोनल स्वासो स्वास.७
मढडे मंदीर मां मळे, मने, भवां तमांणो भास.
जे घट घट मां जोगडा, सोनल स्वासो स्वास.८
खलक भ्रमंडां खेलती, रज रज रमती रास.
जोगण चंडी जोगडा, सोनल स्वासो स्वास.९


29 दिसंबर 2015

चारण

वच्चे कोई बारोट द्वारा ऐक आंबो फरीतो थयेल जेमां वासुकी नाग ने चंद्र वंसी बताव्यो हतो...जे खोटो आंबो छे...जुना भाग्वत पुराण अने नागपुराण ना पांचमा अध्याय मां वासुकी ने कस्यप ना पत्नी कद्रु नो बीजा नंबर नो पुत्र बतावेल छे..जेमनी पुत्री आवरी ना लग्न चारण साथे थयेल....

28 दिसंबर 2015

जय माताजी

जय माताजी
सोनल बीज ऐटले चारण - गढवी समाज माटे नूतन वर्ष
 ता.11-01-2015 ना रोज सोनल बीज नी उजवणी थनार छे
आ सोनल बीजना आप जे संकल्प लेवा मांगता होय ऐ संकल्प आपना नाम अने फोटा साथे  सौराष्ट्र क्रांति समाचार पत्र मां छापवामां आवशे.
आप नीचे मुजब माहिती मोकली शको छो
नाम                :-
सरनामुं            :-
मोबाइल नंबर   :-
संकल्प            :-
1 पासपोर्ट साईझ नो फोटो :-
अशोकभाई गढवी - ईडीटर अने तंत्री सौराष्ट्र क्रांति
मो :- 9825217603
Email :- saurashtrakranti@gmail.com
आप आपनु नाम,सरनामु,संकल्प अने 1 फोटो ऊपर ना नंबर पर ता.05-01-2015 सुधीमां Whatsaap द्रारा मोकली आपवा विनंती छे
पोस्ट बाय :- www.charanisahity.in
       वंदे सोनल मातरम् 

मनहर कवित रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.............मनहर कवित............
नरा अवसुरा पुरे पुरा देखा प्हाडा ऐक
चोराडा पवाडा चाळ मारु जग्ग मान है.
बाटीयांरी साख नेहे भांणेज भणंत चुंवा
परी तीन प्हाडा ओके पुरी पहेचान है.
सावरी बावरी मात आवरी उतार्यो आधो
तुंबडे खिलायो फुल तुंबेल की तान है.
सात कुल सोही वामे सोलाह समाई साख
वासे विसोत्तर जळहळे जोगीदान है.
पेहलो प्हाडो ऐटले, नरा - अवसुरा..
बीजो प्हाडो ऐटले ,चोराडा - मारु..
त्रिजो प्हाडो ऐटले, बाटी - चुंहवा..
अडधो प्हाडो ऐटले, ..तुंबेल ..के जेने
भगवती आदी आवडे तुंबडे फुल नी जेम खीलाव्यो...
आंम कुल सात साखा मां बिजी सोळ नो उमेरो थई ने..
त्रेविस ऐटले के विसोत्रय..जेने विहोतर नात कहीये छीये.
रचना : जोगीदान गढवी (चडीया) 9898360102

27 दिसंबर 2015

RFO नी पोस्ट पर चारण-गढ़वी समाज पसंदगी पामेल छे.

जय माताजी
GPSC द्वारा आयोजित रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) : Class-2 (जाहेरात नं-209/2009-10) नो ताजेतर मां जाहेर थयेल परीणाम मां नीचे मुजब ना चारण-गढ़वी समाज उमेदवारो पास थयेल छे.

(1) गढ़वी धवल कुमार फतेसिंह - पालनपुर, जि: बनासकांठा, गुजरात.
(2) गढ़वी विजय कुमार परबतसिंह - चारणनीकोल, जि: खेडा, गुजरात.
(3) गढ़वी शिवराजदान अंबादान - पालनपुर, जि: बनासकांठा, गुजरात.
(4) गढ़वी नरेन्द्र कुमार हिंगलाजदान - माणका, जि: बनासकांठा, गुजरात.

पास थनार दरेक दरेकने खूब खूब अभीनंदन
आ माहिती आपवा बदल श्री गढ़वी विजय कुमार परबतसिंह नो खूब खूब आभार

        वंदे सोनल मातरम् 

|| नरसी केरा नाथ || .  रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.         || नरसी केरा नाथ ||
.  रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
बंधन कां थ्युं बापजी, तने, केदारा नुं कान.
नरसी नाथ निधान, जंखे चारण जोगडो.१
साधु थीये समाधमां, हरीवर नावे हाथ.
जुने पधारे जोगडा, नरसी केरो नाथ.२
साच बताव्यो स्यामजी, पारथ ने पण पाथ.
ज्वाळे सितळ जोगडा, नरसी केरो नाथ.३
स्नेहे गायी स्यामळा, गीता सरखी  गाथ.
जे नत वांचे जोगडो, नरसी केरा नाथ.४
देतो मारा देव तुं, शंकर ने पण साथ.
जंखु दरशन जोगडो, नरसी केरा नाथ.५
भरीये साचा भावथी, भगती केरां भाथ.
जनम छेल्ले जोगडो, नरशी केरा नाथ.६
सामो आवीन शामळा, बाप भरीले बाथ.
जांणी बाळक जोगडा, नरसी केरा नाथ.७
नीर वहावे नेंणला, मुकीयें पगमां माथ.
जादव वंदुं जोगडो ,नरसी केरा नाथ.८
(देवकी ना आठमा संतान..जन्म माटे पण आठम
आंम आठ ना चाहक कान ने आठ दोहा थी वंदन)

26 दिसंबर 2015

रचना :- थार्या भगत

किस देश वसे प्रितम मेरा, कहो पवनदेव प्यारा.  टेक
दशे दिशा तुं आचे जावे, दामोदर कयों न दिखावे.
संग न लावे न पाती बतावे, मेरा अंतर जरे अंगारा.    १
निश्र्चें देख आये नाथको, बेपरवा भया भारी.
ॐकार ध्वनि अनहद उच्चारी, सब जग करे पसारा.   २
तुम देखा शेषकी शय्या तपासी, वैकुंठ होंगे अविनाशी.
मुजसे कब मिले सुखराशी, सोइ लावो समाचारा.         ३
थार्यो कहे शोधी लावो साही, मेरे दिलको धीरज नाही.
हजार वार पडुंमौं पाही, बतावो प्रभु का द्वारा.    ४
रचना :- थार्या भगत
टाईप :- सामरा .पी. गढवी ना

24 दिसंबर 2015

|| काम द्वादसी ||. रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                || काम द्वादसी ||
.     रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.                       दोहा
कळा अकळ आपे कई, शुक्कर लाख सलाम
जरी बुरो वह जोगडा, कुट भर्यो जींह  काम.१
(कळा ओ आपनार शुक्र ने लाख सलाम छे
पण तेनुं बुरु लक्षण ऐ छे ते काम ने पनाह आपे छे)
साथ कदी ना सोहता, रती पती अर राम
जुवो सीयामां जोगडा, कदीन जडशे काम.२
(रती नो पती ऐटले के काम ने क्यारेय राम होय
त्यां नथी जोयो ऐनुं जीवंत उदाहरण मां जानकी)
शिव अटल्ल समाधीये, धणीं हता निज धाम.
जळ्यो लखण से जोगडा, कसो बुरो यह काम.३
(शिव पोताने धाम समाधी मां लीन हता त्यां पोते
जीवना जोखमे घुस्यो अनो जळी मर्यो आ केवो
दुस्साहसी छे काम ऐनुं प्रतीक छे )
भुल्या जुवो ब्रह्मा भला, गणो न मंदीर गाम.
जणीं गणीं नई जोगडा, कुडो भयंकर काम.४
(ब्रह्मा ऐटले विद्वता नो दाता केहवाय पण
तेने पण काम भुलवे छे माटे तो गामो गाम
ब्रह्मा ना मंदीर नथी आ पण काम ना भयानक
परिणाम नुं प्रतिक छे )
अकळ करे अंधार आ, पळ ई लैवण पाम.
जान भगावो जोगडा, कंस भयानक काम.५
(ऐक क्षण ना विलास माटे आतम तेज ने अधार
मय करी नाखे कंईं सुजवा न दे..तो तमारी भींतर
रहेला कृष्ण ने जगाडो अने भयानक कंस जेवा काम ने
जांणी ने भगाडो )
चंद्र भयो दागी चको, ईंन्द भटकतो आम.
जे हलकां ने जोगडा, कबे न छंडे काम.६
(चंद्र खुद दागी बन्यो ,ईंन्द्र आम तेम भटकतो थयो
माटे काम नी असर भारी भरखम व्यक्तित्वने हलका
कर्या विना छोडती नथी माटे तेने जांणो )
अमरत खातर आटक्या, विष्णु भये तद वाम.
जगन भुलावे जोगडा, कहो कसो यह काम.७
(जे देवो अने दानवो समुद्र मंथन थी अमरत लाव्या
तेनी वहेंचणी माटे विष्णु वाम(सुंदरी) बने छे अनो जे
मोहासक्त थया ते अमरत थी वंचीत रह्या आंम काम ऐ
जीवन नुं ध्योय भुलावे छे )
मोहीनी रुप मोहियो ,भसमासुर दीख भाम.
जाणे सब जग जोगडा,कंदुक नरतक काम.८
(भस्मासुर भगवान शिवने रीजवी वरदान लई सक्यो
पण कंदुक नृत्य करती मोहिनी रुप मां मोह्यो अने
जीवन नो अंत आंण्यो )
पांडु तजीयो प्रांणने, चखतां माद्री चाम.
जीवन हरीले जोगडा, कहो भलो शुं काम.९
(पांडु राजा ने पोताना मोत ना कारण नी खबर
होवा छतां माद्री ना चामडा पर मोह्या अने मोत ने भेट्या)
हर पळ परखो हेतने, जिव घट आठो जाम
जाग्रत रहवुं जोगडा,कबे दीखे जो काम.१०
(कोई पण विजातीय पात्र नो सथवार सांपडे  ऐटले
तेना स्नेह ने परखो अने हरक्षण जाग्रत रहो )
निल कुबेरां न्याय कज, रावण हणींयो राम.
जगत विदित यह जोगडा, कढे लंक वह काम.११
(कारण के निल कुबेर नी पत्नी नाे कामांध रावणे
मात्र हाथ पकडेल अने राम ना हाथे तेने मरवुं पडेल
नहीतर तेने लंका मांथी कोंण काढी सकत ? )
शुकर गुरु साधो सकल. नकर भुलावे नाम.
जडे निकट मे जोगडा, कला जगत अर काम.१२
(शुक्र ऐ कला नो दाता परंतु शुक्र पोते काम ने पनांह
आपनार छे..माटे कला जगत नी साथे काम संकळायेल
जोवा मळे छे पण जो तमे शुक्र ने गुरु साथे मेळवशो तो
कला ना स्वामी तो रेहशोज अने गुरु नुं बेसणुं होय त्यां
काम कोई काळे नही पोहची शके...)


पाणानो पोकार रचीता :- भगत बापु

( पाणानो पोकार )
रचीता :- भगत बापु
(कर मन भजननो वेपार जी - ए राग)
भाइ मने कोणे बनाव्यो भगवानजी
कोणे घडयो भगवान कोणे मारुं भलावी दीधुं भान, भाइ.  टेक
टाढ खातो, तडको खातो, खातो मेघनुं मान जी (२);
पवन खातो प्रेमथी भाइ (२) धरतो आतम ध्यान. भाइ …१
धूपदीपना धंध मचावी, मने पीरसे छे पकवान जी (२);
पूजारी लावे मीठा मेवा (२), (पण) भोजननुं नथी भा. भाइ …२
अंगडा कापी ऊभो राख्यो, मोटुं दीधुं मान जी (२);
सोना केरे संग करावी (२), मने कीधो बंदीवा। भाइ …३
डुंगरडाने माथे रे'तो मारुं मन हतुं मस्तान जी (२);
हेठुं कदी नव हेरतो (२) मारी आंख हती आसमान. भाइ …४
देयुं अमारी दानमां दई अमे, चणता कंईक मकान जी (२);
हरि बनी में हाथ लंबाव्या (२), लेवां पडे छे दान. भाइ … ५
प्रभुमांथी मारे पथ्थर थावुं नथी जोतुं आ मान जी (२);
'काग' पुकारे आरसपहाणो (२), मारे जावुं छे जूने स्थान. भाइ  …६
रचना :- दुला भाया काग (भगत बापु)
टाइप :- सामरा पी गढवी
मोटी खाखर


23 दिसंबर 2015

|| रीत रिवाज ||रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.          || रीत रिवाज ||
रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
मलक बधोये मेलशे, तेना शिर पर ताज.
जगमां जेणे जोगडा, राख्या रीत रिवाज.१
सूर समाजे साचव्या, असुर भुल्या ते आज.
जाय हिमाळे जोगडा, रखडी रीत रिवाज. २
नांभी थी ना निकळतो, ऐकय जुनो अवाज.
जुवो खमिर ने जोगडा,हवे, रोळे रीत रिवाज.३
मानवता मरवा मुकी, करे न कटम ना काज.
जुना बधाये जोगडा,हवे, रझळ्या रीत रिवाज.४
बाप भलु ज्यां बोलतो, दीकरा करता दाज.
जण्या तणां आ जोगडा, रडवे रीत रिवाज.५
रोड वचाळे रखडता , नफट करे बउ नाज.
जात भुली निज जोगडा, रमणी रीत रिवाज.६
करतां उलटां काम जे, लगीर न लावे लाज.
जळक्या आंखे जोगडा, रह रह रीत रिवाज.७
ससरा ने सामे पडे, अने, मुकती नेव मलाज.
जोतां लागे जोगडा, हवे, रांड्या रीत रिवाज.८
नव नव खंडे न्याळता, अखियां थाकी आज.
जडे हवे क्यां जोगडा,ई, रजवट रीत रिवाज.९


आई नी अकळांमण रचना : जोगीदान गढवी कृत

.....…...............मनहर.............
कहां गये दीन माता जोगणी जलमती वो
माई पास जाई आंसु आंख से ब्रसातो है
केहनी अलग्ग जाकी रेहनी मे भार्यो भेद
वेद चारो वांचे ऐसी वात को व्रसातो है
जाने निज धर्म तोउ कुडे पंथ डारे पांव
नाव दो सवारे पंड्य डोलतो प्रसातो है
कहे जोगीदान मां के आदेश न धारे कान
दुजोधन्न जेसो आज चारण द्रसातो है

.             || आई नी अकळांमण ||
.                    छंद : सारसी
.           रचना : जोगीदान गढवी कृत


दोढेक लीटर पीये दारु.चिकन मुरगां चावता.
मंडाय पाछा मंच माथे गीत सोनल गावता.
देवीय कोटी वरण देखो जुवो कई दिश जाय छे.
ज्वाळा लगे छे जोगडा मन आतमो अकळाय छे..||01||
सोनल तणां आदेश नी आ देश ने कीम्मत नथी.
एनां जण्यां नेय अहम छोडी हालवा हीम्मत नथी.
कहेवाय चारण एक धारण दरश क्यां देखाय छे.?
जळवा लगेछे जोगडा मन आतमो अकळाय छे..||02||
धन देखतां सौ ध्रोडता भल धरम नातो धुळमां.
सत धरम छंड्या पछी सोनल केम जनमे कुळ मां.?
आभे निरखती आई नुं पण मन घणुं मुंझाय छे.
जळवा लगे छे जोगडा मन आतमो अकळाय छे..||03||
ईरशा करी खुद आपणां जण पद पकड भूं पाड़ता
जनता वचाळे जायके दरीयाव दील जीम द्हाडता.
ई दोगला जण देख सोनल समसमे नीसहाय छे.
जळवा लगे छे जोगडा मन आतमो अकळाय छे..||04||
दीकरी लीये घण दायजे ने तोय दानव दोभता.
सरजुं भुल्यां संतान सारण सिनेमा जई शोभता.
अव तरण कारण आई ने को देह नव देखाय छे.
जळवा लगे छे जोगडा मन आतमो अकळाय छे..||05||
पण जो सेनल ने राजी करवी होय तो .....
उजळो घणों ईतिहास जेनो जुवो कां झांखो पड्यो.
दादो ईशर पण दान जोगी रगत आंसुं कां रड्यो.
चहु दीश चारण एक धारण रंग जो रेहलावशो.
सुरगे गयेली सोनबा ना रदय ने रीज्जावशो..||06||
खपीया घणां खुंखार जोद्धा भौम मां भळीया भड़ो.
ए वातडी वांचो विरो नीज आंन्त से नव आखडो.
पाडाय साड़ा तरण त्रोडी वरण ईक वद्धावशो.
सुरगे गयेली सोनबा ना रदय ने रिज्जावशो..||07||
अढळक जनोये एक थावा बहुं गायुं बापडे.
घर कान जोगीदान तो सनमांन साचुं सांपडे.
अभिमान कुड ईरशा तजी जो एक थई ने आवशो.
सुरगे गयेली सोनबा ना रदयने रिज्जावशो..||08||

जोगीदान गढवी कृत अष्टक ...
मो.नं. 989836 01 02
मो.नं. 989836 58 26

22 दिसंबर 2015

चारण समाजनुं गौरव

चारण समाजनुं गौरव 

सोनल समाढा व्योम बाढा खपरखाडा खडखडै

  छंद - सारसी ।
करा धरा धरसो फेर हरसो असो परचो ईश्रवरी दैतान डरसो ऐक फरसो नाव तरसो वपू धरी अणकडा भजबळ दैत सो अणसमे तू धर आकडे
सोनल समाढा व्योम बाढा खपरखाडा खडखडै
उठी अमरमे कस कमरमे तु समरमे चारणी देता डमरमे खडग करमे रण नगरमे डारणी होते हमरमे नहि गरमे ते वमरमे तडखडे सोनल समाठा व्योम बाढा खपर खाडा खडखडे
ऐकी अखंडी मही मंडी पाप खंडी अणकळी देतान दंडी मान चंडी धु विखंडी परजळी कोपे कमंडी धर चहंडी आदि चंडी आकडे सोनल समाढा व्योम .......
धकमार धडडड होत हडडड गडडड नादे गडगडी कमठ कडडड थंभ थडडड चोपथी सिधे चडी
फरकंत फडडड केक नेजा हडड नारद हडहडे सोनल समाढा
वानेय काळाय जोर वाळाय केक दैता हूक्डया पडतेय पाछट बाण खागड साभवा धाये मळ्या कर कोप रणमा रुप भेकर कडड दातड कडकडे
सोनल समाढा .........
करडाई होठड लोह दातड आभ माथु आकडे वीराण वाढक कोप डाढड भोम हलबल भाटके
भभकी भयकर खडग लई कर भेळीयाळी जो भजे
सोनल समाढा ........
बोतेर कोडा महा बऴीया जेम मळीया भारथे अणसमे धू धड धुण धुजड कोप अंबा कारथे परगंट झटपट होत शकत्यु कोड मोढे गडगडे सोनल समाढा .....
ऐसे अवथडा साथ सथडा रुप रथडा के धरा साथेय सथडा काढ हथडा त्रोड मथडा दैतरा
धोकार दे धस महारण मच केक राखण तडखडे
सोनल सभाढा ...
काधेय जाडा सो सभाढा पीत पाडा चारणी असरा अवगता जुध जगता पीत रगता पालणी
तव काग सोनल हेक चंडी अरि दमणी ताडके सोनल समाढा ..
रचयता :- कविश्री दुला भाया काग
टाईप :- गढवी प्रकाश खेंगारभाई सिंधोडी मोटी,  कच्छ आईश्री सोनल युवक मंडण  मो:-9687098087                    
 
         वंदे सोनल मातरम्

21 दिसंबर 2015

सोनलबीज उजवणी लीस्ट.

जय माताजी
➡. आवति तारीख 11/1/2016 ना रोज आईश्री "सॉनल बीज " छे
➡. आपडा आखा गुजरातमां  ज्या ज्या "सॉनल बीज" उजवाय छे ते शहेर के गामनुं  एक लिस्ट बनाववानुं छे .
➡   आपना गाम अथवा  शहेरनुं नाम सरनामु. नीचेना नंबर पर मेसेज करीने जाण करवा विनंती छे .
➡  सोनलबीज उजवणी नी  पत्रीका पण मोकलवा विनंती छे
. वेजांध गढवी :- 9913051642
. मनुदान गढवी :- 9687573577
➡. आ मेसेज ने आपडा गढवी - चारण  समाज ना बधा गृपमां फोरवर्ड करवा विनंती छे.
       वंदे सोनल मातरम् 

व्रजभाषा पाठशाला अंगे वी.ऐस.गढवी साहेबनो अहवाल

व्रजभाषा पाठशाला अंगे वी.ऐस.गढवी साहेबनो अहवाल 

चारण जवान

चारण जवान 


चारण समाज कच्छ,


समूह लग्न कच्छ,


20 दिसंबर 2015

बापलभाई गढवी नी रचना

बापलभाई गढवीनी एक रचना
गीत - समजी जाजो शानमां .
समजी जाजो ओरे शानमां , कायम कोई नथी रहेवानुं ,
ठाला-ठुंठ थई शुं रे फरो छो . जन्म्या अेमज जावानुं
मानवतानुं साचु मात्तम. खवराीने खावानुं .
हळी-मळीने हसता रहेवुं . जन्म्या अेम जावानुं.
उत्तमभावे आनंद माणो . पाछळ छे पछतावानुं .
बचका जे ते बांध्या रहेशे , जन्म्या अेम जावानुं.
ऊघाडाने ओढाडी दे जो , ऊघाडा एक दि.थावानुं
खापण आखर खेंची लेशे. जन्म्या अेम जावानुं.
"बापल" बनावो भले बगीचा , मेडीथी शुं मलकावानुं ,
सुवानुं एक दि.छे समशाने . जन्म्या अेम जावानुं.
रचयता :- बापलभाई गढवी
टाईप :- मनुदान गढवी -महुवा.
➡. श्री बापलभाई गढवीनी बीजी कोई रचना अने साहित्य आपनी पासे होयतो आ नंबर 9687573577 पर मोकलवा नम्र विनंती छे जेथी करीने आ साहित्यनो बधाने लाभ मळीशके
सहकार बदल आभार
        
          वंदे सोनल मातरम् 

कवि श्री दादनी एक रचना { टेरवां } ....

कवि श्री दादनी एक रचना { टेरवां } ....
धिरां धिरा रे वगाड , काळजामां वागे छे टेरवां
लपतां ने छपतां आवी , उभां छे बारमां ;
खोले छे हैयाना द्वार , टकोरा मारे छे टेरवां.
हसतां भीत्युंअे ओल्यां चाकळे चंदरवे ;
मांड्युं छांड्युं मां मलकाय , टोडले टहुके छे टेरवां.
ता णा वा णा जेम चोट्यां गो कु ळ ने ,
गोपीने हैये गूंथाई , वनरावनमां गुंजे छे टेरवां.
जीवन जंजाळ घडीक ममताने खोळले ;
बाळक बनीने उंघी जाय , माथडा पंपाळे छे टेरवां.
डूकी गयां होय भले नदियुंनां वेन "दाद"
अंतरनां नीर उभराय , वीराडा गाळे छे टेरवां.
भुल होयतो सुधारीने वांचवा विनंती
रचयता :- कविश्री दाद
टाईप :- मनुदान गढवी -
➡ एक विनंती आप  कोईबंधू पासे कविश्री दाद अने कविश्री कागबापुनी रचनाओ ( साहित्य ) होयतो आ 9687573577.मोकलवा नम्र विनंती छे
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19 दिसंबर 2015

|| भाळ्यो में भगवान ||. रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.        || भाळ्यो में भगवान ||
.    रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
उंलटो मां ना उदरमां, नव नव मास निधान.
जनम्या पेहला जोगडा, भाळ्यो में भगवान.१
राघव थईने रदय मां, क्यारेक गोकळ कान.
जाजाय रुपे जोगडा,तने,भाळ्यो में भगवान.२
वसतो कण कण विठला, रण वगडो के रान.
जळ थळ सघळे जोगडा, भाळ्यो में भगवान.३
कूंपळ थईने कोळतो, परगट पांनो पान.
जड चेतन मां जोगडा, भाळ्यो में भगवान.४
गायो अमरत गीततुं , माधव रण मेदान.
जुद्ध वचाळे जोगडा, भाळ्यो में भगवान.५
बंम बंम बोली बेहतो, शंकर थई समशान.
जोगी वेहे जोगडा,तने, भाळ्यो में भगवांन.६
अंतर गोखे आपीयें, तने, शांमळीया सनमान.
जादव रुपे जोगडा, तने, भाळ्यो में भगवान.७
करियां उजळां कांम ते, विट्ठल काळे वांन.
जीवण दोरी जोगडा, भाळ्यो में भगवान.८
सरसत दाता शांमळा, गातो चारण गांन.
जागी प्रोढे जोगडा, भाळ्यो में भगवान.९


दुनिया ना डा'या रचियता :- पह्मश्री दुला भाया काग (भगत बापू)

 दुनिया ना डा'या
दुनियाना डा'या रे डा'पणनी वातुं कोणे कीधी ?
वेदने विचार्या जेणे, शिवने रीझवीआ वा'ला ! (2)
(ऐणे) जानकीने केम हरी लीधी ?... ऐ दुनियाना... 1
सत्ताना सुहागी बधा, सुभट भारतना वा'ला ! (2)
गर्भमां बाळुडां नाख्यां वींधी ... ऐ दुनियाना... 2
ईन्द्रने गमे नहि कोईनुं उगमवुं वा'ला ! (2)
कुड-कपटनी वाटुं लीधी ... ऐ दुनियाना... 3
जगने रंजाडे ऐवां दळ दानवोनां वा'ला ! (2)
शुकरे जीववानी केडी चींधी ... ऐ दुनियाना... 4
डा'पणे मरे के पाछूं गांडु थईने जन्मे वा'ला ! (2)
पेलांथी घेलपनी भांग्युं पीधी ... ऐ दुनियाना... 5

भावार्थ :-
             ईतिहासमां लखायेला जेटला डाह्या माणसो छे ऐ बधाना डहापण आ जातना होय तो ऐ डा'पण जगतनो नाश करनारु नीवड़े दाखला तरीके -
               रावण जेवो वेद शास्त्रनो जाणकार, सदाशिवने प्रसन्न करनार अने पुलस्त्य कुळ मां जन्मेला ऐने सीता हरण करवानी बुद्रि थई ?
               महाभारतना काळना प्रात: स्मरणीय मोटा माणसो तो सत्ता अने पृथ्वीना ज उपासको हता. अश्वत्थामां जेवा उत्तम ब्राह्मणों छेवट उत्तराकुमारीना गर्भमां रहेल बाळक परीक्षीत ने मारवा बाण मुकेलां.
                    देवताओना राजा ईन्द्र, सर्व पंचशकितओना स्वामी, ऐने कोईनो उत्कर्ष ज न गमे. ऐना आखा जीवनामां बीजो यज्ञ करे अथवा तप तपे के ऐने आग उपदे. लदीने, छळ करीने, बीजानी मदद लईने ऐनो नाश करे त्यारे ज ऐने शांति वळे.
               बे महामुनिओ ऐक बृहस्पति अने बीजा शुक्राचार्य. ऐक देवतानां गुरु, बीजा दैत्योंनो गुरुदेव. जगतने त्राहिमाम् पोकरावनारा दैत्योंने कोई मारी नाखे तो शुक्राचार्य ऐने संजीवनी दवाथी जीवता करे. वळी पाछा ऐ दानवो जगतना बाग़ने उधेमूळ करी मुके.
            डा'पणनुं मरण ऐ घेलापणानो जन्म, कारण के बधा ज बुद्धिना डा'पण नी गळथुथीमां घेलापणुं पायुं होय छे. श्रद्धा ऐक ज , अहिंसा अने सत्यथी जन्मेल ते साचुं डा'पण छे.

रचियता :- पह्मश्री दुला भाया काग (भगत बापू)

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18 दिसंबर 2015

अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???

आवो आजे एक कागबापुनी रचना माणीये
(छंद :-  सारसी)
जिण पेट धारी दिव्य काया जोगमाया जनमती.
दमती सकण परिताप अे पग जगत सौ नमती हती .
खमकार करती खोडलीना पथर गुण गाता रह्या,
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???
उजणा वाणी सधु बापल बुट बलाड बेचरा,
चोराड कुणमां देव चांपल कान सावज कर धरा ,
सुणी साद आवड मातना रवीराज पण थंभी गया ,
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???
नव लाख दण लई चड्यो नवघण प्रबण पोषीया,
वरमंड ओदर धार वरवड सात सायर शोषिया ,
कणमां ज जणमा पाड केडा लोढ दण समजी गया.,
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???
जगदंब चारण जीवणी पर जार मनसुबो हतो ,..
थइी सिंहण बाकर शेखने सरधारमां चीर्यो हतो,..
उंधो पछाडी पीर थाप्यो अरण परचा आपीया,,.
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???
चोरीअे चडियेल मात सोनल कोडीअे रमती हती ,
वरमाण फेंकी वेगणी गैपाणने भजती हती ,,....
जग जाण तोडी जोगणी ब्रह्नचारणी व्रत पाणीयां ...
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???
अा समय वसमो अम परे सौ आध चंडी आवजो ..,
जिण पेट जन्मे सुध्ध चारण वखत अे वरतावजो ,,..
सत    '' काग '' आदि चारण्यु कणियुगमां वसियुं किया ?
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???
( दुहो )
देव जातीमां दिपती, जगदंबा घर जोय ;
कहां गये कलीयुगमें , चारण के दिन सोय ?
रचयता :- दुला भाया काग ( भगतबापु )
टाईप :-  मनुदान गढवी

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17 दिसंबर 2015

|| वाली राम विवाद || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )

.                  || वाली राम विवाद ||
.                       गीत : सांणोर
.        रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )
.     रुजु रदय राखी रट्ये, असुर थता आबाद.
.     जो ईक नोखो जोगडा, वाली राम विवाद.
कहे वाली सूंणो वात राघव तमे, अमे तो वांनरा जात वनका.
तमेतो त्रिलोकी नाथ तारक छता,मेल मानव धर्या देह मनका.
कियो अपराध ना कोय मैं आपनो, तोय कां दगो ते देव करीयो.
बिना पडकार तें मारीयो बांदरो, हरी कां हरी नो प्रांण हरीयो.||01||
मारवुं पीठ पर ऐ न मरदानगी, भड थई रघु कुळ रीत भुल्यो.
आ नतुं  युद्ध को अजोधा उपरे, तोय कां मारवा राय तुल्यो.
अकारण पहुडां आंम जो मारशो,पछी तो रहातळ जाय परथी
अडे ना तमारा कुळ ने दाग आ,  देव हुं पुछतो रह्यो ऐज डरथी.||02||
सीता ने छेडतल जयंत नो मा जण्यो, भाळतां रदय मां थाय भडको.
नाम वाली छतां रीत्य वाली नही,ईन्द्र नो पुत्र तुं अहम अडको.
अनूज सूग्रीव नी अबळ अरधांगनी, रैयत नी बेटीयूं बान राखे
अधीक अन्याय तूज वध्या अंगद पितु, सगो साढु कहे केम साखे.||03||
अस्तना सुरज ने अरघ तुं आपतो, अहूरी रीत नी अबख अमने.
जेह कारण दीठुं मुक्ख ना जोगडे, जाड नी ओथ थी कह्युं जमने.
पालव्यो तने ने झुलाव्यो पारणे, ई अहल्या मात थी अलग आव्यो.
जनम भोमी अरु तजी तें जणेता, लाज ना हजी तुं केम लाव्यो.||04||

भाई ने भलेतें वनो वन भाटक्यो, भले दाराय तुं भाम भणीयो.
जात वानर गणी ऐब ई जोवुं ना, बळुको भले तुं खुब बणीयो.
जे घडी अहल्या जोई में जोगडा, राम के रदय मां वात रणकी.
मारवो ऐह ने मूकेय जे मात ने, तेज आ धनुष नी तणस टणकी.
||05||
(जे रामने लक्ष्मणे कह्युं के आ सोनानी लंका आंम आपी देवाय ? त्यारे राम कहे के ..अपी स्वर्णमयी लंका नमे रोचते लक्ष्मणः जननी च जन्मभुमी स्वर्गादपी गरीयसी...
ऐ रामे वाली ने मारवा कदाच ऐ कारण बतावेल के हे वाली तें जे पण कर्मो कर्यां ते तारा वानर जाती ना  जंगली संसर्ग मां होई अने शक्ति ना घमंडे करीने होय तेम गणीं माफ कराय..पण ऐकतो जे जयंते सीता ने कागडो बनी दुभवी तेनो तुं सगो भाई..वळी तुं असुरी रीत थी अस्त थता सुर्य ने वंदना करे छे (वाली संध्या वंदना करतो) तथा तें तने पाळी पोषी ने मोटो करनार माता अहल्या ने ज्यारे सल्या बनीने समय व्यतित करवो पड्यो त्यारे तुं जोवाय नथी गयो अने अहीं रंगमोल मां राचतो हतो..ऐटले तुं अहंकार ना अवतार रुप तुं जीवीत होय त्यारे तारुं मोढुं जोवुं ऐय पाप हतुं माटे हुं तारी सामे न आव्यो..अने तें भले भाई ने वनोवन भटकाव्यो के भले तें बीजा अनाचार आचर्या पण ज्यारे तें मॉं ने विकट समय मां ऐकली मुकेली जोई त्यारथीज तारा मृत्यु माटे मारा धनुष्य नी तणस रणकी रही हती...माटे हण्यो ..
(जोके पछी ताराये श्राप आप्यो के जेम तमारे हाथे मर्यो तेम तेना हाथे तमे मरशो...जे श्राप कृष्ण अवतार मां पीछो करतो पोहचेल अने सत्य ठर्यो) ...आंम राघवे वाली ना प्रसंग थी जे मातृ ऋण थी भागे छे ऐ ईश्वर नो दोषीत छे  ऐवुं जणाव्युं )

16 दिसंबर 2015

उलट सुलट दोहानो रचना:  जोगीदान गढवी (चडीया)

.              उलट सुलट दोहानो
.     ..दुमेळी प्रबंध .(चाकण प्रबंध)...
.     रचना:  जोगीदान गढवी (चडीया)
दोहो..
वशी यही वधरा तन्न, यज नवरा किनजा नरा
वजी यद हखरा वन्न, डागजो यहिय जोगडा.१
आ दोहाने नीचेथी उल्टो (ईती थी अथः सुधी/ छेल्लेथी सरु करी शरुवात सुधी उलटा अक्षरे) वांचो ऐटले...आंम थशे...
दोहो...
डाग जो यहीय जोगडा, न्नव राखह दय जीव
रान जानकी रावन जय,न्नत राघव हिय शीव. २
पेहला नो अर्थ..आंम लघर वघर देहे हुं वशी के ज्यां केवां नर छे ऐय खबर नोहती पडती..वजुज ने हखरी (संकोरवु) ने वन्न मां पडी ते डाग मारा हैये जेमनो तेम रह्यो.....
बीजा नो अर्थ..डा (डामवुं) गजो (कलेवर..गजु) ऐ थयुं के जे राखह ना जीव मां दया नोहती, त्यां रान मां जानकी नो रावन पर जय थयो ..कारण न्नत (नित्य..कायम) राघव ना हैया मां शीव नो वास हतो...

कच्छ चारण समाज योग संदेश

.         कच्छ चारण समाज जोग संदेश

श्री अखिल कच्छ चारण सभा मांडवी-कच्छ

आईश्री सोनल बीज उत्सव चेरीटेबल ट्रस्ट मांडवी कच्छ

प.पू. आईश्री सोनल मांनो 92 मो प्रागट्य पर्व सोनल बीज ना दिवसे नीचे मुजब शिष्यवृति आपवामां आवशे.

शहिद वीर माणशी गढवीनी स्मृतिमां S.S.C मां प्रथम आवनारने शिल्ड - अखिल कच्छ चारण सभा तरफ थी

कैलाशदान करणीदान गढवी तरफथी रनींग शिल्ड तमाम विधार्थीओने

निरंजनबापु ट्रस्ट तरफथी शिष्यवृति

शिष्यवृति मेळववा माटे लायकात



S.S.C मां 75 % 

H.S.C सामान्य प्रवाह मां 75 %
H.S.C विज्ञान प्रवाह मां 70 %
कोलेज कक्षाऐ (दा. त.BCA,BBA,DIPLOMA, DEGREE, MEDICAL, वगेरे) मां 60 %
राजय के राष्ट्र कक्षाऐ मळेल सीद्धि  ओ( प्रमाणपत्रनी खरी नक़ल मोकलवी )


➡ ऊपर मुजब लायकात धरावता विधार्थीओ ऐ नीचेना सरनामे रुबरू अथवा टपाल द्रारा मोकली आपवुं.
(1) नाम सरनामा साथेनी सादी अरजी 

(2) परीणामनी प्रमाणित नक़ल  
(3) बोनोफाईट सर्टीफिकेटनी नक़ल



अरजी मोकलवानी छेल्ली तारीख :- 01-01-2016

सरनामुं
श्री लक्ष्मण राग चारण बोर्डिंग

लायजा रोड मांडवी कच्छ
पीन कोड 370465
02834223698


वधारे माहिती माटे :-

नागाजणभाई - 9879444802
माणेकभाई - 9925738247
वेजांध       - 9913051642


गढवी विजयभाई करशनभाई - प्रमुखश्री अखिल कच्छ चारण सभा
बारोट भीमशीभाई काकुभाई - मंत्रीश्री
गढवी कानजीभाई वालजीभाई -प्रमुखश्री आईश्री सोनल बीज उत्सव समिति

गढवी कानजीभाई जेठाभाई - उपप्रमुखश्री


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|| राम ना रुदानी || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                 || राम ना रुदानी ||
.       रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.       राग: अंधो अंधी बे तपसी नो ढाळ
रांम ना रुदीया केरी रे....वातडीयुं..
आखाये जग थी अजाणीं.....
वातुं राघव नां दल नी वांची .त्यांतो ..
पड्यां आखडीये थी पांणी....राम ना रुदीया केरी रे...टेक.
जोईती जेदी ऐने जनक पुरी त्यारे ..काळजे मारे कोरांणी..
भोळीया नाथ ना धनुं ने भागी मेतो..प्रेमे ग्रह्यां जेनां पांणी..
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||01||
मारे खातर जेंणे मेली म्हेलातु..जंगले फरती  जांणी..
जाडवे जाडवे रोयो हुं जोगी ज्यारे..असुर लई ग्यो आंणी..
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||02||
राम ने कायम राख्यो रदय मां..लंका मां ना ललचांणी
ई विदेही केरा व्हाल ने मारे,...वदवुं ते कई वांणी...
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||03||
फाट्युं काळजुं ने आतमो फफड्यो..सीता ज्यां धर मां समांणी
पाड्या पोकार मे सरयुं  पांणी..हवे..तुं लईजा मने तांणी..
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||04||
जानकी केरी तो जगते जांणी पण...अवध पति नी अजांणी
जोगीदांन के जडे नही ऐनी..,वेदना लखवा वांणी..... राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी.
.||05||
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रेवन्यू तलाटी भरती


रेवन्यू तलाटी भरती
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जाहेरात क्रमांक :- 60/2015-26

कुल जग्याओ :- 2480

ओनलाईन फॉर्म शरू तारीख :- 16-12-2015 (2-00 PM)

छेल्ली तारीख :- 31-12-2015

ओनलाईन फॉर्म भरवा माटे :-
http://ojas.gujarat.gov.in

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15 दिसंबर 2015

| गमती आ गरवी गुजरात || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.   © || गमती आ गरवी गुजरात ||
.                  राग : भैरवी
.    रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
हारे मने गमती आ गरवी गुजरात ..(०२)
हे..ज्यां विरो ने सहीदो ना उभा छे पाळीया...
घोडा नी खेली घमसांण...(०२)
हे,.ज्यां जाडेजा जेठवा ने खळके रत खाळीया..
खाचर वाळा ने खुमांण...(०२)
हे ..ज्यां बहादुरो बंका दे दुनिया मां डंका ने..
पंकाता हाले प्रखीयात......हारे मने गमती आ गरवी गुजरात..||01||
हे..ज्यां घुघवे घेघुर घोर सागर घुघवाट ने ..
नदीयुं ना खळ खळतां नीर...(०२)
हे..ज्यां साबर मही तापी ने भादर बनास भरी..
गजवे हीरण आखी गीर...(०२)
हे ऐवां ओझत ने आजी पण रेवा थी राजी जे..
तरबोळे खेडुत जगतात.....हारे मने गमती आ गरवी गुजरात..||02||
हे ज्यां पोरहा नुं पादर ने लोडण नां लोई थी...
खीमरा नी खांभी खरडाय...(०२)
हे..ज्यां रांणो ने कुंवर ना रढीयाळा राहडा ने..
मांणेक नी मुंछो मरडाय...(०२)
हे..रंग विहळ ना वट ने नरसी ना नट ने जे..
मांमेरां भरतो मलकात.......हारे मने गमती आ गरवी गुजरात..||03||
हे..ज्यां सोमनाथ द्वारिका ने ड़ंणकंता सावजो..
गीरनारी गरवो दातार...(०२)
हे ज्यां सोनल ने मोंगल सी सगती पण भगती थी
अंबा खुद लेती अवतार...(०२)
हे जेंणे जंगल ने जगव्यो ते सावज ने भगव्यो ई
चारण नी बाळा चरचात.....हारे मने गमती आ गरवी गुजरात..||04||
हे,.ज्यां नरमद ने दलपत ना गौरव लई गावता..
गांधी पण नरसी नां गीत...(०२)
हे..ज्यां हेमु परफुल काग नारण मेघांणी ने ..
मेरुभा मनडा ना मीत...(०२)
हे..रंग चारण जातो जे ईतिहासी वातो ने ..
जगवे छे रातो नी रात.....हारे मने गमती आ गरवी गुजरात..||05||
हे..ज्यां प्रिति मां प्रेत थतो मूग्ती विंण मांगडो ने..
होथल ने ओढा नुं हेत...(०२)
हे..ज्यां खांडणीये खांडी ने माथां खवरावतां..
देवायत दीकरा देत...(०२)
हेवा..चारण जोगीदाने गरजावी नीज गांने ..
व्हाली रा' नवघण नी वात.....हारे मने गमती आ गरवी गुजरात..||06||
रचना : जोगीदान गढवी (चडीया) मो.नं. 9898360102
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|| बेटी बउं बाप ने वाली ||. रचना: जोगीदान गढवी (चडीया )

.            || बेटी बउं बाप ने वाली ||
.        रचना: जोगीदान गढवी (चडीया )
.          राग: माडी अमे बाळ तमारां....
काले जे बोलती काली..समजु थई  सासरे हाली....
लागी ऐने हाथ मां लाली. .बेटी बउं बाप ने वाली...
ढींगलां लैने धोडती ती जे.आज उभी अण डोल
मांडवे आवि मौन बनी जो...बेन दीये नई बोल
ठाकर नई वात आ ठाली.. बेटी बउं बाप ने वाली..
भाई काजे आखा गाम ने भांडे..मात नो खाती मार
तोय विर खम्मा कई वाल वरहावे...ऐवडो जीव उदार
हेताळी हिबकी हाली...बेटी बउं बाप ने वाली..
बापु तमे  ऐने बोलता ना कंई.... बउं भोळी मुंज बा..
करी भलांमण काळजां चीरे ...गभरुडी ईय  गा..
प्रेमे जेने कोड थी पाली..बेटी बउं बाप ने वाली...
जाउं छुं के त्यांतो काळजुं कंपे..मन मां बाप मुंझाय
साचवज्यो के त्यां सेरडो पडतो, (जांणे) जीवडो बारो जाय
खावा धाय खोरडुं खाली...बेटी बउं बाप ने वाली..
दीकरी नई आ छे  दीकरो मारो...जीव छे जोगीदान.
ममता ऐनी मावडी जेवी.......पाथरी देती  ..प्रांन
आहुडा आंख मां आली..... समजु थई  सासरे हाली....
.......

11 दिसंबर 2015

ममता नो मेहरामण || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                   || ममता नो मेहरामण ||
.                 रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
बेटा तारां मांडवडा नां मंगळ गीत..काळज ककळावे रे..
बेटा हवे घडी रे बघडी मां मारा पेट..विदाय वेळा वाशे रे..
बेटा ज्यारे थाक्यो रे पाक्यो आवुं घेर..पांणीडां हेते पावे रे
हवे उंबरो निहाळुं मारा आंत्य..पांपण्य पांणी पाशे रे..
बेटा ज्यारे वाळुं रे करी ने म्हारा व्हाल, थोडोक आडो थावुं रे
त्यारे आंखडीयुं भींजावे तारी याद..भणकारा तारा भाशे रे
बेटा तुंतो हउकली करी ने मारा हेत..बापु ने बीवडावे रे
ऐनो पड्यो रे फड़को मारा पेट्य..जनमारो केम जाशे रे..
बेटा तने जरीक ना विहारे जोगीदान..छांनो छांनो रोशे रे..
बेटा पछी गगळा गळे थी तारां गीत..हालरडां हुलाशे..रे..
,.

फोरम्युं देतुं फुल रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.              || फोरम्युं देतुं फुल ||
.     रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
फोरम्युं देतुं फुलडुं मारुं..आंगणे उगेल आ..
काली घेली ऐनी काकलुदी मा..बोलतुं बापु ने बा...
फोरम्युं देतुं फुलडुं मारुं..आंगणे उगेल आ.....टेक...
कॉडीयुं कुके ढिंगले कायम..हसतुं  रमतुं  हेत..
जाळवुं शी रीत जांणतो तोये..राखी मुठी मां रेत...
ओछीयाळी मारी ओसरी थाशे.(ज्यां ई) पगली देतुं पा..
फोरम्युं देतुं फुलडुं मारुं..आंगणे उगेल आ.......(01)
माड्युं करे ई रमकडां मांडी.ई.छोडती जाणें छाप
पेट जणीं मारी पारकी थाशे.. बाळ तो हैयुं बाप
वीर भले ऐनी मांड्य विंखे तोय..जीभ थी ना के जा..
फोरम्युं देतुं फुलडुं मारुं..आंगणे उगेल आ......(02)
आंख खुली त्यांतो आंगणे ऐणे..जोयी उभेली जान
सरणायुं ये तो सेरडो पाड्यो..दिधुं  ज्यां कन्या दान
पारकी कीधी आज पिताये .(हवे)रेडवी क्यां जई रा...
फोरम्युं देतुं फुलडुं मारुं..आंगणे उगेल आ.....(03)
फरतुं फेराय हीबका लेतुं..नीचलां ढाळीन  नेंण
मौंन थियां नित्य लागतां मिठा .(जे)..विरडा जेवां वेंण
लमणो वाळीन आंखडी लुछे..(मारा) धट मां वागे घा...
फोरम्युं देतुं फुलडुं मारुं..आंगणे उगेल आ......(04)
ध्रुहक्यो ढोल ने काळजां ध्रुज्यां..गुंज्या विदायुं गांन
निकळ्यो जांणो नांभीये थी मारो ..जीवडो जोगीदांन..
आंख सामे मारो आतमो हाल्यो..(मारे )भणवुं कोने भा..
फोरम्युं देतुं फुलडुं मारुं..आंगणे उगेल आ.....(05)
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लोकसाहित्य


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वैदेही नी वेदना रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                   || वैदेही नी वेदना ||
.                          राग : माढ
.            रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ
अग्नी परीक्षा में आपीती तोये.. छोड्यो कां मारो साथ रे..
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....टेक
अळगुं पितानुं आंगण किधुं..पडीयां तमारे पंथ
उरमां अमारे उछळ्या तेदी... कोड घणेरा  कंथ
हुंकाजे जग आखाय हारे..भडविर करशे भाराथ रे
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०१
काळुं टीलुं मुने चोड्युं कपाळे..मेंणलीयां नो मार्य
चौद वरह हुं पाछळ चाली..ओळखी ना ते आर्य
मैयर सैयर म्हेल मुकीने ..मे पकडी वन नी पाथ रे..
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०२
मांन थकी ऐ राजमां म्हालो .धोबी भर्या जे धाम
राघव शोक न राख रुदामां, नईरे लजावुं नाम
वेदना मारी आ वैदेही केरी..गाशे चारण गाथ
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०३
केंम ठगी मुंने भेजी कपीने..भोळी ने रे भगवान
लाय लगाडी लंकामां त्यारे ..जाळी न जोगीदान
आज पछाडुं  वनमां विदेही..मरवा माटेय माथ रे
हवे  हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०४
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10 दिसंबर 2015

कृपा ही मात केवलम् रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )

.     ||  कृपा ही मात केवलम् ||
.     छंद : चतुस्पदी नाराच अष्टक
.    रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )
उदो उदो उचारणी तुं चारणी महाचला
अनेक रुप आवणी अनाद मात अर् गला
रयां रवेची रोंणबा, दयालु मात देवलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 01||
हीये करंत हाकला हजूर  मात हिंगळा
जीभे वसंत जोगणीं प्रगट्ट काव्य पिंगळा
घमंक पांव घुंघरी  नुपुर नाद नेवलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 02||
अदेख देख दोय मे डणंक दैत डांमणी
अटल्ल थीर आतमा परा सगत्त पांमणी
कटंत फंद काळ काय मात नाम है मलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 03||
हमंक आय  हुकळे धमंक धूप धारणी
दमंक दीग्ध पाळ री चमंक मात चारणी
सुंणंत नाद बाळ पाळ पोगती मया पलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 04||
प्रसन्न तुं पळे पळे अनादी मात आवडा
जपी जगत्त जोगणीय नांगरेल नावडा
बलाळ बुट बैचरीय बुड्ढीयुं  महा बलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 05||
सुरा त्यजो सुरां भजो सूरा बणंत सारणा
अतुल्लनीय आप हो अकल्प कल्प कारणा
पुजंत जात पेढीयां फळां शुभां दीये फलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 06||
गणा शिवा शिवंगणीय पांव लोक पुजतां
धराय देह धारणा सुरग्ग लोक सुजता
करे धरंत कांकणाय कोळती मया कलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 07||
धरंत जोगी दांन ध्यान ऐक नाम ईशरी
तुही त्तिमिर तेजतुं निहारीकाय निसरी
तुं व्योम तु वसुंधराय ज्वाळ ज्योत तुं जलम्
जगे अनंत जोगडा, कृपा ही मात केवलम् || 08||
(जोगीदान गढवी कृत चतुस्पदी नाराच अस्टक).

राघव ने ठबको रचनाः जोगीदान गढवी (चडीया)

.                   || राघव ने ठबको ||
.      राग: तारी केटला जनम नी रे कमांणी रे.
.          रचनाः जोगीदान गढवी (चडीया)
तमे देवी रे सीताने खुब दुभावी रे.,.रुदा ना काठा  रामजी…
तने सेजे रे सरम कां ना आवी…रे कर्युं रे कुडुं कामजी रे.
मैयर सैयर मेली अजोधा.मां आली...वेभव मेली ने हारे वन  हाली रे..सथवारे तारे..सामजी..रे...तोय देवि रे सीताने खुब दुभावी रे रुदा ना काठा रामजी रे....०१
लखन लला ने ज्यारे कीधुं तमे कांने..भुल्युं रे करी छे मोटी भगवांने रे..भटकावी वने भामजी..तमे देवि रे सीताने खुब दुभावी रे रुदा ना काठा रामजी रे....०२
कहे वालमीकी मारा  तप सब त्यागुं रे..मारी वात मांनो बिजुं ना हुं मागुं रे...चडावुं पगे चामजी रे..तोय ..देवि रे सीताने खुब दुभावी रे रुदा ना काठा रामजी रे....०३
ताप सती तपीयो त्यां..अगनी ओलांणीं रे..माडी सीता पछी सीद ने समांणीं रे..धरणीं रे केरे  धामजी रे..तमे देवि रे सीताने खुब दुभावी रे रुदा ना काठा रामजी रे....०४
प्रभु सो लेखांणां  तमे चोपडा ना पांने..पण..दीधो रे ठबको जोगी दाने..रे..गजावी आखुं गाम जी...तमे देवि रे सीताने खुब दुभावी रे रुदा ना काठा रामजी रे....०५

9 दिसंबर 2015

चारण-गढवी समाज जोग संदेश

जय माताजी

चारण-गढवी समाज जोग संदेश

आई श्री सोनल युवक मंडल बनासकांठा पालनपुर  द्रारा  चारण प्रतिभा ऐवोर्ड समारंभ नुं आयोजन आगामी दिवसो मां करवामां आवनार छे जेमां नीचे मुजबनी केटेगरीओ ना ऐवोर्ड समाजनी व्यकितओ ने आपवामां आवशे.
जेमने मार्च 2015 पछी नीचे मुजब नी लायकात मेलवेली होय तेमनेज पोताना बयोदेटा मोकलवा

1=शैक्षणिक (धोरण-07 थी ग्रेज्युसन सुधी मा 70% थि वधू )
2-विशिष्ट प्रतिभा उप्लब्धी
3- रमत-गमत (जिल्ला कक्षा अथवा उपर)
4- सौर्य,बहादुरी वगेरे
5-समाज सेवक
6-वेपार/वाणिजय/नोकरी तथा औधोगिक क्षेत्रे विशेष कामगीरी
7-GPSC/UPSC/PSI 2015 मां पास थयेल तमाम उमेदवारो
8-अन्य

➡ जेनी समाजना लोको ऐ नोंध लेवा विनंती तथा लागता वळगताओ ने जाण करवा विनंती अने पोताना बायोडेटा नीचे दर्शावेल सरनामे ता.05/01/2016 पहेला मोकलवा विनंती छे.
समय वित्या बाद कोई अर्जी ध्यानउपर लेवामा आव्से नही
सरनामुं :-
आई श्री सोनल युवक मंडल
जे.डी.गढवी
करनावती शोपीन्ग सेंटर, ब्हमानी रेस्तोरेंट नी उपर, अमदावाद हाइवे, पालनपुर
वधू वीगत माटे सम्पर्क करे दिनेशभाइ 9723815467
महेशभाइ  9979744788
जे.डी.गढवी 9426704475

       🙏🏼वंदे लूँग मातरम
      🙏 वंदे सोनल मातरम्

राजय कक्षानुं युवा महोत्सव-2015

.        जय माताजी
राजय कक्षानुं युवा महोत्सव-2015

____________________________

रमत-गमत-युवा सांस्कृतिक विभाग गांधीनगरना उपक्रमे 48 मो राजय कक्षानो युवा महोत्सव-2015 ता.09-12-2015ना रोज अरवल्ली खाते आयोजन करवामां आवेल हतो.
राजय कक्षा ना युवा महोत्सव-2015 मां चारण-गढवी समाजना युवानो नीचे मुजबना विजेता थई समाजनुं गौरव वधारेल छे.
प्रथम नंबर विजेताओ

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क्रम      स्पर्धानुं नाम         विजेतानुं नाम
दुहा-छंद-चोपाई - करशन नाराण गढवी (मौवर)- मोटा भाडिया मांडवी कच्छ
बीजा नंबर विजेताओ

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लोक वार्ता - ईश्वर करमशी गढवी - काठडा ता.मांडवी कच्छ
विजेता थयेल तमामने खूब खूब अभीनंदन
आ माहिती आपवा बदल श्री करशनभाई नाराणभाई  नो खूब खूब आभार
टाईप :- www.charanisahity.in

         वंदे सोनल मातरम्  

5 दिसंबर 2015

स्तुति - आईश्री चाळकनेची - कर्ता :- वजमालजी महेडु

आई चाळकनेची - महेडु शाखाना कुऴदेवी 
 जामनगर राजकवि श्री वजमालजी महेडु(होको पिता) अने तेमना पुत्र कवि श्री मुलराज महेडु 

.         स्तुति - आईश्री चाळकनेची
           कर्ता :- वजमालजी महेडु
             दोहो
सेवक काज सुधारणी, समर्ये देणी साद
चाळकनेची चंण्डिका, देवी आध अनाध.
              छंद- भुजंगी
तुंही आध अन्नाध वाणी विधाता,
तुंही रिध्ध सिध्ध नवे निध्ध दाता,
वदे क्रोड तेत्रीस सुरं वरेची,
नमु चंण्डिका रूप चाळक नेची,
नमु चंण्डिका रूप चाळक नेची,
कळा चंद जयोति झळेळे कपालं,
भले कुंडल कान शोभंत मालं,
घरे शुल पाणम् कृपाणम घरची,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची.
प्रथि देशे पारं करे प्रतपाळी,
वसे थान कालीजरां टेकवाळी,
हरे शोक-संताप तापं हरेची,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची (2)
कई दैत मारी दणी झेर किधा,
देवी-देवने सुख आणांद दिधा,
चला चप्पला तोतला तुं चरेची,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची (2)
ईन्द्रादिक देवा करे सेव आवी,
ब्रह्मादिक जोगी तणे मन्न भावी,
नमो दानवा-देव नागं नरेचि,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची (2)
सुरं सात पातळ भोमं निवासं,
वसे वास व्रहेमंड एकास वासं,
डरे डूंगरे वन्नरे डुंगरचि,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची (2)
गुणातित रूपा वदी वेद ग्याता,
षटम शास्त्र-पूराण वाचन्त ख्याता,
भवं टारणं कारणं भवनेची,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची (2)
जयो अंबिका-त्रंबीका जोग माया,
परापार ओमकार पारं न पाया,
गणा पार ना'वे अपारं गणेची,
नमो चंण्डिका रूप चाळक नेची (2)
     छप्पय - कळश छंद - चाळकनेची
चाळकनेची चाळ, आई आव हुं अळग्गो,
महर कर महमाई, आपणो जाण अळग्गो,
तुं माता तुं तात, तुं सगा शेण सगाई,
तुं दाता दहिवाण, वडी जगमात वडाई,
परताप तेज समरथ प्रबळ, कर्ता सरूप कारण-करण
कर जोड कवि "वजीयो" कहे, सदा मात थारे शरण.

कर्ता :- जामनगर राजकवि श्री वजमालजी महेडु
गाम :- वजापर(लोठीया)
जी :- जामनगर - गुजरात

आ रचना मोकलवा बदल विमलभाई महेडु नो खूब खूब आभार

टाईपमां भूल होय तो माफ़ करजो

टाईप बाय :- www.charanisahity.in
       वंदे सोनल मातरम्  

चारण लोक गायक कच्छ -2015

चारण लोक गायक कच्छ -2015 ना वीडियो कनैया स्टूडियो मोटा भाड़िया  द्रारा  YouTube  अपलोड करवा मां आवेल छे जे नीचे मुजब छे 

YouTube पर स्पर्धक नुं नाम टाइप करी सर्च करशो ऐटले वीडियो जोइ शकशो 















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